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थाली पर महंगाई का वार: जुलाई में 4.45% पर देश की खुदरा महंगाई, क्या और महंगे होंगे प्याज, अदरक और लहसुन?

Wed, 12 Aug 2026 04:33 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 12 Aug 2026 04:33 PM IST
सार

भारत में जुलाई महीने की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45% हो गई है। प्याज, लहसुन और अदरक की आसमान छूती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। जानिए आरबीआई का इस पर क्या अनुमान है।

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Rising Food Prices Push India's Retail Inflation to 4.45%, Staying Firmly Above RBI's 4% Comfort Target
खुदरा महंगाई दर - फोटो : amarujala.com

विस्तार

रसोई घर से लेकर आपकी जेब तक, महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। सरकार द्वारा बुधवार को जारी ताजा आर्थिक आंकड़ों ने आम लोगों की चिंता थोड़ी बढ़ा दी है। जुलाई के महीने में देश की खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) बढ़कर 4.45% पर पहुंच गई है, जो इससे पिछले महीने यानी जून में 4.38% थी। हालांकि यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों के 4.50% के अनुमान से थोड़ा कम जरूर है, लेकिन यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% के तय लक्ष्य से लगातार ऊपर बना हुआ है। यह इस साल नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई शृंखला और नए कंजम्पशन बास्केट को अपनाने के बाद से महंगाई का सबसे उच्चतम स्तर है।

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जुलाई में महंगाई अचानक क्यों बढ़ गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है?
इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण खाने-पीने की चीजों (खाद्य पदार्थों) के ऊंचे दाम हैं, जिन्होंने आम जनता के बजट को प्रभावित किया है। खाद्य महंगाई दर (कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स) जून के 5.32% से उछलकर जुलाई में 5.52% पर पहुंच गई है। चिंता की बात यह है कि गांवों में रहने वाले लोगों पर इसकी मार शहरों से ज्यादा पड़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.79% रही, जबकि शहरी इलाकों में यह थोड़ा कम यानी 5.05% दर्ज की गई।
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किन सब्जियों ने रसोई का बजट बिगाड़ा और कहां मिली थोड़ी राहत?
यदि आप सब्जी मंडी जा रहे हैं, तो कुछ खास मसालों और सब्जियों के दाम आपके होश उड़ा सकते हैं:

  • प्याज: प्याज की महंगाई दर जून के 4.73% से सीधे छलांग लगाकर जुलाई में 22.54% पर पहुंच गई है।
  • लहसुन: लहसुन की महंगाई दर भी 17.93% से बढ़कर 35.36% हो गई है।
  • अदरक: अदरक ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए; इसकी महंगाई दर 50.41% से बढ़कर सीधे 83.62% के बेहद खौफनाक स्तर पर पहुंच गई है।
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हालांकि, इस चौतरफा तेजी के बीच कुछ सब्जियों के दामों में गिरावट (डिफ्लेशन) भी दर्ज की गई जिससे थोड़ी राहत मिली। आलू के दाम पिछले साल की तुलना में 16.56% कम हुए। भिंडी में 5.52% की गिरावट आई, जबकि मटर (-5.27%) और टमाटर (-4.59%) भी सस्ते हुए हैं।


रोजमर्रा की दूसरी जरूरतें और सेवाएं कितनी महंगी हुई हैं?
महंगाई की यह आंच सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी कीमतें बढ़ी हैं:

  • यातायात:ट्रांसपोर्ट महंगाई जून के 4.31% से बढ़कर जुलाई में 4.43% हो गई, जबकि माल ढुलाई की दरें 7.77% पर आ गईं।
  • पर्सनल केयर: व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और विविध सेवाओं की महंगाई दर सबसे अधिक 14.77% पर बनी हुई है, जिसमें अन्य व्यक्तिगत सामानों के दाम 43.54% तक बढ़े हैं।
  • होटल और रेस्टोरेंट: रेस्टोरेंट और आवास सेवाओं की महंगाई दर 7.72% दर्ज की गई।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य: इस दौरान कपड़े और जूते-चप्पलों में 3.38%, शिक्षा में 3.64%, मकान किराए में 2.22% और स्वास्थ्य क्षेत्र में 1.34% की महंगाई दर्ज की गई।

आरबीआई का महंगाई पर क्या सोचना है और क्या आगे राहत मिलेगी?
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को खुदरा महंगाई दर को 4% पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है, जिसमें 2% से 6% का एक सहिष्णुता बैंड तय है। आरबीआई के अधिकारी मल्होत्रा ने साफ किया है कि कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और महंगाई पर काबू पाना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है।

एक राहत की बात यह है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और सप्लाई सुधरने की वजह से आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए अपने महंगाई के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है। इसके अलावा, मुख्य कीमती धातुओं को छोड़कर अन्य कोर महंगाई अभी भी नियंत्रण में बनी हुई है।

आने वाले महीनों में महंगाई की रफ्तार कैसी रहेगी?
आरबीआई और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले निकट भविष्य में मुख्य महंगाई दर में अभी थोड़ा और उछाल आ सकता है और इस साल की तीसरी तिमाही (Q3) में यह अपने चरम पर पहुंच सकती है।

आरबीआई के तिमाही अनुमानों के मुताबिक:

  • दूसरी तिमाही (Q2): महंगाई दर 4.7% रहने का अनुमान है (पहले के 5.1% के अनुमान से कम)।
  • तीसरी तिमाही (Q3): इसमें उछाल आ सकता है और यह 5.9% के स्तर को छू सकती है।
  • चौथी तिमाही (Q4): इसके बाद इसमें थोड़ी नरमी आएगी और यह घटकर 5.5% पर आ जाएगी।

इसके बाद वित्तीय वर्ष के अंत तक कोर महंगाई और सामान्य महंगाई में स्थिरता आने की उम्मीद की जा रही है।

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