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Multi Factor Fund: बाजार की उठापटक में कैसे बचाएं अपनी पूंजी? जानिए मल्टी-फैक्टर फंड की रणनीति

प्रभात पाण्डेय, को-फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर, इंक वेल्थ Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 15 Jun 2026 05:02 AM IST
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सार

शेयर बाजार में बढ़ते उतार-चढ़ाव के बीच मल्टी-फैक्टर फंड निवेशकों के लिए नया विकल्प बनकर उभरे हैं। जानिए ये फंड कैसे काम करते हैं, किन निवेशकों के लिए उपयुक्त हैं और इनमें निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Multi-Factor Funds: A Smart Shield Against Market Volatility for Investors
Mutual Fund - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

प्रयागराज में रहने वाले अमित कुमार पिछले कुछ दिनों से सुबह की चाय चैन से नहीं पी पा रहे हैं। वजह है शेयर बाजार का मौजूदा मिजाज। कुछ दिन पहले तक जब छोटे और मझोले शेयर रॉकेट की तरह भाग रहे थे। पिछले हफ्ते जैसे ही बड़ी कंपनियों ने कमान संभाली और छोटे शेयरों में मुनाफावसूली हुई, अमित के पोर्टफोलियो का रंग हरे से लाल हो गया।


आज के बाजार में बार-बार बदलते चक्र को भांपना और सही समय पर सही दांव लगाना किसी आम निवेशक के बस की बात नहीं है। इसीलिए एक अचूक रणनीति तेजी से लोकप्रिय हो रही है, जिसे मल्टी-फैक्टर फंड कहा जाता है।
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क्या होते हैं ये मल्टी-फैक्टर फंड?
पारंपरिक म्यूचुअल फंड कंपनियों के आकार यानी उनके कुल बाजार मूल्य के हिसाब से शेयरों का चुनाव करते हैं। इस ढर्रे के विपरीत मल्टी-फैक्टर फंड इस बात पर ध्यान नहीं देते कि कोई कंपनी कितनी बड़ी है, बल्कि वे कंपनी के कामकाज के तरीके और उसके बर्ताव का आकलन करते हैं। इसके लिए वे कुछ ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित मजबूत कारकों को चुनते हैं।
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ये फैक्टर ऐसे मजबूत स्तंभ हैं, जो जोखिम को कम करते हुए बेहतर रिटर्न देने के लिए जाने जाते हैं। पारंपरिक सूचकांकों के पीछे भागने के बजाय, यह फंड कई मजबूत कारकों, जैसे कंपनी का वास्तविक मूल्य, गुणवत्ता, रफ्तार, या उतार-चढ़ाव की स्थिरता, को एक साथ मिलाकर एक बेहद मजबूत पोर्टफोलियो तैयार करता है।

यह रणनीति काम कैसे करती है?
पारंपरिक म्यूचुअल फंड काफी हद तक फंड मैनेजर के अनुभव, अनुमान और व्यक्तिगत नजरिये पर निर्भर करते हैं। वहीं, मल्टी-फैक्टर फंड मानवीय भावनाओं, डर और लालच को पूरी तरह से किनारे कर देते हैं। यह व्यवस्था पूरी तरह से कड़े नियमों और कंप्यूटर आधारित गणितीय प्रणाली पर काम करती है।

इसकी पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है

  1. यह फंड बाजार के दो या दो से अधिक प्रमाणित स्तंभों को एक साथ चुनता है। इसके मुख्य चार स्तंभ हैं- गुणवत्ता (कम कर्ज और अधिक मुनाफा), वास्तविक मूल्य (सस्ते दामों पर मिलने वाले अच्छे शेयर), रफ्तार (तेजी से ऊपर की ओर भागते शेयर) और कम उतार-चढ़ाव (स्थिर शेयर जो बाजार के झटकों में ज्यादा नहीं डगमगाते)।
  2. एक कंप्यूटर आधारित प्रणाली पूरे शेयर बाजार को खंगालती है। यह समाचारों की सुर्खियों को नजरअंदाज कर केवल उन्हीं शेयरों को चुनती है, जो एक साथ कई कसौटियों पर खरे उतरते हैं।
  3. पोर्टफोलियो को हमेशा धारदार बनाए रखने के लिए, यह फंड हर तीन या छह महीने में खुद-ब-खुद बदलाव करता है।

इस उतार-चढ़ाव में आपके लिए कौन-सा मिश्रण सही है?
आक्रामक निवेशक: रफ्तार+गुणवत्ता
यदि आप बाजार के मौजूदा हिचकोलों से नहीं डरते और लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, तो यह मिश्रण आपके लिए है। रफ्तार आपको तेजी का पूरा फायदा दिलाएगी, जबकि गुणवत्ता यह पक्का करेगी कि आपका पैसा केवल मजबूत बुनियादी ढांचे वाली कंपनियों में ही लगे।

संतुलित निवेशक: गुणवत्ता+वास्तविक मूल्य
यह उन आम निवेशकों के लिए है, जो आज की उथल-पुथल के बीच रात को चैन की नींद सोना चाहते हैं। इसमें आपको साफ-सुथरी कंपनियां भी मिलती हैं और वे सही तथा किफायती दामों पर भी हासिल होती हैं।  

रूढ़िवादी निवेशक: कम उतार-चढ़ाव+गुणवत्ता
अगर आपका मुख्य उद्देश्य अपनी पूंजी को बाजार के दौरों से बचाना है, तो यह मिश्रण आज के बाजार में एक शॉक-एब्जॉर्बर की तरह काम करता है। आपका पैसा लगातार लाभांश देने वाली बेहद स्थिर कंपनियों में सुरक्षित रहता है।

इन बातों का रखें ध्यान
कंपनियां अक्सर इन फंडों को पुराने आंकड़ों की शानदार रिपोर्ट दिखाकर बेचती हैं। बाजार के बड़े बदलावों के दौरान ऐसा भी हो सकता है कि दो अलग-अलग स्तंभ कुछ समय के लिए एक साथ सुस्त पड़ जाएं। हर 3-6 महीने में पोर्टफोलियो की कड़ाई से छंटनी होती है। इससे प्रबंधन का खर्च बढ़ सकता है। फैक्टर रणनीतियों में 30% तक का आवंटन करें।

अस्वीकरण: मल्टी-फैक्टर फंड्स, सेबी द्वारा परिभाषित म्यूचुअल फंड की एक स्वतंत्र श्रेणी नहीं हैं। यह मूल रूप से एक निवेश रणनीति है। निवेशकों को निवेश निर्णय से पहले संबंधित योजना दस्तावेजों और जोखिम कारकों को अच्छे से समझना चाहिए।

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