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जगदलपुर: बस्तर गोंचा महापर्व 2026 का शुभारंभ, श्रीजगन्नाथ मंदिर में देवस्नान पूजा विधान संपन्न

Mon, 29 Jun 2026 05:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 29 Jun 2026 05:03 PM IST
सार

भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा एवं बलभद्र का पंचामृत व इंद्रावती जल से महाभिषेक किया गया। अब 15 जुलाई तक अनसर काल चलेगा। जिसमें दर्शन वर्जित रहेंगे। 16 जुलाई को श्री गोंचा रथ यात्रा निकाली जाएगी। 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज द्वारा परंपरानुसार पूजा-अर्चना की जा रही है।

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Bastar Goncha Grand Festival commenced with rituals of Devasnan and Chandan Yatra Puja
भगवान का जलाभिषेक करते - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रियासत कालीन बस्तर गोंचा महापर्व 2026 का शुभारंभ सोमवार, 29 जून को हुआ। श्रीजगन्नाथ मंदिर में देवस्नान (चंदन जात्रा) पूजा विधान श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान श्रीजगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र स्वामी का महाभिषेक किया गया।

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पंचामृत, चंदन तथा इंद्रावती नदी के पवित्र जल से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवस्नान किया गया। परंपरानुसार ग्राम आसना से भगवान शालीग्राम को लाकर मंदिर में स्थापित किया गया था। 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के ब्राह्मणों ने इंद्रावती नदी से पवित्र जल एकत्र किया। इस बार देवस्नान की प्रक्रिया का विस्तार किया गया। विग्रहों का मंदिर के गर्भगृह के बाहर मंच स्थापित कर अभिषेक संपन्न कराया गया। यह विस्तार पहली बार किया गया है। पूजा के बाद भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलभद्र के 22 विग्रहों को मुक्ति मंडप में स्थापित किया गया।
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अनसर काल और दर्शन निषेध
इसके साथ ही भगवान का अनसर काल प्रारंभ हो गया है, जो 14 जुलाई तक चलेगा। इस अवधि में श्रद्धालुओं के लिए भगवान के दर्शन वर्जित रहेंगे। अनसर काल में भगवान को विशेष औषधियुक्त भोग अर्पित किया जाएगा। यह प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा। बस्तर गोंचा महापर्व समिति के अध्यक्ष मुक्तेश्वर पांडे ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस 15 दिवसीय अवधि में भगवान अस्वस्थ होते हैं। 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के सेवादार और पंडित भगवान की सेवा करते हैं।
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आगामी कार्यक्रम और परंपरा
360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष वेद प्रकाश पांडे ने बताया कि 619 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार सभी पूजा विधान होंगे। आगामी 15 जुलाई को नेत्रोत्सव पूजा विधान के साथ प्रभु जगन्नाथ के दर्शन होंगे। 16 जुलाई को श्रीगोंचा रथ यात्रा होगी, जिसके बाद भगवान नौ दिनों तक जनकपुरी सिरहासार भवन में स्थापित होंगे। अन्य प्रमुख आयोजनों में 19 जुलाई को अखंड रामायण पाठ, 20 जुलाई को हेरा पंचमी और 24 जुलाई को बाहुड़ा गोन्या रथ यात्रा शामिल है। 25 जुलाई को एकादशी के साथ बस्तर गोंचा पर्व का समापन होगा।

 

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