एनसीईआरटी: सुप्रीम कोर्ट के मोटो का संबंध उपनिषदों-महाभारत से, 9वीं की पाठ्यपुस्तक में क्या बताया गया?
एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान की किताब में ‘सत्यमेव जयते’ को मुंडक उपनिषद और सुप्रीम कोर्ट के आदर्श वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ को महाभारत से जोड़ा गया है। जानिए नई किताब में भारतीय संस्थाओं और परंपरागत मूल्यों से जुड़े संदर्भ।
विस्तार
कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में छात्रों को अध्ययन के साथ-साथ भारतीय सिद्धांतों के आदर्श वाक्यों के पीछे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ भी बताए गए हैं। एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक में भारत के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' को मुंडक उपनिषद से जोड़ा गया है।
वहीं, सर्वोच्च न्यायालय का आदर्श वाक्य 'यतो धर्मस्ततो जयः' का संबंध महाभारत से बताया गया है। यानी जिन वाक्यों को छात्र रोजाना सरकारी छात्रों के साथ देखते हैं, उनका स्रोत भी किताब में समझा दिया गया है। 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2' नाम की यह किताब मंगलवार को जारी हुई है। इसका पहला भाग जून में जारी किया गया था।
‘सत्यमेव जयते’ का स्रोत क्या है?
एनसीईआरटी की पुस्तक 'शासन और सार्वजनिक नीति' अध्याय में भारत के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य 'सत्यमेव जयते' के बारे में जानकारी दी गई है। पुस्तक के अनुसार यह वाक्य मुंडक उपनिषद से लिया गया है। 'सत्यमेव जयते' का अर्थ है कि सत्य की ही विजय होती है। स्वतंत्रता के बाद भारतीय स्वतंत्रता में आये बदलावों का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि ब्रिटिश दौर का 'ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ इंडिया' का आदर्श वाक्य 'हेवेन्स लाइट, अवर गाइड' था।
आजादी के बाद भारत ने इसकी जगह ‘सत्यमेव जयते’ को राष्ट्रीय आदर्श वाक्य के रूप में अपनाया। किताब इसे सार्वजनिक जीवन में भारतीय नैतिक मूल्यों की निरंतर भूमिका से जोड़ती है।
सुप्रीम कोर्ट का मोटो कहां से आया?
पाठ्यपुस्तक में भारत के सुप्रीम कोर्ट के आदर्श वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ का भी उल्लेख किया गया है। एनसीईआरटी के अनुसार यह वाक्य महाभारत से लिया गया है। इसका अर्थ है कि जहां धर्म या उचित कर्तव्य है, वहां विजय है। किताब में बताया गया है कि भारतीय संस्थाओं के ये आदर्श वाक्य केवल नाम या प्रतीक के तौर पर नहीं हैं। इनके जरिए संस्थाओं के मूल्यों और आदर्शों को भी दर्शाया जाता है।
पाठ्यपुस्तक के मुताबिक, इन संस्थाओं के साथ अच्छे शासन यानी गुड गवर्नेंस सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी जुड़ी है। इस तरह छात्रों को संस्थागत मूल्यों को उनके ऐतिहासिक संदर्भ के साथ समझाने की कोशिश की गई है।
नई किताब किस पाठ्यक्रम का हिस्सा है?
‘समाज को समझना: भारत और उससे आगे-भाग 2’ कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब का हिस्सा है। इसे नई शिक्षा नीति 2020 और स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुसार तैयार किया गया है। इस किताब में इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र से जुड़े विषय हैं। सामाजिक विज्ञान के इस पाठ्यक्रम में कुल छह अध्याय हैं। किताब का दूसरा भाग मंगलवार को जारी किया गया, जबकि पहला भाग जून में जारी हुआ था। नई किताब में छात्रों को आधुनिक लोकतांत्रिक संस्थाओं और भारतीय परंपराओं के बीच संबंध आसान उदाहरणों के जरिए समझाने की कोशिश की गई है।
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