Agriculture: किसानों को सीधे रियायती उर्वरक, 20 राज्यों के 40 जिलों में पायलट परियोजना शुरू
केंद्र सरकार ने किसानों को सीधे रियायती उर्वरक वितरण के लिए 20 राज्यों के 40 जिलों में एक प्रायोगिक परियोजना शुरू की है। जानें कैसे किसान मोबाइल ऐप से उर्वरक पहले से बुक कर सकते हैं और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के तहत उन्हें क्या लाभ मिल रहे हैं।
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केंद्र सरकार ने किसानों को रियायती उर्वरक सीधे वितरित करने के लिए एक प्रायोगिक परियोजना शुरू की है। यह पहल 20 राज्यों के 40 जिलों में चरणबद्ध तरीके से चल रही है। शुक्रवार को संसद को इसकी जानकारी दी गई। रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लिखित उत्तर में यह बताया। उर्वरक विभाग और कृषि और किसान कल्याण विभाग इस प्रायोगिक परियोजना को चला रहे हैं। प्रस्तावित प्रणाली के तहत किसान या उनके अधिकृत प्रतिनिधि मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। वे अपनी भूमि और फसल का विवरण प्रदान कर सकते हैं। साथ ही अपनी उर्वरक आवश्यकताओं को पहले से बुक कर सकते हैं।
क्या है 'उर्वरक बिक्री के लिए ढांचा' पहल?
यह प्रायोगिक परियोजना 'उर्वरक बिक्री के लिए ढांचा' नाम से लागू की गई है। इसे अब तक 20 राज्यों के 40 जिलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। चिह्नित 40 जिलों में पात्र किसानों को उर्वरक बेचे जा रहे हैं। यह बिक्री उनकी भूमि जोत और बोई गई फसल के आधार पर की जा रही है। राज्य के अधिकारी एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (आईएफएमएस) डैशबोर्ड पर खरीद संबंधी रिपोर्ट देख सकते हैं। यह प्रणाली निगरानी के लिए उपलब्ध है।
डीबीटी प्रणाली से कैसे मिल रहा लाभ?
उर्वरक विभाग ने देश भर में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली लागू की है। इसमें तेलंगाना भी शामिल है। इस प्रणाली के तहत रियायती उर्वरक किसानों को सस्ती कीमतों पर बेचे जाते हैं। बिक्री आधार-आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से होती है। वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 746.57 लाख मीट्रिक टन रियायती उर्वरक बेचा गया। यह बिक्री करीब 2.87 लाख सक्रिय खुदरा विक्रेताओं के देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से हुई। इससे 8.4 करोड़ लाभार्थी किसानों को फायदा मिला। केंद्र सरकार ने इस अवधि में 2.17 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी प्रदान की। डीबीटी प्रणाली रियायती उर्वरकों की बिक्री के लिए 100 फीसदी आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य करती है।
उर्वरक वितरण में क्या हैं खरीद सीमाएं?
समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने मासिक खरीद सीमा तय की है। प्रति खरीदार 50 बोरी की मासिक खरीद सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि, तेलंगाना में प्रति एकड़ प्रति खरीदार यूरिया की दो बोरियों की अलग सीमा है। जम्मू और कश्मीर में प्रति खरीदार प्रति मौसम 60 बोरियों तक की अनुमति है। ये सीमाएं किसानों तक उर्वरक की पहुंच सुनिश्चित करती हैं।