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एमएससीआई सूचकांक में फेरबदल से शेयरों में हलचल: लॉरस लैब्स समेत चार नए शेयर; किसमें आएगी सबसे ज्यादा पूंजी?
Tue, 01 Sep 2026 06:32 AM IST
निर्मल कांत
बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 01 Sep 2026 06:32 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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वैश्विक इंडेक्स प्रदाता मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल (एमएससीआई) के ताजा सूचकांक फेरबदल के तहत चार भारतीय शेयर पहली बार मुख्य सूचकांक में शामिल होंगे और तीन बाहर होंगे। कई शेयरों के भार में बदलाव से वैश्विक पैसिव फंड्स द्वारा बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री की उम्मीद है। यह संशोधित बदलाव 1 सितंबर से प्रभावी होंगे।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि एमएससीआई सूचकांकों को ट्रैक करने वाले फंड्स को नई संरचना और शेयरों के भार के अनुरूप अपने पोर्टफोलियो को समायोजित करना पड़ता है। इसका मतलब है कि कुछ शेयरों में भारी खरीदारी देखी जा सकती है, जबकि अन्य शेयरों को बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
शामिल होने वाले चार प्रमुख शेयर लॉरस लैब्स, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस, अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स हैं। दूसरी ओर, बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, एसबीआई कार्ड्स और एस्ट्रल सूचकांक से बाहर हो जाएंगे।
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ये भी पढ़ें: 1 सितंबर 2026: रसोई, हवाई सफर और बैंकिंग से जुड़े 10 बड़े नियम बदल रहे, क्या जेब पर पड़ने वाला है चौतरफा भार?
रिलायंस समेत पांच शेयरों का घटेगा भार
एमएससीआई केवल नए शेयरों को ही नहीं जोड़ रहा है। इंडेक्स के कुछ मौजूदा घटकों को उच्च भार मिल रहा है। परिणामस्वरूप अतिरिक्त खरीदारी हो सकती है।
एमएससीआई क्या है
मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल (एमएससीआई) वैश्विक सूचकांक प्रदाता है, जो दुनिया भर के निवेशकों और फंड मैनेजरों को शेयर बाजार सूचकांक तैयार करता है।
यह क्यों मायने रखता है?
जो फंड एमएससीआई को ट्रैक करते हैं या खुद को उसके अनुरूप बेंचमार्क करते हैं, उन्हें पोर्टफोलियो एडजस्ट करने की जरूरत हो सकती है। यदि कई फंड्स ने एक ही समय के आसपास एक ही शेयर खरीदा, तो इन शेयरों की मांग में काफी तेज उछाल आ सकता है।
-लोकेश सेठिया, फाउंडर पार्टनर, एसआर वेल्थ रिसर्च
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यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि एमएससीआई सूचकांकों को ट्रैक करने वाले फंड्स को नई संरचना और शेयरों के भार के अनुरूप अपने पोर्टफोलियो को समायोजित करना पड़ता है। इसका मतलब है कि कुछ शेयरों में भारी खरीदारी देखी जा सकती है, जबकि अन्य शेयरों को बिकवाली के दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
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शामिल होने वाले चार प्रमुख शेयर लॉरस लैब्स, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस, अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स हैं। दूसरी ओर, बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, एसबीआई कार्ड्स और एस्ट्रल सूचकांक से बाहर हो जाएंगे।
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रिलायंस समेत पांच शेयरों का घटेगा भार
एमएससीआई केवल नए शेयरों को ही नहीं जोड़ रहा है। इंडेक्स के कुछ मौजूदा घटकों को उच्च भार मिल रहा है। परिणामस्वरूप अतिरिक्त खरीदारी हो सकती है।
- इनमें इटर्नल, अडाणी एंटरप्राइजेज, अडाणी पोर्ट्स, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, अडाणी पावर, जीएमआर एयरपोर्ट्स और स्विगी शामिल हैं।
- ये सात शेयर 1.05 अरब डॉलर का अतिरिक्त इनफ्लो आकर्षित कर सकते हैं।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज का भार घटाया जा रहा है। इसका मतलब है कि इंडेक्स को ट्रैक करने वाले फंड्स को रिलायंस में अपना एक्सपोजर कम करने की जरूरत पड़ सकती है।
- रिलायंस से अनुमानित आउटफ्लो लगभग 4,367 करोड़ रुपये है। कम वेटेज का सामना करने वाले अन्य शेयरों में शामिल हैं, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, इंडियन होटल्स, आदित्य बिड़ला कैपिटल और कोलगेट-पामोलिव।
एमएससीआई क्या है
मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल (एमएससीआई) वैश्विक सूचकांक प्रदाता है, जो दुनिया भर के निवेशकों और फंड मैनेजरों को शेयर बाजार सूचकांक तैयार करता है।
- इसके महत्वपूर्ण बेंचमार्कों में से एक एमएससीआई सूचकांक इंडिया इंडेक्स है, जिसे भारत के इक्विटी बाजार के लार्ज और मिड-कैप सेगमेंट का प्रतिनिधित्व करने के लिए बनाया गया है।
- सरल शब्दों में कहें तो, एमएससीआई भारतीय शेयरों की एक टोकरी है। जब एमएससीआई में बदलाव होता है, तो वैश्विक फंड्स को भी अपनी होल्डिंग्स में बदलाव करना पड़ता है।
यह क्यों मायने रखता है?
जो फंड एमएससीआई को ट्रैक करते हैं या खुद को उसके अनुरूप बेंचमार्क करते हैं, उन्हें पोर्टफोलियो एडजस्ट करने की जरूरत हो सकती है। यदि कई फंड्स ने एक ही समय के आसपास एक ही शेयर खरीदा, तो इन शेयरों की मांग में काफी तेज उछाल आ सकता है।
-लोकेश सेठिया, फाउंडर पार्टनर, एसआर वेल्थ रिसर्च