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कार खरीदने का गोल्डन रूल: जानें क्या है 20/4/10 का नियम? और 15 लाख की कार पर लाखों रुपये कैसे बचा सकते हैं
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Fri, 24 Apr 2026 11:48 AM IST
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सार
20/4/10 Rule for Car Loan: मध्यम वर्गीय परिवार के लिए वाहन खरीदना एक सपना होता है, खासकर 10 से 15 लाख की महंगी गाड़ियां। इसलिए सभी के लिए 20/4/10 नियम जानना बेहद जरूरी है, जानिए कैसे इस नियम से EMI कम रहती है, ब्याज में बचत होती है और फाइनेंशियल दबाव घटता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : freepik
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विस्तार
How much down payment for car: 15 लाख रुपये तक की कार खरीदना एक बड़ा आर्थिक फैसला माना जाता है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहली बार कार ले रहे हैं। ज्यादातर खरीदार इस खरीदारी के लिए लोन का सहारा लेते हैं, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा डाउन पेमेंट को जानना बेहद जरूरी हाता है। शुरुआत में लिया गया यह फैसला तय करता है कि आगे आपकी EMI कितनी होगी और कुल खर्च कितना बढ़ेगा।
क्या है 20/4/10 नियम?
ऑटो एक्सपर्ट्स अक्सर 20/4/10 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। इस नियम के अनुसार, कार की ऑन-रोड कीमत का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा डाउन पेमेंट के रूप में देना चाहिए। इसके साथ ही लोन की अवधि चार साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और कार से जुड़े कुल खर्च आपकी मासिक आय के 10 प्रतिशत के भीतर होना चाहिए। यह तरीका आपके बजट को संतुलित रखता है और लंबे समय तक वित्तीय दबाव से बचाता है।
मान लीजिए अगर किसी का बजट 10 से 15 लाख रुपये के बीच है, तो 20% से 30% तक डाउन पेमेंट करना एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। यानी आपको लगभग 2 लाख से 4.5 लाख रुपये तक पहले देना चाहिए। हालांकि, कई बैंक 90 प्रतिशत या 100 प्रतिशत तक लोन देने को तैयार रहते हैं, लेकिन ज्यादा लोन लेने से ब्याज का बोझ काफी बढ़ जाता है।
ज्यादा डाउन पेमेंट क्यों है जरूरी?
अगर आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत है, तो 40% से 50% तक डाउन पेमेंट करना और भी फायदेमंद हो सकता है। इससे लोन की राशि कम हो जाती है, EMI हल्की रहती है और आपकी सैलरी पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। साथ ही, आप अपने अन्य जरूरी खर्चों और बचत पर भी ध्यान दे पाते हैं।
इसके अन्य फायदे क्या है?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ज्यादा डाउन पेमेंट करने के बड़े फायदे हैं। जैसे इससे ब्याज में अच्छी-खासी बचत होती है। लोन अमाउंट कम होने से कुल ब्याज भी कम देना पड़ता है। इसके अलावा, बैंक ऐसे ग्राहकों को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं, जिससे बेहतर ब्याज दर मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसके अलावा एक और अहम पहलू भी है, जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। वह कार की तेजी से घटती वैल्यू है।
अपसाइड-डाउन लोन क्या है?
माना जाता है कि नई कार पहले साल में ही 20-25% तक अपनी कीमत खो देती है। अगर आपने कम डाउन पेमेंट किया है, तो ऐसी हो सकता है कि आपके लोन की राशि कार की मौजूदा कीमत से ज्यादा हो जाए। इसे अपसाइड-डाउन लोन कहा जाता है। ज्यादा डाउन पेमेंट इस जोखिम को काफी हद तक कम करता है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि आप अपनी पूरी बचत डाउन पेमेंट में न कर दें। हमेशा एक इमरजेंसी फंड अपने पास रखें, ताकि अचानक आने वाले खर्चों को आसानी से संभाला जा सके।
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क्या है 20/4/10 नियम?
ऑटो एक्सपर्ट्स अक्सर 20/4/10 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। इस नियम के अनुसार, कार की ऑन-रोड कीमत का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा डाउन पेमेंट के रूप में देना चाहिए। इसके साथ ही लोन की अवधि चार साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और कार से जुड़े कुल खर्च आपकी मासिक आय के 10 प्रतिशत के भीतर होना चाहिए। यह तरीका आपके बजट को संतुलित रखता है और लंबे समय तक वित्तीय दबाव से बचाता है।
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मान लीजिए अगर किसी का बजट 10 से 15 लाख रुपये के बीच है, तो 20% से 30% तक डाउन पेमेंट करना एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। यानी आपको लगभग 2 लाख से 4.5 लाख रुपये तक पहले देना चाहिए। हालांकि, कई बैंक 90 प्रतिशत या 100 प्रतिशत तक लोन देने को तैयार रहते हैं, लेकिन ज्यादा लोन लेने से ब्याज का बोझ काफी बढ़ जाता है।
ज्यादा डाउन पेमेंट क्यों है जरूरी?
अगर आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत है, तो 40% से 50% तक डाउन पेमेंट करना और भी फायदेमंद हो सकता है। इससे लोन की राशि कम हो जाती है, EMI हल्की रहती है और आपकी सैलरी पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। साथ ही, आप अपने अन्य जरूरी खर्चों और बचत पर भी ध्यान दे पाते हैं।
इसके अन्य फायदे क्या है?
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ज्यादा डाउन पेमेंट करने के बड़े फायदे हैं। जैसे इससे ब्याज में अच्छी-खासी बचत होती है। लोन अमाउंट कम होने से कुल ब्याज भी कम देना पड़ता है। इसके अलावा, बैंक ऐसे ग्राहकों को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं, जिससे बेहतर ब्याज दर मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसके अलावा एक और अहम पहलू भी है, जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। वह कार की तेजी से घटती वैल्यू है।
अपसाइड-डाउन लोन क्या है?
माना जाता है कि नई कार पहले साल में ही 20-25% तक अपनी कीमत खो देती है। अगर आपने कम डाउन पेमेंट किया है, तो ऐसी हो सकता है कि आपके लोन की राशि कार की मौजूदा कीमत से ज्यादा हो जाए। इसे अपसाइड-डाउन लोन कहा जाता है। ज्यादा डाउन पेमेंट इस जोखिम को काफी हद तक कम करता है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि आप अपनी पूरी बचत डाउन पेमेंट में न कर दें। हमेशा एक इमरजेंसी फंड अपने पास रखें, ताकि अचानक आने वाले खर्चों को आसानी से संभाला जा सके।
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