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38 अरब डॉलर के जुर्माने का डर: भारत में जांच एजेंसी के साथ आंकड़े साझा करेगा एपल, गतिरोध खत्म करने को तैयार
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 03 Jun 2026 05:46 PM IST
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सार
Apple vs CCI Row: एप स्टोर विवाद में एंटीट्रस्ट जांच का सामना कर रही एपल ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के सामने घुटने टेक दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एप स्टोर की मनमानी के आरोपों से घिरी आईफोन निर्माता कंपनी ने गतिरोध खत्म करने का फैसला किया है। सीसीआई ने अमेरिकी कंपनी को वित्तीय आंकड़े सौंपने के लिए 25 जून तक का अंतिम समय दिया है। पूरे मामले को समझने के लिए पढ़ें खबर।
एपल बनाम सीसीआई
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
भारतीय बाजार में अपने विस्तार को तेज कर रही अमेरिकी टेक दिग्गज एपल को एक बड़ा नियामकीय झटका लगा है। लंबे समय से चली आ रही खींचतान के बाद, अंततः कंपनी ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के साथ अपने भारतीय कारोबार की वित्तीय जानकारी साझा करने पर सहमति जता दी है। यह एपल के लिए भारत में अब तक का सबसे बड़ा हाई-प्रोफाइल विवाद है और इस कदम से भारत में एपल पर भारी जुर्माना लगने का रास्ता साफ हो गया है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।
विवाद की जड़: स्टार्टअप्स बनाम एपल
यह पूरा मामला एपल द्वारा अपने ऐप स्टोर पर डेवलपर्स के साथ की जा रही कथित मनमानी से जुड़ा है। साल 2021 में भारतीय स्टार्टअप्स के एक समूह 'एलायंस ऑफ डिजिटल इंडिया फाउंडेशन' (एडीआईएफ), टिंडर की मूल कंपनी मैच और एक गैर-लाभकारी संस्था ने मिलकर एपल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इनका आरोप था कि एपल का एप स्टोर डेवलपर्स के लिए एक अनिवार्य प्लेटफॉर्म बन गया है और कंपनी ऐप निर्माताओं को इन-एप खरीदारी के लिए किसी भी अन्य (थर्ड-पार्टी) पेमेंट सर्विस के इस्तेमाल से रोकती है। इसके बाद, 2024 में सीसीआई की जांच में एपल को आईफोन एप बाजार में अपने दबदबे का गलत इस्तेमाल करने का दोषी पाया गया।
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जुर्माने का पेंच और 38 अरब डॉलर का डर
जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद एपल अब तक अपनी वित्तीय जानकारी आयोग को देने से इनकार कर रहा था और उसने इन निष्कर्षों को चुनौती देने की बात कही थी। कंपनी का मुख्य तर्क यह था कि भारत के नए प्रतिस्पर्धा कानून के तहत जुर्माना कंपनी के वैश्विक टर्नओवर पर आधारित हो सकता है। एपल के अनुसार, अगर उसे अपनी वैश्विक वित्तीय जानकारी देनी पड़ी, तो उस पर 38 अरब डॉलर तक का भारी-भरकम जुर्माना लग सकता है।
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हालांकि, सीसीआई ने इस तर्क को खारिज करते हुए साफ किया कि उसे जुर्माना तय करने के लिए शुरुआत में सिर्फ एपल के भारतीय कारोबार के आंकड़ों की जरूरत है। आयोग का मानना था कि यह अमेरिकी दिग्गज कंपनी समानांतर अदालती चुनौतियों के जरिए मामले में सिर्फ देरी करने की कोशिश कर रही है। आखिरकार, पिछले महीने एक जज द्वारा एपल को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिए जाने के बाद कंपनी को अपना रुख बदलना पड़ा।
बाजार में स्थिति और आगे की राह
21 मई को हुई सीसीआई की सुनवाई के दौरान एपल के वकीलों ने भारत से जुड़ी विशिष्ट वित्तीय जानकारी दाखिल करने के लिए 25 जून तक का अंतिम समय मांगा था, जिसे आयोग ने मंजूर कर लिया है। इसी सुनवाई में स्टार्टअप्स समूह (एडीआईएफ) ने भी आयोग से इस मामले में और देरी न करने की अपील की।
एपल के लिए भारत चीन के बाद एक बेहद अहम बाजार बनकर उभरा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत के स्मार्टफोन बाजार में आईफोन की हिस्सेदारी 2% से बढ़कर 9% हो गई है। हालांकि, अपने बचाव में एपल का कहना है कि भारतीय बाजार में गूगल के एंड्रॉइड सिस्टम का भारी दबदबा है और वह इस बाजार में एक छोटा खिलाड़ी है। गौरतलब है कि 2022 में सीसीआई ने गूगल पर भी उसके दबदबे के दुरुपयोग के आरोप में 113 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया था। अब 25 जून तक एपल की ओर से अपने वित्तीय आंकड़े सौंपे जाने के बाद, आयोग जुर्माने की राशि तय करने की दिशा में अपना अंतिम फैसला लेगा।