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आईएमएफ की रिपोर्ट: एआई में निवेश घटा तो दुनिया के बाजारों में मच सकती है उथल-पुथल, आम निवेशकों पर पड़ेगा असर?

Wed, 14 Oct 2026 05:20 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 14 Oct 2026 05:20 AM IST
सार

आईएमएफ ने चेताया है कि एआई में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ने से शेयर बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। बढ़ता सरकारी कर्ज, बॉन्ड बाजार के जोखिम और साइबर हमले भी चिंता बढ़ा रहे हैं। 

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AI Investment Slowdown Could Trigger Global Market Turmoil, IMF Warns
आईएमएफ की रिपोर्ट में क्या खास? - फोटो : amarujala.com

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने आगाह किया है कि एआई में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ने से पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच सकती है। वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में आईएमएफ ने कहा कि बढ़ते सरकारी कर्ज, महंगे बॉन्ड और बड़े साइबर हमलों से भी बाजारों को खतरा है। फिलहाल, निवेशकों का भरोसा मजबूत है, लेकिन इसे वित्तीय सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता।

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आईएमएफ के मुताबिक, एआई को लेकर बढ़ते उत्साह और कंपनियों की अच्छी कमाई ने पश्चिम एशिया में युद्ध और नीतिगत अनिश्चितताओं के आर्थिक असर को कुछ हद तक संभाला है। हालांकि, अब संकेत मिल रहे हैं कि एआई पर खर्च घटेगा या इससे होने वाला आर्थिक फायदा उम्मीद से कम रह सकता है। एेसे में टेक कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट आ सकती है। इसका असर केवल शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि निवेश, संपत्ति और पूरी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। आईएमएफ ने सरकारों से कहा है कि जरूरत से ज्यादा कर्ज पर अंकुश लगाया जाए। इसमें डेरिवेटिव और मार्जिन लोन जैसे साधनों के अत्यधिक इस्तेमाल घटाना भी शामिल है। बाजार में जोखिम लेने की इच्छा मजबूत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई उथल-पुथल नहीं है।
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सरकारी कर्ज और बॉन्ड बाजार पर भी दबाव
बॉन्ड बाजार से जुड़े जोखिम बढ़े हैं। ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल यानी यील्ड बढ़ा है। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी कर्ज का ऊंचा बोझ और बजट घाटा कम करने में नाकामी भी दबाव बढ़ा रही है। केंद्रीय बैंक बैलेंस शीट घटा रहे हैं। ऐसे में छोटे निवेशकों पर निर्भरता बढ़ेगी।
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आम निवेशक पर क्या होगा असर?

  • बाजार में उतार-चढ़ाव: एआई कंपनियों के शेयरों में गिरावट से तकनीकी कंपनियों और उनसे जुड़े अन्य शेयरों पर दबाव आ सकता है।
  • कर्ज महंगा होने का जोखिम: कंपनियों और सरकारों की उधारी लागत बढ़ सकती है और बैंक अपने लोन महंगे कर सकते हैं।
  • बैंकिंग शेयरों में दबाव: कमजोर पूंजी वाले बैंकों ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
  • डिजिटल सेवाओं पर खतरा: बड़े साइबर हमले बैंकिंग और भुगतान सेवाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

बढ़ता कर्ज विश्व के लिए बड़ा संकट
आईएमएफ ने चेताया कि एआई क्षेत्र में कर्ज के सहारे निवेश बढ़ने का असर गंभीर हो सकता है। अगर एआई में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो कर्ज चुकाने या जोखिम कम करने के दबाव में निवेशकों को अपनी संपत्तियां जल्द बेचनी पड़ सकती हैं। इससे शेयरों और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव आ सकता है।

एआई क्षेत्र की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां, जिन्हें हाइपरस्केलर कहा जाता है, अब वैश्विक निवेश श्रेणी के बॉन्ड जारी करने में करीब 10% हिस्सेदारी रखती हैं। वर्ष 2024 में यह हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम थी। यानी एआई से जुड़ा निवेश अब वैश्विक कर्ज बाजार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगा है।

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