Energy Crisis: 'कोयला व पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार', जानिए सरकार ने एलपीजी के बारे में क्या बताया
Inter-Ministerial Briefing: कोयला, पेट्रोलियम और विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने संयुक्त रूप से देश की ऊर्जा सुरक्षा और विदेश में फंसे भारतीयों की सुरक्षित निकासी के संबंध में महत्वपूर्ण आंकड़े और नीतियां साझा की हैं।
विस्तार
वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशियामें चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति शृंखला में आ रही रुकावटों के बीच भारत सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। अंतर मंत्रालयी प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र ने साफ किया है कि भारत में ऊर्जा संसाधनों की कोई कमी नहीं है। एक ओर जहां कोयला और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुचारू रूप से चल रही है, वहीं दूसरी ओर, विदेश में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार का यह आधिकारिक बयान अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। आइए जानते हैं सरकार की ओर से क्या-क्या कहा गया।
कोयला उत्पादन और बिजली आपूर्ति
- कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजीव कुमार कस्सी ने देश में बिजली उत्पादन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने आश्वस्त किया कि देश की खदानों और बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे उपभोक्ताओं को बहुत ही कम समय के नोटिस पर कोयले की आपूर्ति की जा सकती है। देश की कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा आज भी कोयला आधारित बिजली से पूरा होता है।
- कस्सी ने बताया कि बिजली उत्पादन क्षमता में कोई कमी नहीं है क्योंकि कोयले का उत्पादन उसकी खपत के स्तर के साथ पूरी तरह से तालमेल बिठाकर चल रहा है।
- भारत ने ऊर्जा की एक किफायती और पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखी है तथा लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल किया है। कोयला मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने बताया कि भारत के पास बिजली उत्पादन की जरूरतों के लिए 24 दिनों का कोयले का भंडार मौजूद है।
पेट्रोलियम, डीजल और एलपीजी की मजबूत स्थिति
- पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) के भंडार और आपूर्ति की विस्तृत जानकारी दी। रिफाइनरियां अपनी पूर्ण क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है।
- घरेलू जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। इसी के तहत उर्वरक संयंत्रों को लगभग 95 प्रतिशत गैस की आपूर्ति की जा रही है।
- एलपीजी आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पेट्रोकेमिकल्स के सीमित उपयोग की अनुमति देते हुए C3 और C4 धाराओं को एलपीजी पूल में डायवर्ट करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
- जागरूकता बढ़ाने के लिए तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने करीब 1,600 कैंप लगाए हैं और लगभग 14,000 सिलेंडर वितरित किए हैं। 23 मार्च से अब तक कुल 8.9 लाख एलपीजी सिलेंडर बेचे जा चुके हैं।
- बाजार में कालाबाजारी और अन्य कदाचार रोकने के लिए सख्ती तेज कर दी गई है। हाल ही में लगभग 4,000 छापेमारी की गई, जिसमें 56,000 सिलेंडर जब्त हुए। कंपनियों ने 1,770 कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, 51 वितरकों को निलंबित किया है और 175 के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। सुजाता शर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराने से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
वैश्विक तनाव और नागरिकों की सुरक्षा
- विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पश्चिम एशिया के संकट पर भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। भारत ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार को बाधित करने वाले इस संघर्ष के बीच हालिया युद्धविराम का स्वागत करते हुए स्थायी शांति की उम्मीद जताई है।
- भारत लगातार कूटनीति और संवाद पर जोर दे रहा है और हर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्बाध नेविगेशन को आवश्यक मानता है।
- भारतीय समुदाय की सुरक्षा और कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए 24 घंटे का कंट्रोल रूम संचालित किया जा रहा है जो वीजा और रसद जैसी सहायता दे रहा है।
- 28 फरवरी से अब तक खुले हवाई क्षेत्र से उड़ानों के जरिए करीब 7.88 लाख यात्री सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान में मौजूद लगभग 7,500 भारतीयों के लिए जल्द निकास की एडवाइजरी जारी की गई है, जिनमें से 1,864 नागरिकों को पड़ोसी देशों आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित निकाला जा चुका है।
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की खबरों के बीच केंद्र सरकार के इन बयानों से साफ है कि भारत का बुनियादी आर्थिक ढांचा और ऊर्जा क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित है।