म्यूचुअल फंड नियमों में संशोधन: सोने व चांदी में ज्यादा पैसे लगा सकेंगे निवेशक, सेबी ने लागू की नई व्यवस्था
सेबी ने म्यूचुअल फंड नियमों में बड़े पैमाने पर संशोधन किए हैं। नए नियमों के तहत अब निवेशक सोना और चांदी में अधिक निवेश कर सकेंगे, पोर्टफोलियो ओवरलैप पर नियंत्रण लागू किया गया है। जानें निवेशकों के लिए नए अवसर और नियम...
विस्तार
पूंजी बाजार नियामक सेबी ने बृहस्पतिवार को म्यूचुअल फंड नियमों में बड़ा बदलाव किया है। कुछ नई श्रेणियों की योजनाओं को शामिल किया गया है और पोर्टफोलियो ओवरलैप पर अंकुश लगाया गया है। सोने-चांदी में अधिक निवेश की मंजूरी दी गई है। यह कदम नियामक के म्यूचुअल फंड नियमों को और सख्त बनाने के प्रयासों का हिस्सा है। इसके तहत योजनाओं का स्पष्ट वर्गीकरण और मानकीकृत खुलासे किए जाएंगे। इससे भारत के तेजी से बढ़ते 900 अरब डॉलर के उद्योग में निवेशकों के हितों की सुरक्षा मजबूत होगी।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नए नियमों के तहत, म्यूचुअल फंड्स को इक्विटी स्कीमों में तय सीमा के निवेश के बाद बाकी बचे हिस्से को सोने और चांदी के साधनों में निवेश की अनुमति दी गई है। हाइब्रिड स्कीम सोने और चांदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में निवेश कर सकते हैं। नए नियमों ने इक्विटी और हाइब्रिड स्कीमों में विशेष रूप से बाकी बचे हिस्से के भीतर कीमती धातुओं में निवेश को मानकीकृत कर दिया है। नए लाइफ-साइकल फंडों के तहत स्कीम्स सोने-चांदी के ईटीएफ, एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ईटीसीडी) और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) में 10 फीसदी तक निवेश कर सकती हैं। नियमों में इन बदलावों से म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में सोने और चांदी को शामिल करने की प्रक्रिया अब औपचारिक हो गई है, जिससे निवेशकों को बहुमूल्य धातुओं का उपयोग मुख्य रूप से विविधीकरण के साधन के रूप में करने का एक विनियमित तरीका मिल गया है।
सोने-चांदी के लिए हाजिर मूल्यों का उपयोग
सेबी ने म्यूचुअल फंडों को निर्देश दिया कि वे एक अप्रैल, 2026 से अपने भौतिक सोने और चांदी के भंडार का मूल्यांकन करने के लिए घरेलू स्टॉक एक्सचेंज के हाजिर मूल्यों का उपयोग करें। म्यूचुअल फंड अब उन मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों के हाजिर मूल्यों का उपयोग कर सकते हैं, जो भौतिक रूप से वितरित सोने और चांदी के डेरिवेटिव अनुबंधों का निपटान करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मूल्यांकन घरेलू बाजार की स्थितियों को दर्शाता है। यह बदलाव सोने-चांदी के मूल्यांकन के लिए वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन के मूल्यों से हटकर नया तरीका है।
विनियमित इकाइयों व एजेंटों को सोशल मीडिया पर सामग्री के साथ बतानी होगी पंजीकरण संख्या
नियामक ने अपने नियमन दायरे में आने वाली सभी इकाइयों और उनके एजेंट को निर्देश दिया कि वे सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिभूति बाजार से संबंधित सामग्री डालते समय अपना पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्या का उल्लेख करें। यह निर्देश शेयर ब्रोकर, म्यूचुअल फंड कंपनियों, निवेश सलाहकार, शोध विश्लेषक, संपत्ति प्रबंधन कंपनियों, वैकल्पिक निवेश कोष, पोर्टफोलियो प्रबंधकों और अन्य पर लागू होगा। कई पंजीकरण वाली इकाइयों को अपने होमपेज पर सभी पंजीकरणों की सूची वाला वेब लिंक देना होगा और हर सामग्री में पंजीकरण ब्योरा देना होगा। एजेंट को अपने पंजीकरण के साथ प्रमुख इकाई के पंजीकरण का ब्योरा भी देना होगा। ये नियम एक मई, 2026 से प्रभावी होंगे।
म्यूचुअल फंड वर्गीकरण नियम में सुधार, लाइफ साइकल फंड पेश
- सेबी ने म्यूचुअल फंड योजनाओं के वर्गीकरण के लिए संशोधित रूपरेखा जारी की।
- इसके तहत लाइफ साइकल फंड को शामिल किया है, जबकि समाधान उन्मुख योजनाओं की श्रेणी को समाप्त किया है।
- एकरूपता और निवेशक संरक्षण के लिए खुलासा नियम भी सख्त किए गए हैं।
- यह कदम योजनाओं के नाम में बढ़ा-चढ़ाकर किए रिटर्न दावों पर अंकुश लगाने और नाम के अनुरूप स्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
श्रेणी का अनुरूप होगा योजना का नाम
सेबी ने कहा, योजना का नाम श्रेणी के अनुरूप होगा। इसका मकसद निवेशकों के लिए योजनाओं की पहचान को आसान बनाना है। नाम में ऐसे शब्दों/वाक्यांशों का प्रयोग नहीं होगा, जो सिर्फ योजना के रिटर्न पहलू को बताते हों। पेशकश दस्तावेजों और विज्ञापनों में योजना के प्रकार के विवरण में सेबी के निर्धारित प्रारूप का सख्ती से पालन करना होगा।
अब पांच श्रेणी
सेबी योजनाओं को पांच श्रेणियों में बांटा है। ये श्रेणी हैं...इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, लाइफ साइकल एवं अन्य योजनाएं-फंड ऑफ फंड्स योजनाएं और इंडेक्स फंड या ईटीएफ जैसी पैसिव योजनाएं।
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