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Windfall Tax: सरकार ने डीजल और एटीएफ निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, हवाई किराये को लेकर सरकार सतर्क

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Sat, 11 Apr 2026 07:02 PM IST
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सार

भारत सरकार ने डीजल और एटीएफ निर्यात पर विंडफॉल टैक्स में भारी बढ़ोतरी की है। ईरान युद्ध के कारण बढ़ते वैश्विक कच्चे तेल के भाव और विमानन क्षेत्र पर इसके असर से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।

Windfall Tax Hikes India ATF Prices Diesel Export Tax US Iran War Aviation Sector Crude Oil Prices
सरकार ने डीजल-पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाया। - फोटो : AI Generated Image/amarujala.com
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विस्तार

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल के बीच भारत सरकार ने ईंधन के निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) में भारी वृद्धि की है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास आपूर्ति शृंखला में पैदा हुई बाधाओं के कारण वैश्विक तेल बाजार भारी दबाव का सामना कर रहा है।

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कर की नई दरें: डीजल और एटीएफ पर भारी शुल्क

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर शुल्कों में भारी इजाफा किया गया है। 

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  • डीजल: सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है।
  • एटीएफ: विमानन ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर टैक्स को 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। 
  • पेट्रोल: हालांकि, पेट्रोल के निर्यात पर अभी भी पूरी तरह से छूट बरकरार रखी गई है।

भारत अपनी बेहतरीन रिफाइनिंग क्षमता के कारण एटीएफ का एक शुद्ध निर्यातक देश है। इसलिए, निर्यात शुल्क और घरेलू मूल्य निर्धारण में होने वाला कोई भी बदलाव देश के रिफाइनरों और एयरलाइंस, दोनों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

विमानन क्षेत्र पर दबाव और संभावित असर

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण ईंधन की उच्च लागत का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में सबसे बड़ा जोखिम यह है कि बढ़ती कीमतों का बोझ हवाई किराये के रूप में आम यात्रियों पर पड़ सकता है।

यात्रियों को महंगाई से बचाने के लिए सरकार के कदम

अधिकारियों के अनुसार, सरकार एयरलाइंस, यात्रियों और हवाई अड्डा संचालकों के हितों को संतुलित करने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है। इस दिशा में नागरिक उड्डयन मंत्रालय विभिन्न विभागों के संपर्क में है और राज्य सरकारों से मदद मांग सकता है। एयरलाइंस और यात्रियों को बचाने के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित विकल्पों पर विचार किया जा रहा है:

  • वैट में कटौती: राज्यों द्वारा एटीएफ पर लगाए जाने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट) में कटौती करने के विकल्प की समीक्षा की जा रही है। महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की पहचान ऐसे बाजारों के रूप में की गई है जहां उच्च करों के कारण, विशेषकर मेट्रो हवाई अड्डों पर, एटीएफ की कीमतें बहुत अधिक रहती हैं।
  • हवाई अड्डा शुल्क की समीक्षा: उच्च ईंधन लागत की भरपाई के लिए सरकार इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या हवाई अड्डे से जुड़े कुछ शुल्कों को कम किया जा सकता है। इन मौजूदा लेवी की समीक्षा के लिए अधिकारियों की हवाई अड्डा संचालकों के साथ बातचीत करने की योजना है।

जब तक वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, तब तक विमानन क्षेत्र पर मार्जिन का दबाव जारी रह सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा कर और शुल्क से जुड़े शमन उपायों से आने वाले समय में एयरलाइंस और आम यात्रियों दोनों को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

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