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DBUU: ISRO चेयरमैन ने डीबीयूयू की रिसर्च-ओरिएंटेड शिक्षा को सराहा, 66वें AMI सम्मेलन में युवाओं को दी प्रेरणा
Thu, 13 Aug 2026 01:50 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
Media Solutions Initiative
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Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 13 Aug 2026 01:50 PM IST
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इसरो चेयरमैन वी. नारायणन
- फोटो : अमर उजाला
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देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी (डीबीयूयू) में आयोजित 66वें एएमआई वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और रिसर्च कॉन्क्लेव के समापन समारोह में इसरो चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने यूनिवर्सिटी की रिसर्च-ओरिएंटेड लर्निंग और इंटरडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण की सराहना करते हुए युवा वैज्ञानिकों और छात्रों का मार्गदर्शन किया।
2040 तक शीर्ष देशों के बराबर होगा भारत का स्पेस प्रोग्राम
अपने प्रेरणादायक संबोधन में डॉ. नारायणन ने भारत की तकनीकी प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "2040 तक हमारा स्पेस प्रोग्राम दुनिया के किसी भी शीर्ष देश के बराबर होगा।" उन्होंने बताया कि सैटेलाइट तकनीक, एप्लिकेशन और मजबूत ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर ही भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बनाते हैं।
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2040 तक शीर्ष देशों के बराबर होगा भारत का स्पेस प्रोग्राम
अपने प्रेरणादायक संबोधन में डॉ. नारायणन ने भारत की तकनीकी प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "2040 तक हमारा स्पेस प्रोग्राम दुनिया के किसी भी शीर्ष देश के बराबर होगा।" उन्होंने बताया कि सैटेलाइट तकनीक, एप्लिकेशन और मजबूत ग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर ही भारत को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति बनाते हैं।
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युवा वैज्ञानिकों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी
छात्रों और उभरते शोधकर्ताओं में नया उत्साह भरते हुए डॉ. नारायणन ने कहा, "वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी के कंधों पर देश के उज्ज्वल भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी है। आपको समझदारी और नवोन्मेषी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। इसरो और देश के वैज्ञानिक संस्थान आपको हर कदम पर सही मार्गदर्शन और समर्थन देने के लिए सदैव तत्पर हैं।"
रिसर्च और इनोवेशन पर केंद्रित एकेडमिक माहौल
सम्मेलन के दौरान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इंटरडिसिप्लिनरी स्टडीज में हो रहे नए प्रयोगों पर विस्तृत चर्चा हुई। डीबीयूयू जैसे संस्थान अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग विशेषज्ञों की मेंटरशिप के जरिए छात्रों को वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए तैयार कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी का मुख्य उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि छात्रों में विश्लेषणात्मक सोच, समस्या-समाधान क्षमता और अनुसंधान के प्रति जुनून विकसित करना है।
छात्रों और उभरते शोधकर्ताओं में नया उत्साह भरते हुए डॉ. नारायणन ने कहा, "वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी के कंधों पर देश के उज्ज्वल भविष्य की बड़ी जिम्मेदारी है। आपको समझदारी और नवोन्मेषी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। इसरो और देश के वैज्ञानिक संस्थान आपको हर कदम पर सही मार्गदर्शन और समर्थन देने के लिए सदैव तत्पर हैं।"
रिसर्च और इनोवेशन पर केंद्रित एकेडमिक माहौल
सम्मेलन के दौरान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इंटरडिसिप्लिनरी स्टडीज में हो रहे नए प्रयोगों पर विस्तृत चर्चा हुई। डीबीयूयू जैसे संस्थान अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग विशेषज्ञों की मेंटरशिप के जरिए छात्रों को वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान खोजने के लिए तैयार कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी का मुख्य उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि छात्रों में विश्लेषणात्मक सोच, समस्या-समाधान क्षमता और अनुसंधान के प्रति जुनून विकसित करना है।
डीबीयूयू का 20 से अधिक वर्षों का गौरवशाली सफर
देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी पिछले दो दशकों से रिसर्च-आधारित शिक्षा प्रदान कर रही है। डीबीयूयू ने हमेशा अलग-अलग विषयों में रिसर्च के जरिए ज्ञान के निर्माण पर जोर दिया है। इसके अलावा, चूंकि यह अलग-अलग क्षेत्रों में कई तरह के प्रोग्राम ऑफर करता है, इसलिए छात्रों को इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म मिलते हैं जो सहयोग को बढ़ावा देते हैं। बातचीत के दौरान, डॉ. नारायणन ने छात्रों के लिए वैज्ञानिक अनुशासन, इनोवेशन और लंबे समय के रिसर्च विजन के महत्व पर प्रकाश डाला और उनमें जिज्ञासा की भावना को जगाया।
आज वैज्ञानिक संस्थान लगातार रिसर्च और तकनीकी विकास के जरिए राष्ट्रीय प्रगति में योगदान दे रहे हैं। डीबीयूयू जैसी यूनिवर्सिटीज ऐसा अकादमिक माहौल बना रही हैं जहां रिसर्च, क्रिएटिविटी और सहयोग सीखने के मुख्य आधार बन गए हैं। छात्रों को अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एकेडेमिक्स व प्रोफेशनल्स की एक्सपर्ट मेंटरशिप के साथ असल दुनिया की समस्याओं की जांच करने और उन्हें हल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
देव भूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी पिछले दो दशकों से रिसर्च-आधारित शिक्षा प्रदान कर रही है। डीबीयूयू ने हमेशा अलग-अलग विषयों में रिसर्च के जरिए ज्ञान के निर्माण पर जोर दिया है। इसके अलावा, चूंकि यह अलग-अलग क्षेत्रों में कई तरह के प्रोग्राम ऑफर करता है, इसलिए छात्रों को इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म मिलते हैं जो सहयोग को बढ़ावा देते हैं। बातचीत के दौरान, डॉ. नारायणन ने छात्रों के लिए वैज्ञानिक अनुशासन, इनोवेशन और लंबे समय के रिसर्च विजन के महत्व पर प्रकाश डाला और उनमें जिज्ञासा की भावना को जगाया।
आज वैज्ञानिक संस्थान लगातार रिसर्च और तकनीकी विकास के जरिए राष्ट्रीय प्रगति में योगदान दे रहे हैं। डीबीयूयू जैसी यूनिवर्सिटीज ऐसा अकादमिक माहौल बना रही हैं जहां रिसर्च, क्रिएटिविटी और सहयोग सीखने के मुख्य आधार बन गए हैं। छात्रों को अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एकेडेमिक्स व प्रोफेशनल्स की एक्सपर्ट मेंटरशिप के साथ असल दुनिया की समस्याओं की जांच करने और उन्हें हल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।