Nitin Gadkari: इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी पर गडकरी सख्त, कहा- ठेकेदारों पर होगी सख्त कार्रवाई
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लागत में बढ़ोतरी और अटकी हुई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के मुख्य कारणों के रूप में निर्णय लेने में देरी, अपर्याप्त योजना और जवाबदेही की कमी जैसी व्यवस्थागत समस्याओं को उजागर किया।
विस्तार
नितिन गडकरी ने इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में देरी के पीछे कई सिस्टम से जुड़ी समस्याओं को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि फैसले लेने में देरी, कमजोर योजना और जवाबदेही की कमी के कारण लागत बढ़ती है और प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं हो पाते।
क्या छोटी रुकावटें भी बड़ी समस्या बन रही हैं?
मंत्री के अनुसार, जमीन अधिग्रहण में देरी और मंजूरी मिलने में समय लगना जैसी सामान्य बाधाएं भी प्रोजेक्ट्स की समयसीमा पर बड़ा असर डालती हैं।
इन कारणों से लागत बढ़ जाती है और काम लंबित हो जाता है।
निर्माण गुणवत्ता पर क्या चिंता जताई गई?
गडकरी ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि कई बार ठेकेदारों द्वारा घटिया काम किया जाता है, लेकिन उस पर सख्त कार्रवाई नहीं होती।
उन्होंने दोषी ठेकेदारों पर कड़ी सजा और ब्लैकलिस्टिंग जैसे कदम उठाने की बात कही।
क्या पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत है?
सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब प्रोजेक्ट्स पर नजर रखना आसान हो गया है।
इसलिए पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
क्या नई तकनीक से लागत कम हो सकती है?
गडकरी ने कहा कि नई तकनीक और इनोवेटिव मैटेरियल्स के इस्तेमाल से निर्माण लागत कम की जा सकती है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि लागत घटाने के चक्कर में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए।
DPR के बिना टेंडर जारी करना कितना खतरनाक है?
उन्होंने चेतावनी दी कि बिना विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और पर्याप्त परीक्षण के टेंडर जारी करना जोखिम भरा हो सकता है।
इससे सड़कों और पुलों में संरचनात्मक खामियां आ सकती हैं।
इंडस्ट्री के अन्य नेताओं ने क्या कहा?
ASSOCHAM (एसोचैम) के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने हाईवे नेटवर्क के विस्तार और मल्टीमोडल कनेक्टिविटी पर जोर दिया।
आगे के लिए क्या सुझाव दिए गए?
एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने सरकार और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि तेज क्रियान्वयन, तकनीक का उपयोग और टिकाऊ विकास के लिए साझेदारी जरूरी है।
