द बोनस मार्केट अपडेट: हफ्ते के आखिरी दिन भी शेयर बाजार में बिकवाली हावी, जानें सेंसेक्स-निफ्टी कितना फिसले
भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट। सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूटा, निफ्टी 23,250 के स्तर पर। जानिए तकनीकी विश्लेषकों की राय और आगे के महत्वपूर्ण स्तर।
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शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से बाजार प्रभावित हुए। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुझान और विदेशी पूंजी की निकासी ने भी निवेशकों की धारणा को नुकसान पहुंचाया।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 628.24 अंक गिरकर 74,257.69 पर आ गया। 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 221.20 अंक गिरकर 23,255.10 पर बंद हुआ। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में बजाज फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और एक्सिस बैंक प्रमुख पिछड़ने वाले रहे।
वहीं, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इंफोसिस, भारती एयरटेल और आईटीसी बढ़ने वाले शेयरों में शामिल थे। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल 0.95 फीसदी ऊपर 108.7 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 438.24 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची। गुरुवार को सेंसेक्स 138.36 अंक या 0.19 फीसदी बढ़कर 74,902.59 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 46.30 अंक या 0.20 फीसदी बढ़कर 23,477.80 पर समाप्त हुआ था।
कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिसिल्वन राधाकृष्णन ने बताया कि ब्रेंट कच्चा तेल मई के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका-ईरान संघर्ष मध्य पूर्व से तेल प्रवाह को बाधित कर रहा है। डब्लूटीआई कच्चा तेल पिछले सत्र में करीब 7.5 फीसदी बढ़ने के बाद 103-104 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है। ब्रेंट कच्चा तेल 108 अमेरिकी डॉलर के निशान की ओर बढ़ा है। यह वृद्धि हूती बलों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के कारण हुई है।
भारत पर इसका क्या असर होगा?
राधाकृष्णन के अनुसार, भारत के लिए करीब 110 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल कच्चा तेल मुद्रास्फीति, रुपये, चालू खाता और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ाएगा। इससे मौद्रिक नीति में ढील की गुंजाइश भी कम हो जाएगी। एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पोनमुडी आर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि भारत के आयात बिल, मुद्रास्फीति और कंपनियों के मुनाफे को लेकर चिंताओं को बढ़ाएगी। यह जोखिम लेने की इच्छा को भी कम रखेगा। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए ऊंची कीमतें सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती हैं।
वैश्विक बाजारों का क्या हाल है?
राधाकृष्णन ने यह भी कहा कि ऊंची तेल कीमतें मुद्रास्फीति और ब्याज दर परिदृश्य को लेकर चिंताओं को बढ़ा रही हैं। इसी कारण वैश्विक बाजार नीचे कारोबार कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225 सूचकांक, शंघाई का एसएसई कंपोजिट सूचकांक और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक काफी नीचे कारोबार कर रहे थे। गुरुवार को अमेरिकी बाजार भी नकारात्मक दायरे में बंद हुए थे। इन कमजोर वैश्विक रुझानों ने भारतीय निवेशकों की धारणा को भी प्रभावित किया।