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Hindi News ›   Automobiles News ›   Car Breaks Down After Waterlogging Repairs: Delhi Consumer Court Orders Free Repair And Compensation

मरम्मत के बाद फिर खराब हुई पानी में डूबी कार: उपभोक्ता आयोग ने आर्मी अफसर के हक में क्या बड़ा फैसला सुनाया?

Mon, 19 Oct 2026 07:40 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 19 Oct 2026 07:40 PM IST
सार

दिल्ली में एक आर्मी ऑफिसर की पानी में डूबी कार मरम्मत के कुछ ही हफ्तों बाद दोबारा खराब हो गई। मामले की सुनवाई करते हुए दक्षिण-पश्चिम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने सर्विस सेंटर को कार की मुफ्त मरम्मत कर उसे दोबारा सौंपने का आदेश दिया है।

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Car Breaks Down After Waterlogging Repairs: Delhi Consumer Court Orders Free Repair And Compensation
Consumer Court on Car Service - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

दिल्ली के साउथ वेस्ट जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक आर्मी अधिकारी (मेजर शिम्ना एम के) की शिकायत पर अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने कार सर्विस सेंटर को निर्देश दिया है कि वह मेजर की जलभराव में खराब हुई कार की मुफ्त में पूरी रिपेयरिंग करे और उन्हें 50,000 रुपये का मुआवजा और मुकदमे का खर्च अदा करे। 
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  • अदालत की सख्त टिप्पणी: आयोग के अध्यक्ष सुरेश कुमार गुप्ता और सदस्य हर्षाली कौर की पीठ ने 6 अक्तूबर को अपना आदेश सुनाते हुए कहा कि डिलीवरी मिलने के महज एक महीने के भीतर कार के गियरबॉक्स में समस्या आना यह साफ दर्शाता है कि सर्विस सेंटर द्वारा गाड़ी की ठीक से मरम्मत नहीं की गई थी। इसके लिए आयोग ने सर्विस सेंटर को 'सेवा में कमी' का दोषी ठहराया। 
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जलभराव के बाद कार के एस्टीमेट और रिपेयरिंग में क्या गड़बड़ी हुई थी?

पूरा मामला 2021 में शुरू हुआ, जब दिल्ली के वसंत कुंज स्थित एक पार्किंग लॉट में जलभराव के कारण गाड़ी आंशिक रूप से पानी में डूब गई थी:
  • एस्टीमेट में फेरबदल: शिकायतकर्ता ने 9 अप्रैल 2019 को यह कार खरीदी थी। जलभराव के बाद सर्विस सेंटर ने शुरुआत में मरम्मत का अनुमानित खर्च 6,79,092 रुपये बताया। जिसे बिना किसी स्पष्टीकरण के घटाकर पहले 4.21 लाख रुपये और फिर 3,61,403 रुपये कर दिया गया।
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  • सहमति के बिना पार्ट्स बदलना: फाइनल बिल 3.61 लाख रुपये का बना, जिसमें से बीमा कंपनी ने 3.40 लाख रुपये का भुगतान किया। मेजर का आरोप था कि जो पार्ट्स इंश्योरेंस में कवर नहीं थे, उन्हें बदलने से पहले उनकी सहमति नहीं ली गई। 
  • डिलीवरी के तुरंत बाद खराबी: 21 जनवरी 2022 को जब उन्होंने गाड़ी की डिलीवरी ली, तो उसी दिन डैशबोर्ड पर चेतावनी लाइटें जलने लगीं और स्टीयरिंग मॉड्यूल में दिक्कत आ गई। इसके बाद 9 फरवरी 2022 को धौला कुआं के पास कार पूरी तरह बंद हो गई और फिर आगे नहीं बढ़ी, जिसके बाद उसे टो करके वर्कशॉप ले जाना पड़ा।

 

आयोग ने कार निर्माता और इंश्योरेंस कंपनी को राहत क्यों दी?

आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए कार निर्माता कंपनी और इंश्योरेंस कंपनी को किसी भी तरह की लापरवाही से मुक्त कर दिया:
  • निर्माता कंपनी पर कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं: कोर्ट ने पाया कि कार में किसी तरह के मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट को साबित करने के लिए कोई विशेषज्ञ रिपोर्ट पेश नहीं की गई थी।इसलिए निर्माता कंपनी को दोषी नहीं माना गया।
  • बीमा कंपनी का सही मूल्यांकन: इंश्योरेंस कंपनी के सर्वेयर ने नुकसान का सही आकलन (3.44 लाख रुपये) किया था। और उसी आधार पर 3.40 लाख रुपये का क्लेम सेटल कर दिया था। इसलिए इंश्योरेंस कंपनी की सेवा में भी कोई कमी नहीं पाई गई। 

 

सर्विस सेंटर को आदेश में क्या-क्या हिदायत दी गई है?

  • मुफ्त रिपेयरिंग और डिलीवरी: उपभोक्ता आयोग ने सर्विस सेंटर को निर्देश दिया है कि वह कार की सभी कमियों (खासकर गियरबॉक्स और इंजन की जांच) को दूर करके गाड़ी की मुफ्त में पूरी रिपेयरिंग करे और उसे शिकायतकर्ता को सौंपे।
  • 45 दिनों की समयसीमा: सर्विस सेंटर को आदेश मिलने के 45 दिनों के भीतर 50,000 रुपये के मुआवजे का भुगतान करना होगा। अगर तय समय में भुगतान नहीं किया जाता है, तो आदेश की तारीख से पूरी रकम की वसूली तक 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देना होगा। 

 

गाड़ी रिपेयर कराते वक्त ग्राहक किन बातों का ध्यान रखें?

यदि आपकी कार मरम्मत के बाद भी बार-बार खराब होती है, तो इन बातों को हमेशा याद रखें:
  1. सारे दस्तावेज संभालकर रखें: रिपेयरिंग के सभी एस्टीमेट, फाइनल बिल, जॉब कार्ड, इंस्पेक्शन रिपोर्ट और सर्विस सेंटर के साथ हुई बातचीत का लिखित रिकॉर्ड रखें।
  2. लागत में बदलाव का कारण पूछें: यदि रिपेयर एस्टीमेट में कोई बड़ा बदलाव किया जाता है, तो उसका लिखित कारण मांगें।
  3. मदद के लिए यहां संपर्क करें: उपभोक्ता से जुड़ी ऐसी ही शिकायतों के लिए आप अपने राज्य की कंज्यूमर हेल्पलाइन (दिल्ली: 011-23379146) पर संपर्क कर सकते हैं। या नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर 1915 पर कॉल करके मदद पा सकते हैं।
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