खंडहर के स्तम्भॉ से उठती ध्वनि,
मौन इतिहास क़ो तोड़ बनी प्रतिध्वनि,
सोमनाथ विरासत है एक संस्कृति है,
अधर्म की आंधी से शिखर टूट गया,
शिवालय का पुनः निर्माण हुआ,
सागर की लहरों ने भी देखी थी वो हिंसा,
सागर भी तब रक्त से लाल हुआ था,
किन्तु ये पतन और उत्थान निरन्तर था,
इतिहास की शताब्दियों का अन्तर था,
विनाश और पुनः निर्माण भी एक संस्कृति है,
अहंकार की प्रकृति सदा ही विकृति है,
पुनः निर्माण भारतीय सभ्यता की अलंकृति है,
अठारहवें अभियान में आक्रांता पराजित हुआ था,
न जाने क्यों इतिहास फिर मौन हुआ था?
राजा भोज,राजा सुहेलदेव बने थे रक्षक,
रानी अहल्या बाई होल्कर ने रचना क़ो साकार किया,
लौह पुरुष ने सागर जल में ली थी शपथ,
राष्ट्रनायक ने ही नव निर्माण का आधार दिया,
आओ करें हम सोमनाथ का वंदन,
भारतीय संस्कृति का है ये चन्दन |
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