फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   uttar pradesh election 2027 bhadohi gyanpur Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation

सीट का समीकरण: लगातार चार चुनाव में रहा विजय मिश्र का दबदबा; 2022 में पलटा पासा, ऐसा है ज्ञानपुर का इतिहास

Mon, 19 Oct 2026 05:01 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 19 Oct 2026 05:01 PM IST
सार

भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा सीट 1957 के विधानसभा चुनाव में अस्तित्व में आई। यहां 2002 से 2017 तक विजय मिश्रा ने लगातार चार चुनाव जीतकर अपना वर्चस्व बनाया। वहीं, 2022 के चुनाव में यहां निषाद पार्टी के विपुल दुबे ने बाजी मारी।

विज्ञापन
uttar pradesh election 2027 bhadohi gyanpur Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation
ज्ञानपुर सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। राज्य में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। देश की राजनीति का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले यूपी की सभी 403 सीटों पर चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सत्ताधारी भाजपा अपनी सत्ता बचाए रख पाती है या विपक्ष उसके 10 साल के वर्चस्व को खत्म कर देगा। उत्तर प्रदेश की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
विज्ञापन


पहले जानते हैं ज्ञानपुर सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला भदोही है, जिसका नाम बदलकर संत रविदास नगर भदोही कर दिया गया है। जिले में कुल तीन विधानसभा सीटें हैं- भदोही, ज्ञानपुर और औराई। सीट का समीकरण की कड़ी में आज हम भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। भदोही जनपद की ज्ञानपुर विधानसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह विधानसभा दूसरे निर्वाचन क्षेत्रों का हिस्सा थी, लेकिन 1957 के दूसरे विधानसभा चुनाव में यहां पहली बार ज्ञानपुर नाम से चुनाव हुए। यहां के पहले विधायक बेचन राम गुप्ता बने थे, जिन्होंने कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
विज्ञापन
Trending Videos

ज्ञानपुर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
ज्ञानपुर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में ब्राह्मण, बिंद, यादव, मुस्लिम और एससी (दलित) समुदाय की आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी ब्राह्मण मतदाताओं की है, जो लगभग 20% हैं। इसके बाद बिंद मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 14% और यादव मतदाताओं की आबादी लगभग 12% है, जबकि मुस्लिम और एससी (दलित) मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 11-11% है।

अन्य प्रमुख वर्गों में पाल समाज और मौर्य समुदाय के मतदाता करीब 7-7% हैं, जबकि क्षत्रिय (ठाकुर) मतदाताओं की आबादी लगभग 5% है। इसके अलावा बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं। 
विज्ञापन

uttar pradesh election 2027 bhadohi gyanpur Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
ज्ञानपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957:  कांग्रेस के दबदबे का साथ शुरुआत

ज्ञानपुर विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास की बात करें तो यहां के पहले यानी कि 1957 के चुनाव में कांग्रेस के बेचन राम गुप्ता और वेचन राम दोनों विजयी हुए थे, क्योंकि उस समय यह विधानसभा एक द्विसदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र थी। चुनाव में बेचन राम गुप्ता को 33,349 वोट, जबकि वेचन राम को 27,766 वोट मिले थे। चुनाव में उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वियों में निर्दलीय गणेश राम को 25,954 वोट और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के राम नरेश को 17,040 वोट मिले थे।

1962: कांग्रेस ने दोहराई जीत
इस चुनाव में ज्ञानपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के हरिगैन राम विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ के काशी प्रसाद को 1,977 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरिगैन राम को 14,895 वोट, जबकि काशी प्रसाद को 12,918 वोट मिले।

1967: भारतीय जनसंघ ने जीता चुनाव
इसके बाद 1967 में चुनाव हुए। इन चुनावों में ज्ञानपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनसंघ (BJS) के मुरलीधर विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के बंशीधर को 296 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हराया। चुनाव में मुरलीधर को 20,200 वोट, जबकि बंशीधर को 19,904 वोट मिले।
विज्ञापन

1969: कांग्रेस ने की वापसी
इस चुनाव में ज्ञानपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के बंशीधर पांडेय विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल (BKD) के शारदा प्रसाद बिंद को 4,270 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बंशीधर पांडेय को 22,564 वोट, जबकि शारदा प्रसाद बिंद को 18,294 वोट मिले।

1974: भारतीय क्रांति दल ने जीता चुनाव
वहीं 1974 के चुनाव में ज्ञानपुर विधानसभा सीट से भारतीय क्रांति दल (BKD) की रामरती विजयी हुईं। उन्होंने कांग्रेस के बृद्धि नारायण को 5,688 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रामरती को 23,661 वोट, जबकि बृद्धि नारायण को 17,973 वोट मिले।

आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

uttar pradesh election 2027 bhadohi gyanpur Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

1977: कांग्रेस ने फिर की वापसी
1977 के यूपी विधानसभा चुनाव में भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के श्यामधर मिश्रा विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के रामरती बिंद को 4,909 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्यामधर मिश्रा को 37,502 वोट, जबकि रामरती बिंद को 32,593 वोट मिले।

राजनीतिक अस्थिरता का समय
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।

1980 का चुनाव
इस सबके बीच राज्य में 1980 के विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में भदोही सीट पर एक बार फिर कांग्रेस की वापसी हुई। चुनाव में कांग्रेस (आई) के बृद्धि नारायण सिंह विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय अब्दुल वहाब को 5,393 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बृद्धि नारायण सिंह को 26,118 वोट, जबकि अब्दुल वहाब को 20,725 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस (यू) के श्यामधर मिश्रा 16,886 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1985: कांग्रेस ने लगाई जीत की हैट्रिक
1985 के चुनाव में ज्ञानपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के शारदा प्रसाद बिंद विजयी हुए। उन्होंने लोकदल के रामरती बिंद को महज 207 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में शारदा प्रसाद बिंद को 23,514 वोट, जबकि रामरती बिंद को 23,307 वोट मिले। वहीं, 1989 के चुनाव में ज्ञानपुर सीट से जनता दल की रामरती बिंद विजयी हुईं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के लालचंद को 19,379 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में रामरती बिंद को 41,980 वोट, जबकि लालचंद को 22,601 वोट मिले।

1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में ज्ञानपुर विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

1991: पहली बार जीती भाजपा
इस चुनाव में भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा सीट पर पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में भाजपा के लालचंद्र पांडे विजयी हुए। उन्होंने जनता दल के रामप्रसाद बिंद को 13,597 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में लालचंद्र पांडे को 39,272 वोट, जबकि रामप्रसाद बिंद को 25,675 वोट मिले।

uttar pradesh election 2027 bhadohi gyanpur Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation
2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
1993: पहली बार जीती बसपा
वहीं 1993 के चुनाव में ज्ञानपुर विधानसभा सीट पर एक बार फिर बदलाव हुआ। उस चुनाव में पहली बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के प्रत्याशी राम किशोर बिंद विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार दिनेश को 9,587 वोटों से हराया।

भाजपा ने की वापसी
1996 के चुनाव में ज्ञानपुर विधानसभा सीट पर भाजपा की फिर से वापसी हुई। इस चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी गोरखनाथ विजयी हुए। चुनाव में उन्होंने सपा के राम रती बिंद को 1,869 वोटों से हराया।

2002, 2007, 2012 और 2017 का चुनाव
इसके बाद राज्य में 2002, 2007, 2012 और 2017 के चुनाव हुए। इन चुनावों में ज्ञानपुर विधानसभा सीट पर विजय मिश्रा ने लगातार चार बार जीत दर्ज की। इस दौरान उन्होंने 2002, 2007 और 2012 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव में जीत दर्ज की, जबकि 2017 में उन्होंने निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (NISHAD) के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत दर्ज की। 

2022 का चुनाव 
इस विधानसभा चुनाव में भदोही जिले की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (NISHAD) के विपुल दुबे विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी के रामकिशोर बिंद को 6,231 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विपुल दुबे को 73,446 वोट, जबकि रामकिशोर बिंद को 67,215 वोट मिले। वहीं, प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के विजय मिश्रा 34,985 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed