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EV vs Hydrogen Cars: दोनों ही बिजली से चलती हैं फिर भी क्यों है इतना अंतर? जानें आपके लिए कौन सी है बेस्ट
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Wed, 17 Jun 2026 03:48 PM IST
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सार
EV vs Hydrogen Car: इलेक्ट्रिक कार और हाइड्रोजन कार दोनों का नाम आजकल खूब सुनाई दे रहा है। अक्सर लोग दोनों काे एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन बहुत से लोगों को नहीं पता कि इनकी तकनीक और काम करने का तरीका काफी अलग है। आइए जानते हैं कि दोनों में से लोगों के लिए कौन-सी तकनीक ज्यादा फायदेमंद है?
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार
Electric Car vs Hydrogen Car: प्रदूषण कम करने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों पर तेजी से काम हो रहा है। हालांकि, आम लोगों के बीच आज भी यह भ्रम बना रहता है कि इलेक्ट्रिक कार और हाइड्रोजन कार एक ही तरह की तकनीक हैं। हकीकत में दोनों वाहन बिजली से चलते जरूर हैं, लेकिन ऊर्जा को स्टोर करने और उसे पहियों तक पहुंचाने का तरीका पूरी तरह अलग है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इन दोनों तकनीकों में क्या अंतर है, कौन ज्यादा प्रभावी है और भविष्य किस दिशा में जाता दिख रहा है।
बिजली से चलती हैं दोनों, लेकिन तकनीक अलग
इलेक्ट्रिक कार कैसे काम करती है ?
हाइड्रोजन कार का सिस्टम कैसे काम करता है?
काम करने में कौन है आगे?
इलेक्ट्रिक कारों के बड़े फायदे
हाइड्रोजन कारों में सबसे बड़ा फायदा क्या होता है?
आम लोगों के लिए कौन सा विकल्प बेहतर?
इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़ी चुनौती
क्या हाइड्रोजन वास्तव में पूरी तरह ग्रीन है?
मार्केट में किसका दबदबा?
बिजली से चलती हैं दोनों, लेकिन तकनीक अलग
- अक्सर माना जाता है कि इलेक्ट्रिक कार और हाइड्रोजन कार एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी तकनीक हैं, लेकिन तकनीकी रूप से देख जाए तो दोनों ही वाहनों में पहियों को चलाने का काम इलेक्ट्रिक मोटर ही करती है।
- फर्क सिर्फ इतना है कि इलेक्ट्रिक कार सीधे बैटरी में बिजली स्टोर करती है, जबकि हाइड्रोजन कार हाइड्रोजन गैस के रूप में ऊर्जा को संग्रहित करती है और बाद में उसी गैस से बिजली तैयार कर मोटर को चलाती है।
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इलेक्ट्रिक कार कैसे काम करती है ?
- इलेक्ट्रिक कार का सिस्टम काफी सीधा और सरल होता है। इसे चार्जिंग स्टेशन या घर के पावर सप्लाई से चार्ज किया जाता है।
- चार्ज की गई बिजली लिथियम-आयन बैटरी में स्टोर होती है और जरूरत पड़ने पर सीधे इलेक्ट्रिक मोटर तक पहुंचती है।
- चूंकि इस प्रक्रिया में ऊर्जा परिवर्तन के चरण कम होते हैं, इसलिए इसकी कार्यक्षमता काफी ज्यादा रहती है। बिजली ग्रिड से लेकर पहियों तक ऊर्जा पहुंचाने की क्षमता 70 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है।
हाइड्रोजन कार का सिस्टम कैसे काम करता है?
- हाइड्रोजन वाहन थोड़ा अलग तरीके से काम करते हैं। पहले हाइड्रोजन गैस का उत्पादन किया जाता है, फिर उसे कंप्रेस कर स्टोर किया जाता है और रीफ्यूलिंग स्टेशन तक पहुंचाया जाता है।
- जब वाहन में हाइड्रोजन भरी जाती है, तो कार के अंदर मौजूद फ्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से बिजली बनाता है। यही बिजली मोटर को चलाती है और वाहन आगे बढ़ता है।
काम करने में कौन है आगे?
- ऊर्जा दक्षता की बात करें तो इलेक्ट्रिक कारें फिलहाल काफी आगे मानी जाती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाइड्रोजन बनाने, उसे स्टोर करने, ट्रांसपोर्ट करने और फिर बिजली में बदलने की प्रक्रिया में काफी ऊर्जा खर्च हो जाती है।
- यही वजह है कि हाइड्रोजन कारों की कुल कार्यक्षमता लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक ही रह जाती है। इसके मुकाबले इलेक्ट्रिक कारें ऊर्जा का कहीं बेहतर उपयोग करती हैं।
इलेक्ट्रिक कारों के बड़े फायदे
- इलेक्ट्रिक वाहनों में मैकेनिकल पार्ट्स कम होते हैं, इसलिए रखरखाव आसान रहता है। साथ ही प्रति किलोमीटर चलाने की लागत भी कम होती है।
- घर, ऑफिस या सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन पर आसानी से चार्जिंग की सुविधा मिल जाती है, जिससे रोजमर्रा के उपयोग में यह काफी सुविधाजनक साबित होती हैं।
हाइड्रोजन कारों में सबसे बड़ा फायदा क्या होता है?
- हाइड्रोजन वाहनों की सबसे बड़ी खासियत उनका रीफ्यूलिंग समय है। जहां इलेक्ट्रिक कारों को चार्ज होने में घंटों लग सकते हैं, वहीं हाइड्रोजन कार में सिर्फ लगभग 5 मिनट में ईंधन भरा जा सकता है।
- इसके अलावा एक बार फुल टैंक होने पर कई मॉडल 500 से 650 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम होते हैं।
आम लोगों के लिए कौन सा विकल्प बेहतर?
- अगर बात निजी उपयोग की हो तो इलेक्ट्रिक कार फिलहाल ज्यादा व्यावहारिक विकल्प मानी जाती है। ज्यादातर लोग अपनी कार को रात में घर पर चार्ज कर सकते हैं और रोजमर्रा की ड्राइविंग के लिए इसकी रेंज पर्याप्त होती है।
- वहीं, लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक, बसें और कमर्शियल फ्लीट वाहन हाइड्रोजन तकनीक से अधिक फायदा उठा सकते हैं क्योंकि उन्हें लंबे समय तक चार्जिंग के लिए रुकना नहीं पड़ता।
इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़ी चुनौती
- इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नए चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत जरूर है, लेकिन इनके लिए मौजूदा बिजली नेटवर्क का उपयोग किया जा सकता है।
- दूसरी ओर हाइड्रोजन तकनीक के लिए उत्पादन केंद्र, स्टोरेज सिस्टम, विशेष ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और नए रीफ्यूलिंग स्टेशन जैसे पूरे इकोसिस्टम को शुरू से विकसित करना होगा।
- यही वजह है कि इसका विस्तार अपेक्षाकृत महंगा और धीमा माना जाता है।
क्या हाइड्रोजन वास्तव में पूरी तरह ग्रीन है?
- हाइड्रोजन कारें चलते समय धुआं नहीं छोड़तीं, लेकिन आजकल दुनिया की अधिकांश हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस और अन्य फॉसिल फ्यूल से तैयार की जाती है।
- ऐसे में जब तक हाइड्रोजन का उत्पादन बड़े पैमाने पर सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से नहीं होगा, तब तक इसके पर्यावरणीय लाभ पूरी तरह हासिल नहीं किए जा सकते।
मार्केट में किसका दबदबा?
- वैश्विक बाजार में इलेक्ट्रिक कारें तेजी से आगे बढ़ चुकी हैं। वर्ष 2025 में दुनिया भर में 2 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री दर्ज की गई, जो कुल वाहन बिक्री का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा था। 2026 में इसके 28 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
- इसके मुकाबले हाइड्रोजन कारों की हिस्सेदारी अभी बेहद सीमित है। अनुमान है कि 2044 तक भी शून्य-उत्सर्जन वाहनों के कुल बाजार में हाइड्रोजन वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत के आसपास ही रह सकती है।