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West Asia Tension: खाड़ी संकट की आंच भारत तक, लंदन से मुंबई का किराया नौ लाख रुपये हुआ, जानिए सबकुछ

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Tue, 03 Mar 2026 03:52 PM IST
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सार

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बाद खाड़ी क्षेत्र के एयरस्पेस प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बड़ा असर पड़ा है। सैकड़ों फ्लाइट्स रद्द होने और रूट लंबा होने के कारण लंदन-मुंबई जैसे रूट पर किराया 9 लाख रुपये तक पहुंच गया। आइए विस्तार से जानते हैं।

Gulf crisis reaches India, fare from London to Mumbai rises to Rs 9 lakh, know everything
एयरलाइन - फोटो : istock
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विस्तार

इस्राइल- अमेरिका की सैन्य कार्रवाई भले ईरान में हो रही हो, लेकिन उसका असर भारत के आम यात्रियों की जेब पर साफ दिखाई दे रहा है। खाड़ी क्षेत्र के ऊपर से गुजरने वाले हवाई मार्गों में बाधा और अस्थायी एयरस्पेस बंद होने के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

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  • सोमवार को स्थिति इतनी भयंकर रही कि लंदन से मुंबई आने का किराया कुछ यूरोपीय एयरलाइंस में प्रति यात्री 9 लाख रुपये तक पहुंच गया।
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  • इकॉनमी क्लास का टिकट जहां सामान्यतः 20 से 50 हजार रुपये के बीच होता है।
  • वहीं वह 2.9 लाख रुपये तक बिकता दिखा। बिजनेस क्लास का किराया 1.2 से 2.5 लाख रुपये से बढ़कर 9 लाख रुपये तक पहुंच गया।

क्यों बढ़े किराये इतने ज्यादा?

एयरलाइन कंपनियों का कहना है कि मुख्य कारण रूट का लंबा हो जाना है। खाड़ी क्षेत्र से बचते हुए उड़ानों को वैकल्पिक मार्गों से गुजरना पड़ रहा है, जिससे:

  • उड़ान समय बढ़ रहा है।
  • ईंधन लागत में इजाफा हो रहा है।
  • क्रू ड्यूटी टाइम और ऑपरेशनल खर्च बढ़ रहे हैं।

बड़ी संख्या में उड़ाने हो रही रद्द

लेकिन यह पूरी कहानी नहीं है। सोमवार को करीब 700 उड़ानें रद्द हुईं। मंगलवार को भी बंगलूरू, मुंबई और दिल्ली एयरपोर्ट्स से लगभग 230 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं। कोलकाता से भी प्रतिदिन करीब 20 उड़ानें प्रभावित हो रही हैं।

जब बड़ी संख्या में फ्लाइट्स रद्द होती हैं, तो सीटों की उपलब्धता घट जाती है। ऐसे में डिमांड और सप्लाई के बीच भारी अंतर पैदा हो जाता है। सीमित सीटों पर ज्यादा यात्रियों की मांग किरायों को असामान्य स्तर तक धकेल देती है।

यात्रियों को बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त उड़ानें हो रही संचालित

भारतीय कंपनियां जैसे एअर इंडिया और इंडिगो भी बढ़े हुए किरायों पर सीमित संचालन कर रही हैं। वहीं खाड़ी क्षेत्र से यात्रियों को निकालने के लिए एतिहाद एयरवेज और एमिरेट्स ने अतिरिक्त उड़ानें संचालित करने की घोषणा की है, ताकि फंसे यात्रियों को राहत दी जा सके।

यात्रियों को किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है?

कई यात्रियों की पहले से बुक की गई टिकटें रद्द हो चुकी हैं। लेकिन बड़ी समस्या यह है कि:

  • कस्टमर केयर से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
  • रिफंड प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है।
  • नई टिकट बेहद महंगी पड़ रही है।
  • यात्रियों का कहना है कि वे न तो यात्रा कर पा रहे हैं और न ही अपनी रकम की वापसी को लेकर आश्वस्त हैं।

अब आगे क्या?

सबसे बड़ी अनिश्चितता यह है कि हालात कब सामान्य होंगे। ट्रैवल एजेंट्स की सलाह है कि यदि यूरोप या खाड़ी देशों की यात्रा जरूरी न हो, तो कम से कम एक महीने तक टालना बेहतर रहेगा। जब तक पश्चिम एशिया में स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक हवाई किरायों में अस्थिरता, उड़ानों की रद्दीकरण दर और परिचालन बाधाएं जारी रहने की आशंका बनी हुई है।

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