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किन राज्यों में E85 वाहनों का रजिस्ट्रेशन सबसे ज्यादा हुआ है?: 99% हिस्सेदारी के साथ टू-व्हीलर्स का दबदबा

Wed, 28 Oct 2026 10:23 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 28 Oct 2026 10:23 PM IST
सार

  • भारत में E85 फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अपनाने का चलन पिछले पांच महीनों में तेजी से बढ़ा है।
  • सरकार के Vahan पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, जून से अब तक देश में कुल 7,742 E85 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।

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E85 Flex-Fuel Vehicle Registrations Surge in India: Two-Wheelers Account for Over 99 Per Cent of Total Sales
E85 Flex-Fuel Vehicles - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत में पर्यावरण के अनुकूल और किफायती ईंधन विकल्पों की दिशा में कदम बढ़ाते हुए फ्लेक्स-फ्यूल यानी E85 वाहनों (E85 Vehicles) के पंजीकरण में पिछले पांच महीनों के दौरान जबरदस्त तेजी देखी गई है। E85 वाहन वे होते हैं जो 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर सुचारू रूप से चल सकते हैं। केंद्र सरकार के वाहन (Vahan) पोर्टल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस साल जून से लेकर अब तक देश में कुल 7,742 E85 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। हालांकि, इस ट्रेंड की सबसे बड़ी बात यह है कि कुल बिक्री में 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी अकेले दोपहिया वाहनों की है, जबकि फ्लेक्स-फ्यूल कारों की मांग अभी काफी सुस्त बनी हुई है।

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महीने-दर-महीने और राज्यवार बिक्री के आंकड़े क्या कहते हैं?

वाहन पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, बीते तीन महीनों से देश में औसतन 2,000 से अधिक E85 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हर महीने दर्ज किया जा रहा है:
  • महीने-दर-महीने ग्रोथ: जून 2026 में केवल 3 वाहनों के रजिस्ट्रेशन से शुरुआत हुई थी, जो जुलाई में बढ़कर 231 हुई। इसके बाद अगस्त में 2,450 और सितंबर में 2,271 वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ। अक्तूबर महीना 2,617 रजिस्ट्रेशन के साथ अब तक का सबसे बेहतरीन महीना साबित हुआ, जिसे त्योहारी सीजन का भी बड़ा फायदा मिला।
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  • टॉप राज्य: E85 वाहनों के रजिस्ट्रेशन के मामले में राजस्थान 1,823 वाहनों के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद उत्तर प्रदेश (1,470), बिहार (957), हरियाणा (575) और दिल्ली (472) का स्थान आता है।
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किस कंपनी ने बेचे सबसे ज्यादा फ्लेक्स-फ्यूल वाहन?

देश में फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल्स की उपलब्धता बेहद सीमित है, जिसके चलते ऑटोमेकर्स की बिक्री में बड़ा अंतर देखने को मिलता है:
  • हीरो मोटोकॉर्प का दबदबा: दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) अकेले 7,685 रजिस्ट्रेशन के साथ बाजार में एकतरफा बढ़त बनाए हुए है।
  • अन्य कंपनियां: दूसरे स्थान पर यामाहा (Yamaha) केवल 38 रजिस्ट्रेशन और चारपहिया वाहन क्षेत्र में मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) महज 19 रजिस्ट्रेशन दर्ज करा सकी है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, हीरो, यामाहा और मारुति सुजुकी के अलावा किसी भी अन्य प्रमुख OEM (मूल उपकरण निर्माता) ने बाजार में अपने फ्लेक्स-फ्यूल मॉडल्स लॉन्च ही नहीं किए हैं। जो कम बिक्री का मुख्य कारण है।


टू-व्हीलर में सफलता और पैसेंजर कारों में सुस्ती का क्या कारण है?

विशेषज्ञों के अनुसार, दोपहिया और चारपहिया वाहनों के ग्राहकों की प्राथमिकताओं और ईंधन खर्च के गणित में बड़ा अंतर है:
  • टू-व्हीलर में बचत का गणित: जानकारों का कहना है कि इथेनॉल ईंधन में मिलने वाली 20 से 25 प्रतिशत तक की कीमत छूट ग्राहकों को आकर्षित कर रही है। यद्यपि इथेनॉल पर माइलेज (फ्यूल एफिशिएंसी) थोड़ी कम मिलती है, लेकिन ईंधन का सस्ता दाम इस नुकसान की भरपाई कर देता है, जिससे टू-व्हीलर खरीदार इसे हाथों-हाथ ले रहे हैं।
  • फोर-व्हीलर में रुकावटें: पैसेंजर कार की खरीदारी कुल स्वामित्व लागत, लंबी अवधि के रनिंग कॉस्ट और वाहन की कीमत से तय होती है। इसके अलावा, देश में इथेनॉल पंप इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और E85 ईंधन की सीमित उपलब्धता कारों के सेगमेंट में इसके प्रसार को रोक रही है।


भारत में फ्लेक्स-फ्यूल और इथेनॉल मोबिलिटी का भविष्य कैसा रहेगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल आधारित मोबिलिटी अब केवल ब्लेंडिंग प्रोग्राम न रहकर भारत की मुख्य मोबिलिटी रणनीति का हिस्सा बन रही है। E100 से जुड़े नोटिफिकेशन इस बदलाव को रेखांकित करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की अगली ग्रोथ स्टेज इस बात पर निर्भर करेगी कि ऑटो कंपनियां किस हद तक किफायती दामों पर E85 और E100 मॉडल्स पेश करती हैं और साथ ही समानांतर रूप से ईंधन स्टेशनों (ईंधन इंफ्रास्ट्रक्चर) का विस्तार कितनी तेजी से होता है। आखिरकार इथेनॉल मोबिलिटी की सफलता इस बात से तय होगी कि वह आम उपभोक्ता को पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ कितनी वास्तविक बचत दे पाती है। 
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