डिजिटल सेवा बाजार में धाक: भारत का वैश्विक निर्यात 317 अरब डॉलर, 15 फीसदी का उछाल
भारत ने डिजिटल रूप से प्रदान की जाने वाली सेवाओं के निर्यात में चीन, अमेरिका के मुकाबले ज्यादा ग्रोथ दर्ज कराई है। जबकि पारंपरिक आईटी-सॉफ्टवेयर सेवाओं से आगे बढ़कर कंसल्टिंग, इंजीनियरिंग, वित्तीय, पेंशन, बीमा व मनोरंजन और तकनीकी व्यावसायिक सेवाओं के निर्यात में भी अपनी भूमिका बढ़ा रहा है।
सलाह...
नीति आयोग ने कहा है कि भारत को एआई आधारित सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, इंजीनियरिंग और अनुसंधान व विकास जैसे उच्च मूल्य वाले डिजिटल क्षेत्रों में बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वैश्विक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर की बढ़ती मौजूदगी व भारतीय कंपनियों की ओर से इंजीनियरिंग, एनालिटिक्स, कंसल्टिंग, क्लाउड और तकनीक-सक्षम पेशेवर सेवाओं का विस्तार डिजिटल निर्यात के लिए व्यापक आधार तैयार कर रहा है। साथ ही, छोटी कंपनियों और नए सेवा प्रदाताओं के लिए बाजार पहुंच बेहतर करने की आवश्यकता होगी।
- 2015 से 2025 के बीच भारत का निर्यात लगभग 92 अरब डॉलर से बढ़कर 317 अरब डॉलर हो गया।
- कंप्यूटर सेवा : भारत का निर्यात अब भी व्यावसायिक सेवाओं और कंप्यूटर सेवाओं में अत्यधिक केंद्रित है।
2025 में डिजिटल सेवा निर्यात की स्थिति
| सेवा | हिस्सेदारी |
|---|---|
| व्यावसायिक सेवाएं | 54.6% |
| कंप्यूटर सेवाएं | 39.2% |
| वित्तीय सेवाएं | 2.4% |
| व्यक्तिगत, सांस्कृतिक एवं मनोरंजन सेवाएं | 1.2% |
| बीमा एवं पेंशन | 1.1% |
| दूरसंचार सेवाएं | 0.8% |
| बौद्धिक संपदा के उपयोग के लिए शुल्क | 0.5% |
| सूचना सेवाएं | 0.1% |
निर्यात में 15 फीसदी वृद्धि
भारत का सेवा निर्यात 15 % वृद्धि के साथ 2024 के 277 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 317 अरब डॉलर हो गया। जबकि ब्रिटेन में 11 % चीन और अमेरिका में 10%-10% व जर्मनी में 9 % वृद्धि हुई। इस तरह भारत ने जर्मनी को पीछे छोड़ कर निर्यात में चौथे स्थान पर पहुंच गया। इन सेवाओं के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 5.8 %से बढ़कर 6 % हो गई।