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जापान में 31 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं ब्याज दरें: बीओजे ने 0.25% बढ़ाया पॉलिसी रेट, जानें इसके क्या मायने

Fri, 18 Sep 2026 10:09 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 18 Sep 2026 10:09 AM IST
सार

बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों को 31 साल के उच्चतम स्तर 1.25% पर पहुंचाया। जानिए 0.25% दर वृद्धि का कारण, बोर्ड का 7-2 मतभेद, येन व बॉन्ड यील्ड पर असर और अमेरिकी दबाव का पूरा विश्लेषण। विस्तृत रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक करें!

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Bank of Japan Raises Interest Rates to 31-Year High of 1.25% Amid Inflation Risks and US Pressure
बैंक ऑफ जापान - फोटो : amarujala.com

विस्तार

एक बड़ा निर्णय लेते हुए जापान के केंद्रीय बैंक 'बैंक ऑफ जापान' (बीओजे) ने अपनी बेंचमार्क नीतिगत ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी कर इसे 1.25% कर दिया है। वर्ष 1995 के बाद से यह जापानी ब्याज दरों का 31 साल का उच्चतम स्तर है। मार्च 2024 में शुरू हुई मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की प्रक्रिया के बाद से केंद्रीय बैंक ने अपनी दरों में बढ़ोतरी की गति को तेज कर दिया है। पिछली दर वृद्धि के छह महीने बाद जहां अगला कदम उठाया गया था, वहीं इस बार महज तीन महीने के भीतर ही दरों में बढ़ोतरी कर दी गई है। वैश्विक बाजारों, विनिमय दर और मुद्रास्फीति के जोखिमों के बीच लिया गया यह निर्णय दुनिया भर के निवेशकों और केंद्रीय बैंकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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 बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का फैसला क्यों लिया?

बैंक ऑफ जापान द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दरों में वृद्धि का मुख्य कारण मुद्रास्फीति के 2% के लक्षित दायरे से ऊपर निकलने का बढ़ता जोखिम है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक उद्देश्य अंतर्निहित मुद्रास्फीति  को "लगभग 2%" के स्तर पर स्थिर रखना है, ताकि कीमतों में अत्यधिक उछाल न आए और जापानी अर्थव्यवस्था पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। 

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अगस्त महीने में जापान की हेडलाइन मुद्रास्फीति 1.9% दर्ज की गई थी। इसके साथ ही, येन की ऐतिहासिक कमजोरी को संभालने और मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने के लिए इस नीतिगत सख्ती को अनिवार्य माना गया। उल्लेखनीय है कि मीडिया सर्वेक्षण में शामिल लगभग 90% अर्थशास्त्रियों ने 25 बेसिस पॉइंट्स की इस बढ़ोतरी का सटीक पूर्वानुमान व्यक्त किया था।

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नीतिगत फैसले पर बैंक ऑफ जापान के बोर्ड में क्या मतभेद रहे?

दरों में बढ़ोतरी का यह फैसला सर्वसम्मति से नहीं, बल्कि 7-2 के बहुमत से लिया गया। बोर्ड के दो सदस्यों तोइचिरो असादा और अयानो सातो ने इस फैसले के खिलाफ अपना वोट दिया और दरों को यथावत रखने की वकालत की। प्रधानमंत्री साने ताकाइची द्वारा इस वर्ष नियुक्त किए गए ये दोनों सदस्य 'रिफ्लेशनिस्ट' विचारधारा के माने जाते हैं।

बोर्ड में हुए मतभेद के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • तोइचिरो असादा का पक्ष: असादा ने तर्क दिया कि अगस्त में कोर मुद्रास्फीति घटकर 1.7% रह गई (जो जुलाई में 1.8% थी)। कोर मुद्रास्फीति 2% के लक्ष्य से नीचे होने के कारण आर्थिक स्थिति अभी इतनी मजबूत नहीं है कि दरों में बढ़ोतरी की जाए।
  • अयानो सातो का पक्ष: सातो का कहना था कि वर्तमान आर्थिक और मूल्य रुझानों में पहले की तुलना में कोई तेज गति देखने को नहीं मिली है, इसलिए दरें बढ़ाना जल्दबाजी होगी।

बाजार, येन और बॉन्ड यील्ड पर इस फैसले का तुरंत क्या असर दिखा?

नीतिगत दरों में वृद्धि के निर्णय के तुरंत बाद वित्तीय बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला:

  • करंसी मार्केट (येन पर असर): अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में 0.45% की गिरावट दर्ज की गई और यह 156.64 के स्तर पर कारोबार करने लगा। यह स्थिति तब है जब येन को मजबूती देने के लिए टोक्यो और वाशिंगटन (अमेरिका) द्वारा संयुक्त और समन्वित हस्तक्षेप भी किया जा चुका है।
  • बॉन्ड मार्केट: दूसरी ओर, सरकारी प्रतिभूतियों के बाजार में बेंचमार्क 10-वर्षीय जापानी सरकारी बॉन्ड की यील्ड 4.9 बेसिस पॉइंट्स घटकर 2.947% पर आ गई।

बैंक ऑफ जापान के इस कदम के पीछे क्या अमेरिकी और वैश्विक दबाव था?

इस नीतिगत फैसले के पीछे भू-राजनीतिक और कूटनीतिक कारक भी अहम रहे हैं। अमेरिका लगातार जापान पर अपनी ब्याज दरें बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रखने के लिए दबाव बना रहा था। यह अमेरिकी रुख जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची की आसान मौद्रिक नीति और विस्तारवादी राजकोषीय नीति की प्राथमिकताओं के विपरीत था।



इस महीने की शुरुआत में आयोजित जी-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक के दौरान अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बीओजे गवर्नर काज़ुओ उएदा से मुलाकात कर बाजार और मौद्रिक मोर्चे पर निर्णायक कदम उठाने का सीधा सुझाव दिया था।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और निवेशकों के लिए इस फैसले के क्या मायने हैं?

बैंक ऑफ जापान द्वारा 31 साल के उच्चतम स्तर पर ब्याज दरों को पहुंचाना यह स्पष्ट संकेत देता है कि दशकों की अत्यधिक सुस्त मौद्रिक नीति का दौर अब समाप्त हो चुका है। यद्यपि बोर्ड के भीतर आंतरिक मतभेद और घरेलू स्तर पर कोर मुद्रास्फीति की धीमी गति चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव और मुद्रास्फीति के जोखिमों ने बैंक को कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर किया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बीओजे येन की स्थिरता और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन कैसे बनाए रखता है।

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