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विदेशी संपत्ति पर लगेगा 30% कर: छोटे करदाताओं के लिए 31 दिसंबर तक बताने का मौका; क्या आप भी दायरे में हैं?

Sat, 15 Aug 2026 01:43 PM IST
निर्मल कांत एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 15 Aug 2026 01:43 PM IST
सार

छोटी विदेशी संपत्ति या विदेश से हुई अघोषित आय वाले करदाताओं के लिए सरकार ने नई योजना शुरू की है। इसमें 31 दिसंबर 2026 तक जानकारी देने का मौका है। लेकिन 30 फीसदी कर के साथ उतनी ही अतिरिक्त रकम भी देनी होगी, जानें किन लोगों को मिलेगा यह मौका।

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Small taxpayers with foreign assets to face 30 pc tax plus penalty; disclosure scheme opens till Dec 31
विदेश में संपत्ति पर लगेगा कर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई

विस्तार

आयकर विभाग ने शनिवार को कहा कि 'फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स-डिस्क्लोजर स्कीम' (फास्ट-डीएस) यानी छोटे करदाताओं की विदेशी संपत्तियों की जानकारी देने वाली योजना के तहत 31 दिसंबर 2026 तक घोषणा की जा सकती है। इस योजना के तहत करदाताओं को 30 फीसदी कर देना होगा। इसके साथ ही कर के बराबर यानी 30 फीसदी की अतिरिक्त रकम भी देनी होगी।
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किन लोगों को मिलेगा योजना का लाभ?
छोटे करदाताओं के लिए विदेशी संपत्ति की स्वेच्छा से जानकारी देने की यह योजना 2026-27 के बजट में घोषित की गई थी। इसमें छात्र, युवा पेशेवर, तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी और विदेश जाकर रहने वाले भारतीय यानी एनआरआई जैसे लोग शामिल हैं।
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शनिवार को इस योजना के नियम जारी किए गए। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा कि यह योजना पात्र करदाताओं को कुछ ऐसी विदेशी संपत्तियों की जानकारी देने का मौका देती है, जिनका पहले खुलासा नहीं किया गया था।
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क्या-क्या जानकारी दे सकेंगे?
इसमें ऐसी विदेशी आय की जानकारी भी दी जा सकती है, जिस पर पहले कर (टैक्स) नहीं दिया गया था। इसके अलावा, ऐसी विदेशी संपत्तियों की भी जानकारी दी जा सकती है, जिन्हें पहले घोषित नहीं किया गया था। इसके लिए तय कर या शुल्क देना होगा। यह योजना 16 अगस्त 2026 से लागू होगी। ऑनलाइन घोषणा 31 दिसंबर 2026 तक दाखिल की जा सकेगी। जिस संपत्ति की जानकारी इस योजना के तहत दी जाएगी, उसकी उचित बाजार कीमत 31 मार्च 2026 की स्थिति के आधार पर तय की जाएगी।
 

किन दो श्रेणियों में कर सकेंगे घोषणा?
इस योजना के तहत घोषणा करने के लिए दो बड़ी श्रेणियां बनाई गई हैं। पहली श्रेणी में भारत के बाहर मौजूद ऐसी संपत्ति शामिल है, जिसकी जानकारी पहले नहीं दी गई थी। इसमें ऐसी विदेशी आय भी शामिल है, जिस पर कर नहीं दिया गया था। इस मामले में अघोषित संपत्ति की कुल कीमत 1 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

दूसरी श्रेणी में भारत के बाहर मौजूद ऐसी संपत्ति शामिल है, जिस पर पहले ही कर दिया जा चुका है। इसमें वह संपत्ति भी शामिल है, जिसे करदाता ने उस समय खरीदा था, जब वह भारत का निवासी नहीं था। लेकिन ऐसी संपत्ति की जानकारी आयकर रिटर्न की संबंधित अनुसूची में नहीं दी गई थी। ऐसी घोषणाओं के लिए 5 करोड़ रुपये की सीमा तय की गई है। ऐसी घोषणा पर 1 लाख रुपये का शुल्क देना होगा।

कितना कर और अतिरिक्त रकम देनी होगी?
योजना के तहत कुल रकम दो हिस्सों में होगी। पहला हिस्सा घोषित अघोषित विदेशी संपत्ति या आय की कीमत का 30 फीसदी टैक्स होगा। दूसरा हिस्सा कर के बराबर ही होगा। यानी जितना टैक्स दिया जाएगा, उतनी ही अतिरिक्त रकम भी देनी होगी।


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60 लाख के खाते पर कितना कर लगेगा?
सीबीडीटी ने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब यानी एफएक्यू में इसका एक उदाहरण दिया है। इसके मुताबिक, अगर किसी अघोषित विदेशी बैंक खाते की कीमत 60 लाख रुपये है और अघोषित विदेशी आय 20 लाख रुपये है, तो कुल कर 48 लाख रुपये देना होगा। इस योजना के तहत घोषणा करने पर करदाता को घोषित आय या संपत्ति के संबंध में आगे कोई अतिरिक्त टैक्स या जुर्माना नहीं देना होगा।

क्या मुकदमे से भी मिलेगी छूट?
साथ ही काला धन अधिनियम, 2015 के तहत उसके खिलाफ मुकदमा चलाने से भी छूट मिलेगी। यह छूट उसी आय या संपत्ति के संबंध में होगी, जिसकी इस योजना के तहत जानकारी दी गई है।

इसके अलावा, इस योजना के तहत घोषित संपत्ति में लगाए गए निवेश की रकम या उससे हुई आय को करदाता की कुल आय में शामिल नहीं किया जाएगा। यह छूट आयकर अधिनियम, 1961 और काला धन अधिनियम, 2015 के तहत लागू होगी।
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