मुझे तेरा इंतजार रहा , देर शाम तक।
मेरा दिल बेकरार रहा, देर शाम तक।।
मुझसे ये तन्हाई,मिज़ाज पूछती रही।
अपना गमख्वार रहा , देर शाम तक।।
तेरी आहटों की राह , मै देखता रहा।
मुझे तेरा एतबार रहा, देर शाम तक।।
जुगनुओं का झुरमुट,साथ देता रहा।
घर-आंगन गुलजार रहा , शाम तक।।
जाम-ए-आब-ए-चश्म का जादू है ये।
सुरूर-ओ-खुमार रहा,देर शाम तक।।
मुख्तसर गुफ़्तगू ने भड़काये हैं शौले।
तेरा ही तलबगार रहा,देर शाम तक।।
हर शै चश्मदीद हैं जो हालात थे मेरे।
मगर मै दरकिनार रहा,देर शाम तक।।
मगर ये अपने लब खुलने नही दिये।
ख़ामोश इज़हार रहा,देर शाम तक।।
-यूनुस खान
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