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इन्दीवर: एक महान गीतकार जो हमें जीना सिखा गए, ज़िंदगी के मायने बता गए

साहित्य
                
                                                         
                            दोस्तों ! आज 15 अगस्त है। आप सब जानते हैं कि आज हमारे देश को अंग्रेज़ों की गुलामी से आज़ादी मिली थी, लेकिन आप में से बहुत कम को पता होगा कि आज ही के दिन 1960 के दशक के मशहूर और महान गीतकार इन्दीवर का जन्म झाँसी से 20 किलोमीटर दूर बरुआ सागर कस्बे में हुआ था।
                                                                 
                            

तो क्यों न आज ऐसे गीतकार को याद किया जाए जिनके गीतों में प्रणय-निवेदन, सौंदर्य-बोध, विरह की पीड़ा और रोमांस का उत्सव ही नहीं, देशभक्ति का उत्साह भी है.. नाते-रिश्तों का चटक रंग भी है और जीवन जीने के प्रेरक मंत्र भी.. 

दरअसल पाँच दशक के फिल्मी करियर के दौरान 300 से अधिक फ़िल्मों में 1000 से अधिक गीत लिखने वाले इन्दीवर ऐसे कलमकार हैं जो अपने अल्फाजों में बयाँ एहसासों से पूरी दुनिया को ज़िंदगी के मायने बता गए.. हम सबको जीना सिखा गए..

मधुवन ख़ुशबू देता है..

आज भौतिकता चरम पर है। पूरी धरती के साथ सारे आसमान को मुट्ठी में कैद करने की बेईमान होड़ मची है। परस्पर सहयोग, विश्वास, अपनेपन और परोपकार जैसे जीवन-मूल्य दिन-प्रतिदिन दम तोड़ रहे हैं। ऐसे दमघोंटू माहौल में याद आता है फिल्म 'साजन बिना सुहागन' के लिए इन्दीवर द्वारा लिखा यह गीत.. 

मधुबन खुशबू देता है, सागर सावन देता है 
जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है 

सूरज ना बन पाए तो बनके दीपक जलता चल 
फूल मिलें या अंगारे, सच की राहों पे चलता चल 
प्यार दिलों को देता है, अश्कों को दामन देता है 
जीना उसका जीना है जो औरों को जीवन देता है..
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मधुवन ख़ुशबू देता है..

एक वर्ष पहले

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