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मेडिकल कॉलेजों पर सख्ती: चार माह में भरने होंगे पद और देना होगा छात्रवृत्ति का पैसा, NMC ने दिए निर्देश

Mon, 24 Aug 2026 10:41 AM IST
Akash Kumar अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: Akash Kumar Updated Mon, 24 Aug 2026 10:41 AM IST
सार

Medical College: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर NMC ने मेडिकल कॉलेजों को सख्त निर्देश दिए हैं। अब 4 महीने में खाली फैकल्टी पद भरने होंगे, 24 घंटे मेडिकल सहायता देनी होगी और छात्र आत्महत्या व असामान्य मौत के मामलों में हर महीने एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) भेजनी होगी।
 

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NMC Directs Medical Colleges: Fill Faculty Vacancies in 4 Months, Submit Monthly Student Safety ATR
National Medical Commission (NMC) - फोटो : nmc.org.in

विस्तार

छात्र आत्महत्या पर उठाने होंगे ये कदम

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एनएमसी के नए रिपोर्टिंग फॉर्मेट में मेडिकल कॉलेजों को छात्र की आत्महत्या या असामान्य मौत होने पर कई जानकारियां दर्ज करनी होंगी। इनमें मामले की संख्या, छात्र के नाम के शुरुआती अक्षर, कोर्स और वर्ष, घटना की तारीख और जगह, पुलिस को सूचना दी गई या नहीं, एफआईआर दर्ज हुई या नहीं, संस्थान ने जांच समिति बनाई या नहीं, जांच की वर्तमान स्थिति और घटना के बाद उठाए गए सुधारात्मक कदम शामिल हैं।

सिर्फ एनएमसी को जानकारी देना ही नहीं, बल्कि ऐसे मामलों की पुलिस को रिपोर्टिंग और यूजीसी व अन्य संबंधित नियामक संस्थाओं को सालाना रिपोर्टिंग का भी प्रावधान है।

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हर छात्र को 24 घंटे मेडिकल मदद

एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों से यह भी पूछा है कि छात्रों के लिए 24 घंटे योग्य चिकित्सा सहायता उपलब्ध है या नहीं। यह सुविधा कैंपस में या कैंपस से एक किलोमीटर के अंदर उपलब्ध कराने की व्यवस्था का जिक्र किया गया है। किसी छात्र को स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति होने पर उसे तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके, इस व्यवस्था की भी निगरानी की जाएगी।

4 महीने में भरने होंगे खाली शिक्षक पद

मेडिकल कॉलेजों में सभी खाली फैकल्टी पदों को चार महीने के अंदर भरने का लक्ष्य तय किया गया है। खास बात यह है कि आरक्षित श्रेणी के खाली पदों के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने की बात कही गई है। 

कॉलेजों को यह भी रिकॉर्ड रखना होगा कि कितने पद स्वीकृत हैं, कितने भरे हुए हैं, कितने खाली हैं, भर्ती की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और पद खाली रहने की वजह क्या है। इसके अलावा डीन/डायरेक्टर/प्रिंसिपल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, वाइस-प्रिंसिपल, वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, हॉस्टल वार्डन और काउंसलर जैसे पदों को भी तुरंत भरने को कहा है।

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एनएमसी ने हर महीने एटीआर भेजने को कहा

छात्रों की लंबित छात्रवृत्ति को लेकर भी समयसीमा तय की गई है। रिपोर्टिंग फॉर्मेट के मुताबिक छात्रवृत्ति के लंबित मामलों को चार महीने के भीतर निपटाने का लक्ष्य है। अगर चार महीने में भुगतान नहीं होता है तो संस्थान को दो महीने के अंदर देरी की वजह बताते हुए नोटिस देना होगा।

मेडिकल कॉलेजों को सिर्फ एक बार रिपोर्ट देकर जिम्मेदारी खत्म नहीं होगी। एनएमसी ने संस्थानों को हर महीने अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) भेजने को कहा है। इस रिपोर्ट को संस्थान के प्रमुख से प्रमाणित कराना होगा।

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