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समय की धारा

                
                                                         
                            समय एक परिवर्तन है,
                                                                 
                            
तेज धार है इसकी धारा सी,
निर्बाध गति से बढ़ जाता है,
पल पल यूँ ही निकल जाते हैं,
जो एक बाऱ पीछे छूट गया,
वो फिर पीछे ही रह जाता है,
रावण ने भी प्रयास किया था,
समय से आगे निकल जाऊं,
समय के रथ क़ो न रोक सका,
कुरुक्षेत्र में समय रूक गया था,
प्रभु के सम्मान में झुक गया था,
तब गीता का उदघोष हुआ था,
समय तो सुदर्शन है प्रभु का,
जो रोका नहीं जा सकता है,
समय कभी भी कटता नहीं है,
समय की धार सबको काट देती है |
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एक दिन पहले

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