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बाजार गिरा तो याद आई एफडी, पोर्टफोलियो में 90% इक्विटी: एसआईपी रोकें या री-बैलेंसिंग है रास्ता?
Mon, 05 Oct 2026 05:49 AM IST
निर्मल कांत
बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 05 Oct 2026 05:49 AM IST
सार
अगर आप आंख मूंदकर पूरी तरह इक्विटी पर निर्भर हैं और आपके पोर्टफोलियो का लगभग 90% हिस्सा इक्विटी में निवेशित है, तो यह बाजार से भागने का नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो व्यवस्थित करने का समय है...
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बेचैन बाजार...ना डरें, ना भागें, एसआईपी बदलें
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
नोएडा में रहने वाले आलोक ने कुछ साल पहले म्यूचुअल फंड्स में एसआईपी शुरू की थी। शुरुआत में पोर्टफोलियो संतुलित था। लेकिन इक्विटी स्कीमों के शानदार रिटर्न की वजह से संतुलित पोर्टफोलियो देखते-देखते 90% इक्विटी-हेवी हो गया। अब जब बाजार बेचैन है, निफ्टी गोते खा रहा है। पोर्टफोलियो लाल देखकर आलोक की सांसें अटक गईं।
तुरंत दोस्त को फोन लगाया और पूछा
बाजार असहज है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि निवेशक घबरा जाएं
भारतीय इक्विटी बाजार वर्तमान में कई चुनौतियों से जूझ रहा है। सितंबर में निफ्टी-50 में भारी गिरावट देखी गई, जबकि विदेशी निवेशक लगातार बेच कर बाहर जा रहे हैं। ऊंचे क्रूड ऑयल के दाम, भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और रुपये पर दबाव ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है। यह सिक्के का सिर्फ एक पहलू है।
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इससे पता चलता है
निवेशक चिंतित जरूर हैं, लेकिन उन्होंने निवेश करना बंद नहीं किया है। और शायद ऐसा करना भी नहीं चाहिए- बशर्ते उनके निवेश उनके लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुकूल हों। असली बीमारी बाजार की गिरावट नहीं, पोर्टफोलियो ड्रिफ्ट है। आलोक की तरह ज्यादातर निवेशक तब तक जोखिम के बारे में नहीं सोचते, जब तक बाजार ऊपर चढ़ रहा होता है। जब अनजाने में आपका 90% पैसा सिर्फ इक्विटी में फंस जाए, इसे पोर्टफोलियो ड्रिफ्ट कहा जाता है। इसलिए, समस्या बाजार गिरना नहीं है। समस्या यह है कि पोर्टफोलियो को कभी ऐसे डिजाइन ही नहीं किया गया था कि वह ऐसी गिरावट को झेल सके।
पोर्टफोलियो कैसा दिखना चाहिए?
सबसे पहले सारी इक्विटी होल्डिंग्स को अचानक बेचने की जरूरत नहीं है। अब अपनी नई एसआईपी के योगदान को डेट या अन्य कम हिस्सेदारी वाली एसेट क्लास की तरफ मोड़ें।
किस कैटेगरी में कितना आवंटन जरूरी
मौजूदा अनिश्चित माहौल में अगर आप अपने इक्विटी पोर्टफोलियो को व्यवस्थित करना चाहते हैं, तो इस रणनीति को अपना सकते हैं:
बाजार से भागें नहीं, योजना सुधारें
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तुरंत दोस्त को फोन लगाया और पूछा
- क्या मुझे एसआईपी बंद कर देनी चाहिए?
- क्या म्यूचुअल फंड रिडीम कर लेने चाहिए?
- क्या मुझे सब कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट में ट्रांसफर कर देना चाहिए?
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बाजार असहज है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि निवेशक घबरा जाएं
भारतीय इक्विटी बाजार वर्तमान में कई चुनौतियों से जूझ रहा है। सितंबर में निफ्टी-50 में भारी गिरावट देखी गई, जबकि विदेशी निवेशक लगातार बेच कर बाहर जा रहे हैं। ऊंचे क्रूड ऑयल के दाम, भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और रुपये पर दबाव ने अनिश्चितता और बढ़ा दी है। यह सिक्के का सिर्फ एक पहलू है।
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- भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था लचीलापन दिखाना जारी रखे हुए है, अप्रैल-जून 2026 की विकास दर लगभग 8% दर्ज की गई।
- घरेलू निवेशक भी एसआईपी के जरिये म्यूचुअल फंड में लगातार पैसे लगा रहे हैं। एम्फी के अनुसार, अगस्त 2026 में एसआईपी का कुल योगदान 32,297 करोड़ रुपये रहा।
इससे पता चलता है
निवेशक चिंतित जरूर हैं, लेकिन उन्होंने निवेश करना बंद नहीं किया है। और शायद ऐसा करना भी नहीं चाहिए- बशर्ते उनके निवेश उनके लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुकूल हों। असली बीमारी बाजार की गिरावट नहीं, पोर्टफोलियो ड्रिफ्ट है। आलोक की तरह ज्यादातर निवेशक तब तक जोखिम के बारे में नहीं सोचते, जब तक बाजार ऊपर चढ़ रहा होता है। जब अनजाने में आपका 90% पैसा सिर्फ इक्विटी में फंस जाए, इसे पोर्टफोलियो ड्रिफ्ट कहा जाता है। इसलिए, समस्या बाजार गिरना नहीं है। समस्या यह है कि पोर्टफोलियो को कभी ऐसे डिजाइन ही नहीं किया गया था कि वह ऐसी गिरावट को झेल सके।
पोर्टफोलियो कैसा दिखना चाहिए?
- ऐसा कोई जादुई प्रतिशत नहीं है, जो हर किसी के लिए काम करे।
- अधिक जोखिम उठाने की क्षमता और लंबे समय का नजरिया रखने वाला व्यक्ति अधिक इक्विटी चुन सकता है।
- रिटायरमेंट के करीब पहुंच रहे या किसी अन्य बड़े वित्तीय लक्ष्य वाले निवेशक को काफी कम इक्विटी की आवश्यकता हो सकती है।
सबसे पहले सारी इक्विटी होल्डिंग्स को अचानक बेचने की जरूरत नहीं है। अब अपनी नई एसआईपी के योगदान को डेट या अन्य कम हिस्सेदारी वाली एसेट क्लास की तरफ मोड़ें।
किस कैटेगरी में कितना आवंटन जरूरी
मौजूदा अनिश्चित माहौल में अगर आप अपने इक्विटी पोर्टफोलियो को व्यवस्थित करना चाहते हैं, तो इस रणनीति को अपना सकते हैं:
| इक्विटी म्यूचुअल फंड कैटेगरी | आवंटन सीमा | निवेश का तरीका |
|---|---|---|
| मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड | 50% | चरणों में निवेश |
| हाइब्रिड और लार्ज-कैप फंड | 40% | एकमुश्त या संतुलित निवेश |
| ग्लोबल इक्विटी/इंटरनेशनल फंड | 10% | डाइवर्सिफिकेशन में उपयुक्त |
बाजार से भागें नहीं, योजना सुधारें
किस कैटेगरी से पैसा निकालकर कहां लगाएं?सिर्फ इसलिए एसआईपी या निवेश बंद न करें, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव है। अपने फंड्स की जांच करें कि वे एक ही तरह के शेयरों में तो पैसा नहीं लगा रहे हैं। अपने निवेश के फैसले बाजार के मूड के बजाय अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर लें। ...सिद्धार्थ शर्मा, को-फाउंडर, मनीट्री पार्टनर्स
- यदि छोटे शेयरों ने आपके पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा हथिया लिया है, तो मुनाफे का कुछ हिस्सा निकालकर बड़े-कैप या फ्लेक्सी-कैप फंड्स में शिफ्ट किया जा सकता है।
- यदि पोर्टफोलियो में इक्विटी के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है, तो संकट के समय स्थिरता के लिए डेट फंड या सोने को जगह दें।
- यदि कोई वित्तीय लक्ष्य पास आ रहा है, तो जोखिम भरे इक्विटी से पैसा निकालकर सुरक्षित और अधिक तरल विकल्पों में लगाना चाहिए।