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India Auto Metal: भारत बना ग्लोबल ऑटो पार्ट्स का नया हब, 2030 तक 95 अरब डॉलर के पार जाएगा मेटल फॉर्मिंग बाजार

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Wed, 01 Apr 2026 01:15 PM IST
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सार

India Auto Metal Forming Market: एवेन्डस कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का ऑटोमोटिव मेटल फॉर्मिंग बाजार 80 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है और 2030 तक 90-95 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत अब ऑटो पार्ट्स का बड़ा निर्यातक बन गया है और ग्लोबल सप्लाई चेन में अहम भूमिका निभा रहा है। ICE वाहनों के पार्ट्स में भी भारत 'लास्ट मैन स्टैंडिंग' के रूप में उभर रहा है, जिससे विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है।

India’s Auto Metal Forming Industry Surges Past $80 Billion, Set to Lead Global Supply Chain
भारत ऑटो मेटल फार्मिंग इंडस्ट्री (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एक्स
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विस्तार

भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर अब सिर्फ अपनी जरूरतें ही पूरी नहीं कर रहा है, बल्कि दुनिया भर में अपना डंका बजा रहा है। हाल ही में इनवेस्टमेंट बैंक एवेन्डस कैपिटल की एक रिपोर्ट आई है। इसके मुताबिक भारत का 'ऑटोमोटिव मेटल फॉर्मिंग' बाजार तेजी से आगे बढ़ रहा है। आइए इस रिपोर्ट की मुख्य बातों को समझते हैं:

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क्या है रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े?

इनवेस्टमेंट बैंक एवेन्डस कैपिटल की रिपोर्ट भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर की एक शानदार तस्वीर पेश करती है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारत की ऑटोमोटिव मेटल फॉर्मिंग इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2025 में 80 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर एक एतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। सबसे बड़ा बदलाव यह आया है कि भारत अब पुर्जे मंगाने वाला देश नहीं, बल्कि एक प्रमुख निर्यातक बन चुका है। इसका प्रमाण मार्च 2025 में खत्म हुए वित्त वर्ष में किया गया करीब 23 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट है। विकास की यह रफ्तार यहीं थमने वाली नहीं है। उम्मीद है कि यह बाजार 12% की सालाना चक्रवर्ति दर (CAGR) से बढ़ते हुए वित्त वर्ष 2030 तक 90 से 95 अरब डॉलर के विशाल स्तर पर पहुंच जाएगा।

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मेटल फॉर्मिंग क्या होता है?

आसान शब्दों में कहें तो यह गाड़ियों के पुर्जे (पार्ट्स) बनाने की एक बुनियादी प्रक्रिया है। इसमें धातुओं को पिघलाकर सांचे में ढालना, उन्हें आकार देना और मशीन के जरिए फिनिशिंग करना शामिल है। सबसे खास बात यह है कि चाहे आपकी गाड़ी पुरानी तकनीक यानी पेट्रोल-डीजल (ICE) वाली हो या फिर लेटेस्ट इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी), दोनों ही गाड़ियों को मजबूत और हल्के पुर्जों की जरूरत होती है। इसलिए, मेटल फॉर्मिंग का बाजार हमेशा डिमांड में रहता है।

भारत के तेजी से आगे बढ़ने के 3 बड़े कारण

भारत की इस तेज रफ्तार ग्रोथ के पीछे कई ठोस कारण हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण यहां की लागत और गुणवत्ता का तालमेल है। आज भारत दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले काफी कम कीमत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर के बेहतरीन पार्ट्स तैयार कर रहा है। इसे मुमकिन बनाने में हमारे पास मौजूद कुशल इंजीनियरिंग टैलेंट और अनुभवी कारीगरों की बड़ी भूमिका है, जो तकनीकी बारीकियों को बखूबी समझते हैं। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने भी भारत के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। अब दुनिया की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां जोखिम कम करने के लिए किसी एक देश (जैसे चीन) पर निर्भर रहने के बजाय भारत को एक भरोसेमंद और मजबूत विकल्प के रूप में देख रही हैं। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की पकड़ और मजबूत हुई है।

पेट्रोल-डीजल (ICE) गाड़ियों के पार्ट्स में भारत का 'आखिरी दबदबा'

रिपोर्ट में भारत की भूमिका को लेकर एक बहुत ही दिलचस्प शब्द इस्तेमाल किया गया है- "Last Man Standing" यानी मैदान में डटा आखिरी खिलाड़ी। दरअसल, दुनिया भर की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां अब अपना सारा निवेश और ध्यान इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ईवी) पर लगा रही हैं। इसकी वजह से पारंपरिक पेट्रोल-डीजल (ICE) इंजनों के पार्ट्स बनाने वाली ग्लोबल सप्लाई चेन सिकुड़ रही है। लेकिन हकीकत यह है कि पेट्रोल-डीजल वाहन रातों-रात सड़कों से गायब नहीं होंगे और उन्हें चलाने के लिए क्रैंकशाफ्ट, गियर और एक्सल जैसे जटिल पुर्जों की जरूरत बनी रहेगी। ऐसे में, जब दुनिया इन पार्ट्स के उत्पादन से पीछे हट रही है, तब भारत इस कमी को बहुत ही कुशलता से पूरा कर रहा है। इस सप्लाई गैप को भरकर भारत पारंपरिक इंजन पार्ट्स के वैश्विक बाजार में एक अपरिहार्य लीडर के रूप में उभर रहा है।

विदेशी निवेशकों की नजरें भारत पर

एवेन्डस कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर, कौशिक भट्टाचार्य का कहना है कि अब भारतीय ऑटो कंपोनेंट सेक्टर सिर्फ मात्रा पर नहीं, बल्कि काबिलियत पर फोकस कर रहा है। अब निवेशकों और विदेशी कंपनियों का ध्यान उन भारतीय कंपनियों पर है, जिनके पास पुर्जे बनाने की गहरी तकनीकी समझ और शानदार मशीनरी है। यही वजह है कि आने वाले समय में ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्में भारत के ऑटो सेक्टर में जमकर पैसा लगाने वाली हैं।

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