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Bike Taxi: कर्नाटक में रोजाना सफर करने वालों के लिए अच्छी खबर, हाईकोर्ट ने बाइक टैक्सी पर लगा प्रतिबंध हटाया

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 23 Jan 2026 03:13 PM IST
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सार

कर्नाटक हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पूरे राज्य में बाइक टैक्सी सर्विस चलाने की इजाजत दे दी। और उस पिछले आदेश को रद्द कर दिया जिसने असल में इन सर्विस को रोक दिया था।

Karnataka High Court Clears Bike Taxi Operations Big Relief for Riders
रैपिडो - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने बंगलूरू समेत पूरे राज्य में बाइक टैक्सी सेवाओं को फिर से संचालित करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने उस पहले के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके चलते Rapido (रैपिडो), Ola (ओला) और Uber (ऊबर) जैसे प्लेटफॉर्म्स की बाइक टैक्सी सेवाएं बंद हो गई थीं। अदालत के ताजा फैसले से हजारों राइडर्स और एग्रीगेटर कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।
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किन याचिकाओं पर आया फैसला?
मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू और न्यायमूर्ति सीएम जोशी की डिवीजन बेंच ने ऊबर इंडिया, रैपिड, ओला बाइक टैक्सी ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन और व्यक्तिगत बाइक टैक्सी चालकों की ओर से दायर अपीलों को स्वीकार किया।

अदालत ने परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मोटरसाइकिलों को परिवहन वाहन के रूप में रजिस्टर करें और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट जारी करें।

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Karnataka High Court Clears Bike Taxi Operations Big Relief for Riders
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने साफ कहा कि बाइक टैक्सी मालिक अपने वाहनों को परिवहन श्रेणी में रजिस्टर कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। राज्य सरकार को ऐसे आवेदनों पर विचार करना होगा। और सिर्फ इस आधार पर इनकार नहीं किया जा सकता कि मोटरसाइकिलें परिवहन वाहन या कॉन्ट्रैक्ट कैरिज नहीं हो सकतीं।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण आवश्यक शर्तें लागू कर सकता है।

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पहले क्यों लगा था प्रतिबंध?
2 अप्रैल 2025 को सिंगल जज बेंच ने आदेश दिया था कि जब तक मोटर वाहन अधिनियम की धारा 93 के तहत स्पष्ट दिशा-निर्देश और राज्य नियम नहीं बनते, तब तक बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स सेवाएं नहीं चला सकते।

इसी आदेश के तहत रैपिडो, ओला और ऊबर को बाइक टैक्सी सेवाएं बंद करने को कहा गया था और बाद में इसकी समयसीमा 15 जून 2025 तक बढ़ा दी गई थी।

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कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : karnataka high court
डिवीजन बेंच ने क्यों पलटा फैसला?
डिवीजन बेंच ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम दोपहिया वाहनों को कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के रूप में संचालन की अनुमति देता है। इसलिए अधिकारी रजिस्ट्रेशन या परमिट देने से इनकार नहीं कर सकते।

साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता भी दी कि वह मौजूदा नियमों के तहत एग्रीगेटर्स के लिए अतिरिक्त शर्तें तय कर सकती है।

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राज्य सरकार का क्या था तर्क?
राज्य सरकार ने दलील दी थी कि बाइक टैक्सी की अनुमति न देना एक नीतिगत फैसला है। इसके पीछे ऑटो और टैक्सी यूनियनों का विरोध, कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं, व्हाइट बोर्ड वाहनों का दुरुपयोग और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे बताए गए थे।

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बाइक टैक्सी (फाइल) - फोटो : एएनआई
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जब केंद्रीय कानून मोटरसाइकिलों को कॉन्ट्रैक्ट कैरिज के रूप में अनुमति देता है, तो राज्य सरकार नीति के नाम पर रजिस्ट्रेशन और परमिट से इनकार नहीं कर सकती। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि 2024 में इलेक्ट्रिक बाइक टैक्सी स्कीम को वापस लेना किसी अध्ययन के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव और कानून-व्यवस्था के कारण किया गया।

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पहले ही मिल चुकी थी अंतरिम राहत
अगस्त 2025 में कोर्ट ने मौखिक रूप से निर्देश दिया था कि अपील लंबित रहने तक बाइक टैक्सी चालकों के खिलाफ कोई जबरदस्ती की कार्रवाई न की जाए और उन्हें परेशान न किया जाए।

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शहरी परिवहन और रोजगार को मिलेगा फायदा
इस फैसले से बंगलूरू में बाइक टैक्सी सेवाओं से जुड़े हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। एग्रीगेटर कंपनियों का कहना है कि बाइक टैक्सी न सिर्फ रोजगार का बड़ा जरिया हैं। बल्कि लास्ट-माइल कनेक्टिविटी में भी अहम भूमिका निभाती हैं।

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