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Raipur News: तीन साल बाद EOW के सामने पेश हुए कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल, कई चर्चित घोटालों में जांच तेज
Wed, 08 Jul 2026 05:48 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 08 Jul 2026 05:48 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच का सामना कर रहे कांग्रेस नेता एवं पूर्व नान अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल बुधवार को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा कार्यालय पहुंचे।
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कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच का सामना कर रहे कांग्रेस नेता एवं पूर्व नान अध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल बुधवार को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा कार्यालय पहुंचे। लंबे समय से जांच एजेंसियों की रडार पर रहे रामगोपाल करीब तीन साल बाद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं।
सूत्रों के अनुसार, कस्टम मिलिंग मामले में पूछताछ के लिए नोटिस मिलने के बाद उन्होंने EOW कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इससे एक दिन पहले जांच एजेंसी ने उनके बेटे वैभव अग्रवाल से भी कई घंटों तक पूछताछ की थी। इसके बाद रामगोपाल अग्रवाल का EOW पहुंचना जांच में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
रामगोपाल अग्रवाल का नाम राज्य के तीन बड़े आर्थिक मामलों—कस्टम मिलिंग, कोल लेवी और शराब घोटाले—की जांच के दौरान सामने आया है। इन मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) कर रही हैं।
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कस्टम मिलिंग मामला
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच धान मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के वितरण में कथित अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि नियमों में बदलाव कर कुछ चुनिंदा मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे करीब 127 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मामले की जांच जारी है।
कोल लेवी मामला
ईडी और EOW का आरोप है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस नेटवर्क के जरिए करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। इस प्रकरण में कई अधिकारी, कारोबारी और अन्य लोगों की भूमिका की जांच चल रही है।
शराब घोटाला
राज्य के चर्चित शराब घोटाले में जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब वितरण व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब बिक्री और कमीशनखोरी के जरिए करीब 3,200 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है।
हालांकि, इन सभी मामलों में लगाए गए आरोपों की अभी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां साक्ष्य जुटाने और पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं।
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सूत्रों के अनुसार, कस्टम मिलिंग मामले में पूछताछ के लिए नोटिस मिलने के बाद उन्होंने EOW कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इससे एक दिन पहले जांच एजेंसी ने उनके बेटे वैभव अग्रवाल से भी कई घंटों तक पूछताछ की थी। इसके बाद रामगोपाल अग्रवाल का EOW पहुंचना जांच में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
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रामगोपाल अग्रवाल का नाम राज्य के तीन बड़े आर्थिक मामलों—कस्टम मिलिंग, कोल लेवी और शराब घोटाले—की जांच के दौरान सामने आया है। इन मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) कर रही हैं।
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कस्टम मिलिंग मामला
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2015 से 2023 के बीच धान मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के वितरण में कथित अनियमितताएं हुईं। आरोप है कि नियमों में बदलाव कर कुछ चुनिंदा मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जिससे करीब 127 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मामले की जांच जारी है।
कोल लेवी मामला
ईडी और EOW का आरोप है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस नेटवर्क के जरिए करीब 540 करोड़ रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। इस प्रकरण में कई अधिकारी, कारोबारी और अन्य लोगों की भूमिका की जांच चल रही है।
शराब घोटाला
राज्य के चर्चित शराब घोटाले में जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब वितरण व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब बिक्री और कमीशनखोरी के जरिए करीब 3,200 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच जारी है।
हालांकि, इन सभी मामलों में लगाए गए आरोपों की अभी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां साक्ष्य जुटाने और पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही हैं।