वेतन आयोग: प्रश्नावली का जवाब देने की समयसीमा 31 मार्च, रेलवे यूनियन ने उठाई भत्तों-पेंशन में समीक्षा की मांग
आठवें वेतन आयोग ने 18-सूत्रीय प्रश्नावली जमा करने की समय सीमा 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी है। इस बीच, रेलवे कर्मचारी संगठन (आईआरटीएसए) ने भत्तों, पेंशन और कर्मचारियों के वर्गीकरण जैसे अहम मुद्दों को शामिल करने की मांग की है। 8वें वेतन आयोग से जुड़ी पूरी अपडेट के लिए पढ़ें।
विस्तार
केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन के लिए गठित आठवें वेतन आयोग ने अपनी 18-सूत्रीय प्रश्नावली पर सुझाव और प्रतिक्रियाएं जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। जहां एक ओर आयोग ने विभिन्न हितधारकों को अपनी राय रखने के लिए अतिरिक्त समय दिया है, वहीं दूसरी ओर भारतीय रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ (आईआरटीएसए) ने आयोग को पत्र लिखकर प्रश्नावली में कई महत्वपूर्ण बदलावों और भत्तों व पेंशन से जुड़े नए विषयों को शामिल करने की पुरजोर मांग की है।
आठवें वेतन आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी प्रश्नावली का उत्तर देने की समय सीमा 16 मार्च 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी है। आयोग की अध्यक्षता जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इस प्रश्नावली में वेतन, पेंशन, भत्तों में संशोधन और रोजगार की शर्तों से जुड़े 18 सवाल शामिल हैं, जिन पर मंत्रालयों, विभागों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से फीडबैक मांगा गया है। आयोग को अपनी सिफारिशों की अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है।
आईआरटीएसए की प्रमुख मांगें क्या हैं?
डेडलाइन बढ़ने के बीच, आईआरटीएसए के महासचिव केवी रमेश ने आठवें वेतन आयोग की अध्यक्ष रंजना देसाई को लिखे पत्र में प्रश्नावली के वर्तमान स्वरूप को अपर्याप्त बताया है। रेलवे यूनियन की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- भत्तों के दायरे का विस्तार: यूनियन का तर्क है कि सातवें वेतन आयोग ने 196 प्रकार के भत्तों पर विचार किया था, लेकिन आठवें आयोग की प्रश्नावली की थीम में केवल 12 समूहों का जिक्र है। इसे विस्तारित रूप दिए जाने की जरूरत है।
- पेंशन से जुड़े मुद्दे: यूनियन ने ध्यान दिलाया है कि वर्तमान प्रश्नावली में पेंशन और पारिवारिक पेंशन के बारे में कोई विशेष उल्लेख नहीं है, जिसे तुरंत शामिल किया जाना चाहिए।
- कर्मचारियों का नया वर्गीकरण: समय के साथ आई तकनीकी और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए ग्रुप ए, बी और सी कर्मचारियों की मौजूदा वर्गीकरण संरचना की व्यापक समीक्षा की मांग की गई है।
आईआरटीएसए ने 'कैरियर प्रोग्रेसन' के मुद्दे पर भी विशेष ध्यान आकर्षित किया है। यूनियन का कहना है कि प्रश्नावली में केवल 'मोडिफाइड एश्योर्ड कैरियर प्रोग्रेसन स्कीम' का जिक्र है, जबकि मुख्य फोकस कार्यात्मक पदोन्नति पर होना चाहिए।
संघ ने सुझाव देने के लिए तय की गई सीमाओं पर क्या कहा?
इसके अलावा, डिजिटल सुझाव प्रस्तुत करने के लिए तय की गई तकनीकी सीमाओं पर भी आपत्ति जताई गई है। यूनियन ने नौ विषयों के लिए निर्धारित 3500 शब्दों की सीमा को अपर्याप्त बताते हुए इसे बढ़ाने और अटैचमेंट के आकार पर लगी पाबंदी खत्म करने की मांग की है। साथ ही, ऑनलाइन सबमिशन के अलावा यूनियनों को भौतिक रूप से भी ज्ञापन सौंपने की अनुमति देने का आग्रह किया गया है।
आठवें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों और लाखों पेंशनभोगियों को वेतन वृद्धि और सुविधाओं से बड़ी उम्मीदें हैं। रेलवे यूनियन आईआरटीएसए) की ओर से उठाई गई मांगें इस बात का संकेत देते हैं कि कर्मचारी संगठन इस पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समावेशी और व्यावहारिक बनाना चाहते हैं। 31 मार्च तक सुझावों के संकलन के बाद, आयोग की ओर से इस दिशा में उठाए जाने वाले कदम देश के केंद्रीय कर्मचारियों के भविष्य का आर्थिक ढांचा तय करेंगे।