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ICC: पोस्ट-प्रेग्नेंसी गाइडलाइंस क्या हैं? मां बनने के बाद भी खेल सकेंगी महिला खिलाड़ी; खास फ्रेमवर्क तैयार

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Tue, 23 Jun 2026 06:08 PM IST
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सार

आईसीसी ने महिला क्रिकेटरों के लिए पहली बार 'पोस्ट-प्रेग्नेंसी रिटर्न टू प्ले' गाइडलाइंस जारी की हैं। इसे तैयार करने वाली ऑस्ट्रेलियाई डॉक्टर फिलिपा इंगे ने इसके पीछे की बारीकियों और चुनौतियों को साझा किया है।
 

Drawn from IOC, FIFA but still uniquely cricket-specific: Aussie doctor behind ICC post-pregnancy guidelines
आईसीसी का नया प्लान - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने महिला क्रिकेटरों के हक में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पहली बार 'पोस्ट-प्रेग्नेंसी रिटर्न टू प्ले' (गर्भावस्था के बाद खेल में वापसी) गाइडलाइंस जारी की हैं। हालांकि यह दिशानिर्देश आईओसी और फीफा के मौजूदा परामर्शों से प्रेरित हैं, लेकिन मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक (लॉजिस्टिक) चुनौतियों से निपटने के मामले में यह पूरी तरह से क्रिकेट की जरूरतों के अनुकूल हैं। यह बात इस महत्वपूर्ण दस्तावेज को तैयार करने वाली आईसीसी की चिकित्सा सलाहकार समिति की सदस्य डॉ. फिलिपा इंगे ने कही है।



डॉ. इंगे मेलबर्न की एक जानी-मानी स्पोर्ट्स एंड एक्सरसाइज मेडिसिन फिजिशियन हैं और वर्तमान में ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम की डॉक्टर के रूप में इंग्लैंड में टी20 विश्व कप के दौरान टीम के साथ मौजूद हैं।

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छह 'R' का अनूठा फ्रेमवर्क
इस नई पॉलिसी के तहत छह 'R' के एक विशेष फ्रेमवर्क की रूपरेखा तैयार की गई है: रेडी, रिव्यू, रिस्टोर, रीकंडीशन, रिटर्न और रिफाइन। यह ढांचा फीफा के चरणबद्ध कार्यक्रम जैसा ही है, जो खिलाड़ियों के साथ-साथ उनके प्रबंधकों को भी शामिल करता है। डॉ. इंगे ने बताया कि कई सदस्य देशों के आग्रह पर बीते एक साल से इस नीति पर गहन विचार-विमर्श चल रहा था। इसके बाद सभी देशों की मेडिकल टीमों से फीडबैक लेकर इसे अंतिम रूप दिया गया।

डॉ. फिलिपा इंगे ने कहा "यह गाइडलाइंस इतनी लचीली हैं कि सदस्य देश इसे अपने माहौल के अनुसार ढाल सकते हैं। इससे एथलीटों को एक ऐसा भरोसा मिलेगा कि वे बच्चा पैदा करने के साथ-साथ क्रिकेट करियर को भी जारी रख सकती हैं।"

व्यावहारिक और मानसिक चुनौतियां सबसे बड़ी रुकावट
डॉ. इंगे के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में शारीरिक सीमाओं से कहीं ज्यादा लॉजिस्टिक्स (तैयारियों) और मानसिक स्थिति को संभालना सबसे बड़ी चुनौती थी। जब उन्होंने महिला क्रिकेटरों से बात की, तो उनके सामने कई तरह के सवाल आए। जैसे- मैदान पर स्तनपान कैसे कराया जाएगा? मां बनने के बाद शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखने के लिए कैसा आहार होना चाहिए? यात्रा (ट्रेवल) के दौरान क्या व्यवस्थाएं होंगी? और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इस विषय पर अपने संबंधित क्रिकेट बोर्ड से बातचीत की शुरुआत कैसे की जाए।

इसके अलावा, प्रेग्नेंसी के लंबे ब्रेक के बाद खिलाड़ियों के भीतर प्रदर्शन को लेकर भी एक मनोवैज्ञानिक लड़ाई चलती है। डॉ. इंगे ने उम्मीद जताई कि यदि सदस्य देशों के कोचिंग स्टाफ में खेल मनोवैज्ञानिक उपलब्ध होंगे, तो वे खिलाड़ियों को इस मानसिक तनाव से उबारने और उनके प्रदर्शन को फिर से शीर्ष पर ले जाने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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भविष्य में दिखेगा इसका बड़ा असर
दुनिया भर में बिस्माह मारूफ जैसी खिलाड़ियों ने मां बनने के बाद वापसी की कोशिश की, लेकिन आखिरकार उन्हें क्रिकेट छोड़ना पड़ा। वहीं वेस्टइंडीज की एफी फ्लेचर मां बनने के बाद भी शानदार ढंग से खेल रही हैं। डॉ. इंगे को उम्मीद है कि अगले 8 से 10 वर्षों में इस गाइडलाइंस का सकारात्मक असर दिखेगा और शादी या बच्चों के कारण महिला खिलाड़ियों का क्रिकेट छोड़ने का ग्राफ (ड्रॉपआउट रेट) काफी कम हो जाएगा। इससे हर उम्र की महिला खिलाड़ी यह देख पाएंगी कि क्रिकेट करियर और एक खुशहाल परिवार दोनों एक साथ संभव हैं।
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