Polio: बदहाल पाकिस्तान को भारत से लेनी पड़ी मदद, जानें यहां क्यों नहीं थम रही ये बीमारी
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भारत आज से 6 साल पहले ही पोलियो मुक्त घोषित हो चुका है। 27 मार्च 2014 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO - World Health Organisation) ने भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया था। लेकिन हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान अब तक इस बीमारी से ग्रसित है। हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार, पोलियो के मामले में पाकिस्तान दुनिया के सबसे बदहाल देशों में से एक है। अन्य दो देश हैं अफगानिस्तान और नाइजीरिया।
पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, आधिकारिक आंकड़े कहते हैं कि वहां खैबर पख्तूनख्वा में 83 मामले, सिंध से 21, बलूचिस्तान में 9 और पंजाब में 6 मामले दर्ज किए गए हैं। हाल में ही पाकिस्तान में पोलियो के चार नए मामले सामने आए। इसके साथ ही साल 2019 में पाकिस्तान में पोलियो के 119 मामले हो गए। यहां लगातार पोलियो के मामले बढ़ रहे हैं।
पोलियो के मामले में पाक की बदहाली का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अब पाकिस्तान को अपनी अकड़ छोड़कर चीन के बदले भारत से मदद लेनी पड़ रही है।
पाकिस्तान ने भारत से क्या मदद ली है? वहां पोलियो जैसी खतरनाक बीमारी थम क्यों नहीं रही है? भारत ने किन तरीकों से पोलियो को हराया? इन सभी के बारे में आगे पढ़ें।
भारत ने पाकिस्तान को क्या मदद दी
- पाकिस्तान पहले चीन से पोलियो मार्कर लेता था। लेकिन उसकी घटिया गुणवत्ता के कारण उसे भारत के सामने हाथ फैलाने पड़े। चीन के खराब मार्कर के कारण 2018 में संयुक्त राष्ट्र (UN - United Nations) ने उसे काली सूची (Black List) में डाल दिया था। तब पाकिस्तान को भारत के सामने घुटने टेकने पड़े, क्योंकि चीन के अलावा भारत ही है जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुमोदित गैर विषाक्त पोलियो मार्कर बनते हैं।
- पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भारत से करीब चार लाख पोलियो मार्कर पाकिस्तान पहुंचाए गए हैं। इनकी कीमत करीब 77 लाख रुपये है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय पहले ही पाकिस्तान ने भारतीय कंपनी से 14.2 लाख पोलियो मार्कर मंगाए हैं।
पाकिस्तान में क्यों नहीं थम रहा है पोलियो?
- आतंकवाद: पाकिस्तान में बच्चों को पोलियो की खुराक देना आसान काम नहीं है। करीब एक दशक से यहां पोलियो उल्मूलन के लिए काम करने वाले दल आतंकियों के निशाने पर हैं। पिछले सात सालों में यहां पोलियो उन्मूलन दलों के सदस्यों पर हुए हमलों में 68 लोगों की मौत हो चुकी है।
- अंधविश्वास: पाकिस्तान में आकंतवाद के आकाओं का मानना है कि पोलियो की खुराक लेने से बांझपन होता है। लोग निःसंतान हो जाते हैं। इन्हीं बातों का वे प्रचार भी करते हैं। पाकिस्तान में पोलियो के लिए काम करने वाले नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के एक अधिकारी के अनुसार, वहां पोलियो के खुराक न मिलने और इस बीमारी के वायरस फैलने का ये एक बड़ा कारण है।
- धार्मिक कट्टरता: रिपोर्ट व आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान में धार्मिक कट्टरता पोलियो उल्मूलन अभियानों को बढ़ने ही नहीं देती। न ही बच्चों का टीकाकरण हो पाता है और न ही लोगों को अंधविश्वासों के खिलाफ जागरूक करने का प्रयास सफल हो पाता है।
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भारत ने कैसे लड़ी पोलियो से लड़ाई
- निरंतर जागरूकता अभियान: भारत में भी पोलियो वैक्सीन को लेकर अंधविश्वास थे। लोग पोलियो वैक्सीन की खुराक लेने से कतराते थे। फिर सरकार ने यूनिसेफ (UNICEF) के सहयोग से लगातार देश के कोने-कोने में जागरूकता अभियान चलाए। जगह-जगह विज्ञापन और होर्डिंग के जरिए लोगों तक सही जानकारी पहुंचाई गई। इस जागरूकता अभियान की शुरुआत 2001 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से की गई थी।
- ग्रामीण इलाकों से सहयोग: भारत में चल रहे पोलियो उन्मूलन अभियान को सही मायनों में सफलता मिलनी तब शुरू हुई, जब देश के ग्रामीण इलाकों व समुदाय विशेष के लोगों ने भी इसमें सहयोग दिया। जब जमीनी स्तर पर वे लोग अपने समुदाय व गांव विशेष में लोगों को जागरूक करने लगे। उनकी बातों पर स्थानीय लोगों को भरोसा होने लगा और हर बच्चे को पोलियो वैक्सीन की खुराक मिलने लगी।
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- बाइवैलेंट वैक्सीन: भारत में पोलियो से लड़ाई में जीत हासिल करने के लिए हुए कई प्रयासों में से एक बाइवैलेंट वैक्सीन भी है। यह ट्राइवैलेंट से ज्यादा शक्तिशाली व बेहतर बचाव देने वाली वैक्सीन है, जिसे भारत ने इस्तेमाल किया।