चिंताजनक: मदद नहीं मिली तो नशे का सहारा, रैगिंग भी झेलते हैं छात्र; दो तिहाई संस्थानों की स्थिति दयनीय
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विस्तार
प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी जब भेदभाव और आर्थिक तंगी झेलते हैं, तो गहरे तनाव में चले जाते हैं। मदद नहीं मिलने पर धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं। इन संस्थानों में रैगिंग भी तनाव की एक वजह है। इन हालात से कुछ विद्यार्थी नहीं उबर पाते, तो खुदकुशी का गलत रास्ता चुन लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव के संकेत समय पर पहचाने जाएं और बिना झिझक मदद ली जाए तो ज्यादातर जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट की गठित नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट 2023 के एक अध्ययन के हवाले से कहती है कि जिन आईआईटी में आत्महत्याएं की घटनाएं हुईं, वहां के विद्यार्थियों ने बताया कि परिसर में मानसिक स्वास्थ्य सहायता नहीं मिलने पर कई साथी तनाव से निपटने के लिए नशीले पदार्थों का सहारा लेने लगते हैं। इसके बावजूद 65% संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य से निपटने की कोई व्यवस्था नहीं है। 73% के पास पूर्णकालिक परामर्शदाता नहीं है। 20% संस्थानों ने बाहरी एजेंसियों से परामर्शदाता लेने का करार किया है।
8 देशों के 19 विश्वविद्यालयों में पहले साल एक तिहाई विद्यार्थियों में बेचैनी, मनोदशा या नशे से जुड़े विकार के लक्षण मिले।
- 12 देशों के स्नातक विद्यार्थियों पर हुए अध्ययन में 48 फीसदी में अवसाद के लक्षण पाए गए। भारत में यह मनोवैज्ञानिक परेशानी 25 से 50 फीसदी के बीच आंकी गई है। इसी वजह से अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और चीन जैसे देश युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को नीति के केंद्र में रख रहे हैं।
24 की उम्र से पहले शुरू हो जाती हैं मानसिक स्वास्थ्य की 75% समस्याएं
टास्क फोर्स की रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ से जुड़े शोध का हवाला दिया गया है, जिसके मुताबिक, मानसिक स्वास्थ्य की 75 फीसदी समस्याएं 24 साल की उम्र से पहले शुरू हो जाती हैं।
21 देशों में हुए विश्व मानसिक स्वास्थ्य सर्वे में कॉलेज जाने वाले 20.3% विद्यार्थियों में 12 महीनों के दौरान पहचाने जा सकने वाले मानसिक विकार मिले।
यूपी में रैगिंग की सबसे ज्यादा 135 शिकायतें
- सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, रैगिंग की ज्यादातर शिकायतें मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों से हैं। 2025 में यूजीसी ने रैगिंग रोकने के उपाय न करने पर 107 संस्थानों को कारण बताओ नोटिस भेजा था, जिनमें 18 मेडिकल कॉलेज थे।
- रैगिंग की सर्वाधिक 135 शिकायतें उत्तर प्रदेश से आईं। प. बंगाल में 75, मध्य प्रदेश में 63, महाराष्ट्र में 53 और बिहार में 50 शिकायतें मिलीं।
- सबसे ज्यादा मेडिकल, इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेज वाले तमिलनाडु में 26 व कर्नाटक में 41 शिकायतें आईं।
आठ महीनों में 210 विद्यार्थी
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2025 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों के 210 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की। इनमें 117 छात्र और 93 छात्राएं थीं।
- सबसे ज्यादा 33 मामले यूपी में दर्ज हुए। हरियाणा में नौ, उत्तराखंड में सात, दिल्ली और पंजाब में पांच-पांच, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश में दो-दो और जम्मू-कश्मीर में एक मामला दर्ज हुआ। संस्थानों के हिसाब से इंजीनियरिंग में 63, चिकित्सा में 47, विज्ञान में 19, कला में 18 और नर्सिंग में 16 मामले रहे।
एक पहलू यह भी
गांव की छात्राओं के कॉलेज पहुंचने की संभावना 25% कम : कई राज्यों में शहरी युवतियां युवकों के बराबर आगे बढ़ रही हैं, जबकि 2022 के अध्ययन के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में युवकों की तुलना में युवतियों के कॉलेज पहुंचने की संभावना 25% कम है। पैसे की तंगी हो, तो परिवार बेटे की पढ़ाई को तरजीह देते हैं। कला, चिकित्सा में तो करीब 51% हिस्सेदारी बेटियों की है, जबकि इंजीनियरिंग में हिस्सेदारी महज 29% है।
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