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एअर इंडिया: घाटा बढ़कर ₹22,238 करोड़, लागत कटौती के लिए बनी स्पेशल टीम; खर्च की मंजूरी के लिए नए कदम

Thu, 15 Oct 2026 05:47 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 15 Oct 2026 05:47 PM IST
सार

हवाई क्षेत्र की पाबंदियों और ईंधन की ऊंची कीमतों के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया का समेकित घाटा बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया है। एयरलाइन ने लागत में कटौती के लिए स्पेशल टीम बनाई है और 'प्रभाव' अवॉर्ड योजना शुरू की है। पूरी विस्तृत रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें।

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Air India Sets Up Dedicated Cost-Cutting Team as Consolidated Loss Widens to Rs 22,238 Crore
एअर इंडिया। - फोटो : amarujala.com

विस्तार

विदेशी हवाई क्षेत्रों की पाबंदियों, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक संकट और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की लगातार ऊंची कीमतों से जूझ रही देश की प्रमुख एयरलाइन एयर इंडिया ने अपने खर्चों पर कड़ा नियंत्रण कसने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक टेवोल्डे गेब्रेमरियाम ने कर्मचारियों को जारी एक आंतरिक संदेश में पूर्णकालिक 'मल्टी-डिसिप्लिनरी कॉस्ट सेविंग्स टीम' के गठन और वित्तीय मंजूरियों के नियमों को बेहद कड़ा करने की घोषणा की है। एयरलाइन द्वारा यह कठोर कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब पिछले वित्त वर्ष के दौरान उसका एकीकृत घाटा बढ़कर लगभग दोगुना हो चुका है।

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एयर इंडिया पर वित्तीय दबाव कितना बढ़ा है और घाटे के आंकड़े क्या कहते हैं?

टाटा ग्रुप और सिंगापुर एयरलाइंस के संयुक्त स्वामित्व वाली एयर इंडिया के हालिया वित्तीय आंकड़े गंभीर परिचालन दबाव को दर्शाते हैं।

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  • घाटे में भारी उछाल: मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में एयर इंडिया का समेकित घाटा बढ़कर 22,238.23 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में कंपनी का घाटा 10,858.83 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।
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  • कुल आय में गिरावट: नियामक फाइलिंग के अनुसार, इस दौरान एयरलाइन की कुल आय पिछले वित्त वर्ष के 78,635.61 करोड़ रुपये से घटकर 71,869.94 करोड़ रुपये रह गई है।
  • समेकित आंकड़े: इन वित्तीय आंकड़ों में एयर इंडिया की बजट एयरलाइन शाखा एयर इंडिया एक्सप्रेस के वित्तीय परिणाम भी शामिल हैं।

एयरलाइन के सामने कौन सी प्रमुख चुनौतियां और बाहरी संकट मौजूद हैं?

एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेवोल्डे गेब्रेमरियाम के अनुसार, संपूर्ण विमानन उद्योग इस समय बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण परिचालन माहौल का सामना कर रहा है।

  • हवाई क्षेत्र की पाबंदियां: कई अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्रों के बंद होने से विमानों को लंबे मार्गों से उड़ान भरनी पड़ रही है, जिससे परिचालन लागत में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण एयरलाइन की वैश्विक उड़ानों के शेड्यूल और परिचालन में लगातार बाधाएं आ रही हैं।
  • विमानन ईंधन की कीमतें: एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) के दाम लगातार उच्च स्तर पर बने रहने से एयरलाइन के दैनिक परिचालन खर्च पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।

लागत घटाने और खर्चों की मंजूरी के लिए क्या कड़े कदम उठाए गए हैं?

इन वित्तीय और परिचालन झटकों से उबरने के लिए एयरलाइन प्रबंधन ने प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर ठोस निर्णय लिए हैं:

  • स्पेशल कॉस्ट सेविंग्स टीम: 12 अक्टूबर को कर्मचारियों को भेजे संदेश में सीईओ ने साफ किया कि कंपनी ने एक समर्पित, क्रॉस-फंक्शनल 'मल्टी-डिसिप्लिनरी कॉस्ट सेविंग्स टीम' बनाई है। यह टीम सभी विभागों में खर्चों का व्यवस्थित पुनरीक्षण करेगी और बचत के अवसर चिन्हित करेगी।
  • मंजूरी प्रक्रिया में कड़ाई: 1 अक्तूबर से 'स्टाफ ऑन ड्यूटी' (एसओडी) की वित्तीय मंजूरियों के ढांचे में संशोधन किया गया है। अब सभी स्वीकृतियों को विभागाध्यक्ष (एचओडी), मुख्य अधिकारी (सीएक्सओ) और सीईओ से होकर गुजरना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि संगठन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

कर्मचारियों की भागीदारी के लिए 'प्रभाव' योजना क्या है?

एयरलाइन ने कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी के लिए 'प्रभाव- द वैल्यू क्रिएटर अवॉर्ड' की शुरुआत की है।

  • इस पहल का उद्देश्य कर्मचारियों से स्मार्ट कार्यप्रणाली, बेहतर संसाधन उपयोग, अनुबंधों के पुनर्मूल्यांकन, आउटसोर्स गतिविधियों को इन-हाउस करने, बर्बादी रोकने और नए राजस्व स्रोत तलाशने जैसे व्यावहारिक सुझाव आमंत्रित करना है।
  • लागू करने योग्य और प्रभावी विचार देने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
  • 1 अक्तूबर 2026 को एयर इंडिया का पदभार संभालने वाले इथियोपियन एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख गेब्रेमरियाम ने कर्मचारियों से कहा कि "बचाया गया हर एक रुपया हमें परिचालन और ग्राहक अनुभव जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फिर से निवेश करने का अवसर देता है।" उन्होंने हर स्तर पर मितव्ययिता और जवाबदेही की संस्कृति अपनाने का आह्वान किया।

भारतीय उड्डयन क्षेत्र पर इसका क्या असर होगा और आगे का रास्ता क्या है?

जनवरी 2022 में टाटा समूह द्वारा सरकारी अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया की कमान संभालने वाले गेब्रेमरियाम दूसरे विदेशी सीईओ हैं। एयर इंडिया द्वारा वित्तीय अनुशासन और लागत कटौती की यह व्यापक कवायद यह संकेत देती है कि भारतीय विमानन क्षेत्र में ईंधन की ऊंची कीमतों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों का असर गहराता जा रहा है। सीईओ ने स्पष्ट किया है कि केवल एक समर्पित टीम लागत नहीं घटा सकती, बल्कि दीर्घकालिक सफलता हासिल करने के लिए प्रत्येक कर्मचारी का व्यक्तिगत योगदान और प्रतिबद्धता आवश्यक है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एयर इंडिया के ये सुधारात्मक उपाय घाटे को कम करने में कितने कारगर साबित होते हैं।

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