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अब्दुल हमीद अदम: आप की ख़ुशी हुज़ूर बोलिए न बोलिए

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हम ने हसरतों के दाग़ आँसुओं से धो लिए
आप की ख़ुशी हुज़ूर बोलिए न बोलिए

क्या हसीन ख़ार थे जो मिरी निगाह ने
सादगी से बारहा रूह में चुभो लिए

मौसम-ए-बहार है अम्बरीं ख़ुमार है
किस का इंतिज़ार है गेसुओं को खोलिए

ज़िंदगी का रास्ता काटना तो था 'अदम'
जाग उठ तो चल दिए थक गए तो सो लिए

एक दिन पहले

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