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मार्जिन ट्रेडिंग की राह में बड़े खतरे: बाजार की तेजी का फायदा उठाने की ताक में रिटेल निवेशक, उधार लेकर निवेश

Mon, 03 Aug 2026 09:04 AM IST
ज्योति भास्कर सौरभ मित्तल (चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, आर मनी)
सौरभ मित्तल (चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, आर मनी) Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 03 Aug 2026 09:04 AM IST
सार

  • मार्जिन ट्रेडिंग की राह में बड़े खतरे हैं: बाजार की तेजी का फायदा उठाने की ताक में हैं रिटेल निवेशक, उधार लेकर पैसा लगा रहे हैं इन्वेस्टर्स।
  • ब्रोकर आपको  रुपये मुफ्त में नहीं देता। इस रकम पर   आपसे 12 से 18% तक का वार्षिक ब्याज वसूलता है।

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Major risks in margin trading Retail investors looking to capitalize on market rallies by borrowing to invest
भारतीय शेयर बाजार (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारतीय रिटेल निवेशक बाजार में अपनी जेब से ज्यादा उधार के पैसे से दांव खेल रहे हैं। रेटिंग एजेंसी केयरएज के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जून महीने में मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (एमटीएफ) के तहत निवेशकों का बकाया बढ़कर रिकॉर्ड 1.36 लाख करोड़ रुपये के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया। पिछले साल की तुलना में इसमें 57.6% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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चिंता की बात यह है कि एक तरफ जहां उधार लेकर शेयर खरीदने की होड़ मची है, वहीं दूसरी तरफ कैश मार्केट की रफ्तार की औसत दैनिक ट्रेडिंग में जून में 6.7 फीसदी की गिरावट देखी गई है।
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ऐसे में सवाल उठता है, अगर वैश्विक तनाव या मुनाफावसूली के कारण बाजार में अचानक गिरावट आती है, तो इस 1.36 लाख करोड़ रुपये के उधारी वाले दांव का क्या होगा?
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क्या होती है मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी?
अगर आपके पास शेयर खरीदने के लिए पूरा पैसा नहीं है, और आपका ब्रोकर आपसे केवल 20 या 30 फीसदी पैसा लेकर बाकी रकम खुद लगाकर शेयर खरीदवा देता है, तो आप मार्जिन ट्रेडिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं।

शुरुआती दौर में यह सुविधा बहुत लुभावनी लगती है, क्योंकि कम पैसे में ज्यादा शेयर खरीदने का मौका मिलता है। लेकिन याद रखिए, तेजी के बाजार में जो मार्जिन ट्रेडिंग आपका मुनाफा कई गुना बढ़ा देती है, वही बाजार पलटते ही आपकी पूरी जमा पूंजी को चुटकियों में स्वाहा कर सकती है।  

कैसे काम करता है एमटीएफ?
मान लीजिए, आप किसी कंपनी के 1,00,000 रुपये के शेयर खरीदना चाहते हैं, लेकिन आपके ट्रेडिंग खाते में सिर्फ 25,000 रुपये हैं। एमटीएफ के तहत, आपका ब्रोकर आपसे 25,000 रुपये का मार्जिन लेकर बाकी के 75,000 रुपये खुद अपनी तरफ से जमा कर देता है और आपके लिए एक लाख रुपये के शेयर खरीद लेता है। ब्रोकर आपको यह 75,000 रुपये मुफ्त में नहीं देता।
इस उधार ली गई रकम पर ब्रोकर आपसे 12 से 18 फीसदी तक का वार्षिक ब्याज वसूलता है (जो दैनिक आधार पर जुड़ता है)। जब तक आप उन शेयरों को बेचकर ब्रोकर का बकाया लोन नहीं चुका देते, तब तक यह ब्याज का मीटर लगातार चलता रहता है।

इसमें क्या होता है जोखिम?

  • मार्जिन कॉल का खतरा

    • मान लीजिए आपने जो शेयर एक लाख रुपये में खरीदे थे, वह बाजार में गिरावट के कारण गिरकर 70,000 रुपये के रह गए। अब ब्रोकर का दिया हुआ 75,000 रुपये का लोन जोखिम में आ जाता है। ऐसे में ब्रोकर तुरंत आपको मैसेज या मेल भेजकर अतिरिक्त पैसे जमा करने को कहेगा। इसे ही मार्जिन कॉल कहते हैं।
  • जबरन शेयर बिकना

    • अगर आप निश्चित समय के भीतर अतिरिक्त मार्जिन या कैश जमा नहीं कर पाते, तो ब्रोकर को कानूनी अधिकार होता है कि वह आपके शेयर बिना आपकी अनुमति के घाटे में भी बेच दे, ताकि वह अपना 75,000 रुपये का लोन वसूल सके। इसमें आपका पूरा शुरुआती निवेश (25,000 रुपये) डूब सकता है।
  • ब्याज का दोहरा झटका

    • बाजार में शेयर का दाम चाहे 20 फीसदी गिर जाए, लेकिन ब्रोकर का ब्याज कभी कम नहीं होता। यानी एक तरफ आपको शेयर की कीमत घटने से पूंजी का नुकसान हो रहा होता है, और दूसरी तरफ ब्रोकर का ब्याज आपकी जेब खाली कर रहा होता है।

किसके लिए MTF सही?
  • अनुभवी और प्रो-ट्रेडर्स: जो तकनीकी विश्लेषण समझते हैं और स्टॉप-लॉस का सख्त पालन करते हैं।
  • शॉर्ट-टर्म स्विंग ट्रेडर्स: जो केवल 2 से 5 दिनों के लिए किसी खास इवेंट या तेजी का फायदा उठाते हैं और तुरंत लाभ कमाकर निकल जाते हैं।
  • पर्याप्त लिक्विडिटी वाले लोग: जिनके पास बैंक खाते में इतना सरप्लस फंड हो कि बाजार गिरने पर वे तुरंत मार्जिन कॉल को पूरा कर सकें।
  • लॉन्ग-टर्म निवेशक दूर रहें: यदि आप 6 महीने, 1 साल या 3 साल के लिए निवेश कर रहे हैं, तो गलती से भी MTF का चुनाव न करें। 12 से 18% का सालाना ब्याज आपके सारे संभावित मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर देगा।
MTF सुविधा लेते समय क्या रखें सावधानी?
  • सख्त स्टॉप-लॉस लगाएं: ट्रेड में एंट्री लेते ही अपना अधिकतम नुकसान तय कर लें। अगर शेयर आपके तय स्तर से नीचे जाता है, तो तुरंत घाटा स्वीकार करके बाहर निकलें।
  • पूरी क्षमता का इस्तेमाल न करें: ब्रोकर आपको 10 लाख तक मार्जिन लिमिट दे रहा है, तो केवल 2-3 लाख रुपये का ही इस्तेमाल करें।
  • क्वालिटी और लार्ज-कैप शेयर: केवल निफ्टी-50 या मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही मार्जिन लें। स्मॉल-कैप या पेनी स्टॉक्स में MTF लेना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इनमें जब लोअर सर्किट लगता है, तो निकलने का मौका भी नहीं मिलता।  
  • ब्याज दरों की तुलना करें: अलग-अलग ब्रोकर्स की MTF ब्याज दरों और शुल्कों में अंतर होता है।
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