{"_id":"6ac519d1f6291cbca809fdf6","slug":"bollywood-in-2026-from-border-2-to-drishyam-3-are-franchises-the-new-powerhouse-of-hindi-cinema-2026-10-06","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"खास रिपोर्ट: 'बॉर्डर 2' से 'दृश्यम 3' तक, 2026 में फ्रेंचाइजी बनी बॉलीवुड की नई ताकत? जानें विशेषज्ञों की राय","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
खास रिपोर्ट: 'बॉर्डर 2' से 'दृश्यम 3' तक, 2026 में फ्रेंचाइजी बनी बॉलीवुड की नई ताकत? जानें विशेषज्ञों की राय
सार
Bollywood Sequels 2026: बॉक्स ऑफिस पर इस साल की एक तस्वीर काफी साफ दिखाई दे रही है। दर्शक फिल्मों से पूरी तरह दूर नहीं हुआ है। लेकिन हर फिल्म के लिए थिएटर जाने को तैयार भी नहीं है। वहीं बॉलीवुड में इस साल धड़ल्ले से सीक्वल पर सीक्वल बने हैं। इस खबर में समझिए सीक्वल की सफलता और असफलता के कारण एक्सपर्ट के नजरिए से।
विज्ञापन
बॉक्स ऑफिस 2026
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
साल 2026 के करीब नौ महीने गुजर चुके हैं। इस साल रिलीज हुई कई सीक्वल और फ्रेंचाइजी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की है। वहीं कुछ फिल्में औसत रहीं और एक फिल्म फ्लॉप भी हुई। यानी फ्रेंचाइजी फिल्म होना सफलता की गारंटी नहीं है।
लेकिन आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि पुरानी पहचान फिल्म को शुरुआती बढ़त दे रही है। ऐसे में फिल्म निर्माताओं का भरोसा उन कहानियों और किरदारों पर बढ़ा है, जिन्हें दर्शक पहले से जानते हैं। पढ़िए इस साल रिलीज हुई फ्रेंचाइजी फिल्मों पर एक विस्तृत रिपोर्ट।
11 फिल्मों के आंकड़ों में क्या तस्वीर सामने आई?
2026 में अब तक रिलीज हुई 11 प्रमुख सीक्वल और फ्रेंचाइजी फिल्मों को देखें, तो पांच फिल्में हिट या उससे ऊपर रही हैं। दो फिल्मों को सेमी-हिट का दर्जा मिला। तीन फिल्में औसत रहीं। सिर्फ एक फिल्म फ्लॉप रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
लेकिन आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि पुरानी पहचान फिल्म को शुरुआती बढ़त दे रही है। ऐसे में फिल्म निर्माताओं का भरोसा उन कहानियों और किरदारों पर बढ़ा है, जिन्हें दर्शक पहले से जानते हैं। पढ़िए इस साल रिलीज हुई फ्रेंचाइजी फिल्मों पर एक विस्तृत रिपोर्ट।
विज्ञापन
11 फिल्मों के आंकड़ों में क्या तस्वीर सामने आई?
2026 में अब तक रिलीज हुई 11 प्रमुख सीक्वल और फ्रेंचाइजी फिल्मों को देखें, तो पांच फिल्में हिट या उससे ऊपर रही हैं। दो फिल्मों को सेमी-हिट का दर्जा मिला। तीन फिल्में औसत रहीं। सिर्फ एक फिल्म फ्लॉप रही।
विज्ञापन
- इस लिस्ट में 'बॉर्डर 2', 'धुरंधर: द रिवेंज', 'धमाल 4', 'अवारापन 2' और 'मिर्जापुर: द मूवी' जैसी हिट फिल्में शामिल हैं।
- वहीं 'द केरल स्टोरी 2' और 'वेलकम टू द जंगल' ने भी बॉक्स ऑफिस पर सेमी-हिट प्रदर्शन किया।
- इसके उलट 'मर्दानी 3', 'पति पत्नी और वो दो' और 'कॉकटेल 2' औसत रहीं।
- वहीं 'वध 2' बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई।
Trending Videos
फिल्म 'धुरंधर 2'
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
सबसे बड़ा उदाहरण बनी 'धुरंधर 2'
इस साल की सबसे बड़ी मिसाल 'धुरंधर: द रिवेंज' है। फिल्म ने एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन किया। फिल्म का पहला हिस्सा दर्शकों के बीच अपनी पहचान बना चुका था।
दूसरे हिस्से के लिए दर्शकों को किरदारों और कहानी की दुनिया से दोबारा परिचय कराने की जरूरत नहीं पड़ी। यही फायदा फ्रेंचाइजी फिल्मों को मिलता है। दर्शक को पता होता है कि वह किस दुनिया में जा रहा है।
इस साल की सबसे बड़ी मिसाल 'धुरंधर: द रिवेंज' है। फिल्म ने एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन किया। फिल्म का पहला हिस्सा दर्शकों के बीच अपनी पहचान बना चुका था।
दूसरे हिस्से के लिए दर्शकों को किरदारों और कहानी की दुनिया से दोबारा परिचय कराने की जरूरत नहीं पड़ी। यही फायदा फ्रेंचाइजी फिल्मों को मिलता है। दर्शक को पता होता है कि वह किस दुनिया में जा रहा है।
फिल्म 'बॉर्डर 2'
- फोटो : सोशल मीडिया
'बॉर्डर 2' ने भी किया बड़ा कारोबार
'बॉर्डर 2' ने भी इसी भरोसे को आगे बढ़ाया। 1997 में आई 'बॉर्डर' हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल है। करीब तीन दशक बाद इसका दूसरा हिस्सा आया।
फिल्म ने करीब 340 करोड़ रुपये का भारत नेट कलेक्शन किया। यह सिर्फ एक सीक्वल की कमाई नहीं थी। इसके पीछे पहली फिल्म की याद, देशभक्ति से जुड़ा भाव और सनी देओल की पुरानी छवि भी थी। यानी फिल्म को दर्शक तक पहुंचने के लिए बिल्कुल शून्य से शुरुआत नहीं करनी पड़ी।
'बॉर्डर 2' ने भी इसी भरोसे को आगे बढ़ाया। 1997 में आई 'बॉर्डर' हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में शामिल है। करीब तीन दशक बाद इसका दूसरा हिस्सा आया।
फिल्म ने करीब 340 करोड़ रुपये का भारत नेट कलेक्शन किया। यह सिर्फ एक सीक्वल की कमाई नहीं थी। इसके पीछे पहली फिल्म की याद, देशभक्ति से जुड़ा भाव और सनी देओल की पुरानी छवि भी थी। यानी फिल्म को दर्शक तक पहुंचने के लिए बिल्कुल शून्य से शुरुआत नहीं करनी पड़ी।
आवारापन 2
- फोटो : अमर उजाला
सिर्फ बड़ी फ्रेंचाइजी नहीं, पुरानी यादें भी आईं काम
'अवारापन 2' इस ट्रेंड का दूसरा दिलचस्प उदाहरण है। पहली फिल्म के कई साल बाद भी दूसरे हिस्से को लेकर चर्चा बनी रही।
फिल्म ने करीब 146 करोड़ रुपये का भारत नेट कलेक्शन किया और ट्रेड में सुपरहिट रही। 'धमाल 4' ने भी कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अपनी पहचान का फायदा उठाया। फिल्म करीब 164 करोड़ रुपये तक पहुंची और हिट रही।
यानी 2026 में सिर्फ बड़े बजट वाली फ्रेंचाइजी नहीं चलीं। अलग-अलग जॉनर की स्थापित कहानियों को दर्शकों ने मौका दिया।
'अवारापन 2' इस ट्रेंड का दूसरा दिलचस्प उदाहरण है। पहली फिल्म के कई साल बाद भी दूसरे हिस्से को लेकर चर्चा बनी रही।
फिल्म ने करीब 146 करोड़ रुपये का भारत नेट कलेक्शन किया और ट्रेड में सुपरहिट रही। 'धमाल 4' ने भी कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अपनी पहचान का फायदा उठाया। फिल्म करीब 164 करोड़ रुपये तक पहुंची और हिट रही।
यानी 2026 में सिर्फ बड़े बजट वाली फ्रेंचाइजी नहीं चलीं। अलग-अलग जॉनर की स्थापित कहानियों को दर्शकों ने मौका दिया।
वध 2 और पति पत्नी और वो
- फोटो : सोशल मीडिया
लेकिन हर सीक्वल नहीं चला
इस पूरे ट्रेंड का दूसरा पहलू भी है। अगर सिर्फ पुरानी पहचान ही फिल्म को हिट करा सकती, तो हर सीक्वल सफल होता। ऐसा नहीं हुआ। 'वध 2' फ्लॉप रही। 'मर्दानी 3', 'पति पत्नी और वो दो' और 'कॉकटेल 2' को औसत प्रदर्शन से संतोष करना पड़ा।
इससे साफ है कि फ्रेंचाइजी फिल्म को दर्शक तक पहुंचने का फायदा जरूर मिल सकता है। लेकिन इसके बाद फिल्म की कहानी, प्रस्तुति और दर्शकों का रिएक्शन ही उसका कलेक्शन तय करती है।
इस पूरे ट्रेंड का दूसरा पहलू भी है। अगर सिर्फ पुरानी पहचान ही फिल्म को हिट करा सकती, तो हर सीक्वल सफल होता। ऐसा नहीं हुआ। 'वध 2' फ्लॉप रही। 'मर्दानी 3', 'पति पत्नी और वो दो' और 'कॉकटेल 2' को औसत प्रदर्शन से संतोष करना पड़ा।
इससे साफ है कि फ्रेंचाइजी फिल्म को दर्शक तक पहुंचने का फायदा जरूर मिल सकता है। लेकिन इसके बाद फिल्म की कहानी, प्रस्तुति और दर्शकों का रिएक्शन ही उसका कलेक्शन तय करती है।
मिर्जापुर द मूवी
- फोटो : सोशल मीडिया
इस फिल्म ने दिखाया OTT से थिएटर तक का सफर
'मिर्जापुर: द मूवी' इस ट्रेंड का अलग उदाहरण है। इसकी सबसे बड़ी ताकत कोई पुरानी फिल्म नहीं, बल्कि एक पॉपुलर ओटीटी फ्रेंचाइजी थी। वेब सीरीज के किरदार पहले से दर्शकों के बीच पॉपुलर थे। कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मिर्जापुर की दुनिया को दर्शक पहले से जानते थे।
फिल्म ने करीब 213 करोड़ रुपये का भारत नेट कलेक्शन किया। इससे यह संकेत मिला कि मजबूत डिजिटल फैन बेस को थिएटर तक लाया जा सकता है।
'मिर्जापुर: द मूवी' इस ट्रेंड का अलग उदाहरण है। इसकी सबसे बड़ी ताकत कोई पुरानी फिल्म नहीं, बल्कि एक पॉपुलर ओटीटी फ्रेंचाइजी थी। वेब सीरीज के किरदार पहले से दर्शकों के बीच पॉपुलर थे। कालीन भैया, गुड्डू पंडित और मिर्जापुर की दुनिया को दर्शक पहले से जानते थे।
फिल्म ने करीब 213 करोड़ रुपये का भारत नेट कलेक्शन किया। इससे यह संकेत मिला कि मजबूत डिजिटल फैन बेस को थिएटर तक लाया जा सकता है।
दृश्यम 3
- फोटो : अमर उजाला
अब बारी 'दृश्यम 3' की
- 2 अक्टूबर को 'दृश्यम 3' रिलीज हुई। फिल्म ने करीब 60 करोड़ रुपये की ओपनिंग के साथ शुरुआत की।
- शुरुआती दिनों में इसका कारोबार तेजी से बढ़ा। महज पांच दिनों में इसने वर्ल्डवाइड 300 रुपये कमा लिए।
- यहां भी मामला सिर्फ अजय देवगन का स्टारडम नहीं है।
- दर्शक विजय सलगांवकर के किरदार को पहले से जानता है।
- उसे पिछली दो फिल्मों की कहानी याद है।
- सबसे बड़ी बात यह है कि उसे पता है कि 'दृश्यम' की दुनिया में किस तरह का रोमांच मिलने वाला है।
अतुल मोहन
- फोटो : सोशल मीडिया
फ्रेंचाइजी को लेकर ट्रेड एक्सपर्ट की क्या है राय?
ट्रेड एक्सपर्ट अतुल मोहन कहते हैं, 'फिल्म तब चलती है, जब वह अच्छी होती है। फ्रेंचाइजी का फायदा जरूर मिलता है। यह एक एडवांटेज है। मार्केटिंग में भी इसका फायदा मिलता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप फिल्म में मेहनत न करें।'
अतुल 'दृश्यम 3' को इसका अच्छा उदाहरण मानते हैं। अतुल मोहन कहते हैं, 'दृश्यम 3' की सफलता इसका अच्छा उदाहरण है। 'दृश्यम' की हर फिल्म में पहले से बेहतर करने की कोशिश हुई है। इस फिल्म में भी राइटिंग और मेकिंग के स्तर पर काफी काम किया गया। 'दृश्यम 3' और पिछली फिल्मों में फर्क दिखता है। यही चीज दर्शकों को पसंद आई है। दर्शक को फिल्म अच्छी लगती है, तो फिर उसकी सफलता को कोई नहीं रोक सकता।'
अतुल मोहन फ्रेंचाइजी को लेकर एक दिलचस्प तुलना भी करते हैं। वह कहते हैं, 'जैसे दूध देने वाली गाय को सिर्फ दूध निकालने के लिए नहीं छोड़ सकते। उसे अच्छा चारा भी देना पड़ता है। फ्रेंचाइजी के साथ भी यही है। हर अगली फिल्म कम से कम पिछली फिल्म के लेवल की होनी चाहिए। कोशिश यह होनी चाहिए कि वह उससे थोड़ी बेहतर निकले। अगर आप लगातार लेवल नीचे करते जाएंगे, तो दर्शक की उम्मीद टूटेगी और वह अगली फिल्म से दूर हो जाएगा।'
ट्रेड एक्सपर्ट अतुल मोहन कहते हैं, 'फिल्म तब चलती है, जब वह अच्छी होती है। फ्रेंचाइजी का फायदा जरूर मिलता है। यह एक एडवांटेज है। मार्केटिंग में भी इसका फायदा मिलता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप फिल्म में मेहनत न करें।'
अतुल 'दृश्यम 3' को इसका अच्छा उदाहरण मानते हैं। अतुल मोहन कहते हैं, 'दृश्यम 3' की सफलता इसका अच्छा उदाहरण है। 'दृश्यम' की हर फिल्म में पहले से बेहतर करने की कोशिश हुई है। इस फिल्म में भी राइटिंग और मेकिंग के स्तर पर काफी काम किया गया। 'दृश्यम 3' और पिछली फिल्मों में फर्क दिखता है। यही चीज दर्शकों को पसंद आई है। दर्शक को फिल्म अच्छी लगती है, तो फिर उसकी सफलता को कोई नहीं रोक सकता।'
अतुल मोहन फ्रेंचाइजी को लेकर एक दिलचस्प तुलना भी करते हैं। वह कहते हैं, 'जैसे दूध देने वाली गाय को सिर्फ दूध निकालने के लिए नहीं छोड़ सकते। उसे अच्छा चारा भी देना पड़ता है। फ्रेंचाइजी के साथ भी यही है। हर अगली फिल्म कम से कम पिछली फिल्म के लेवल की होनी चाहिए। कोशिश यह होनी चाहिए कि वह उससे थोड़ी बेहतर निकले। अगर आप लगातार लेवल नीचे करते जाएंगे, तो दर्शक की उम्मीद टूटेगी और वह अगली फिल्म से दूर हो जाएगा।'
ओटीटी
- फोटो : अमर उजाला
'आज का दर्शक बहुत सेलेक्टिव है'
अतुल मोहन कहते हैं, 'आज का दर्शक बहुत सेलेक्टिव है। उसके पास कंटेंट के बहुत सारे विकल्प हैं। एक तरफ थिएटर की टिकट है, तो दूसरी तरफ उसी कीमत में वह लंबे समय का ओटीटी सब्सक्रिप्शन ले सकता है। इसलिए फिल्म में इतनी वैल्यू होनी चाहिए कि दर्शक को लगे कि इसे थिएटर में जाकर देखना है।
थिएटर का अनुभव मोबाइल या लैपटॉप पर नहीं मिल सकता। लेकिन फिल्म में वह बात भी होनी चाहिए कि दर्शक उस अनुभव के लिए घर से बाहर निकले। आज पायरेसी और ऑनलाइन कंटेंट के बावजूद अगर फिल्म अच्छी है, तो दर्शक थिएटर आता है। बड़े पर्दे पर जो मजा मिलता है, वह अलग है।'
अतुल मोहन कहते हैं, 'आज का दर्शक बहुत सेलेक्टिव है। उसके पास कंटेंट के बहुत सारे विकल्प हैं। एक तरफ थिएटर की टिकट है, तो दूसरी तरफ उसी कीमत में वह लंबे समय का ओटीटी सब्सक्रिप्शन ले सकता है। इसलिए फिल्म में इतनी वैल्यू होनी चाहिए कि दर्शक को लगे कि इसे थिएटर में जाकर देखना है।
थिएटर का अनुभव मोबाइल या लैपटॉप पर नहीं मिल सकता। लेकिन फिल्म में वह बात भी होनी चाहिए कि दर्शक उस अनुभव के लिए घर से बाहर निकले। आज पायरेसी और ऑनलाइन कंटेंट के बावजूद अगर फिल्म अच्छी है, तो दर्शक थिएटर आता है। बड़े पर्दे पर जो मजा मिलता है, वह अलग है।'
फिल्म एनालिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर राज बंसल
- फोटो : इंस्टाग्राम @raj_bansal
फिल्म एनालिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर राज बंसल की राय
राज बंसल भी 'दृश्यम 3' की शुरुआत को फ्रेंचाइजी के भरोसे से जोड़ते हैं। वह कहते हैं, 'दृश्यम 3 की करीब 60 करोड़ की ओपनिंग शानदार है। यह उम्मीद से भी बेहतर शुरुआत है। फिल्म को अपनी फ्रेंचाइजी का पूरा फायदा मिला है। ‘दृश्यम’ की अपनी एक ऑडियंस है। दर्शक इसके किरदारों और कहानी से पहले से जुड़ा हुआ है। इसलिए फिल्म को लेकर उत्सुकता पहले से थी।'
वह आगे कहते हैं, 'आज के समय में यह बहुत बड़ा फायदा है। किसी नई फिल्म को दर्शकों तक पहुंचने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। फ्रेंचाइजी फिल्म के साथ ऐसा नहीं है। दर्शक पहले से फिल्म के नाम को जानता है। उसके किरदारों से परिचित है। वह जानना चाहता है कि इस बार कहानी में क्या नया है।'
राज बंसल के मुताबिक, 'मुझे लगता है कि यही वजह है कि अच्छी फ्रेंचाइजी फिल्मों के लिए थिएटर में शुरुआती दर्शक जुटाना आसान हो जाता है। लेकिन फ्रेंचाइजी के साथ दर्शकों की उम्मीद भी बढ़ जाती है। इसलिए हर नई फिल्म में कुछ नया देना जरूरी है। ‘दृश्यम 3’ की शुरुआत देखकर फिलहाल यही लगता है कि दर्शकों ने इस फ्रेंचाइजी पर अपना भरोसा कायम रखा है।'
हालांकि फिल्म अभी सिनेमाघरों में चल रही है। इसलिए इसे अभी अंतिम तौर पर ब्लॉकबस्टर कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इसकी शुरुआत ने फ्रेंचाइजी फिल्मों की ताकत को जरूर फिर चर्चा में ला दिया है।
राज बंसल भी 'दृश्यम 3' की शुरुआत को फ्रेंचाइजी के भरोसे से जोड़ते हैं। वह कहते हैं, 'दृश्यम 3 की करीब 60 करोड़ की ओपनिंग शानदार है। यह उम्मीद से भी बेहतर शुरुआत है। फिल्म को अपनी फ्रेंचाइजी का पूरा फायदा मिला है। ‘दृश्यम’ की अपनी एक ऑडियंस है। दर्शक इसके किरदारों और कहानी से पहले से जुड़ा हुआ है। इसलिए फिल्म को लेकर उत्सुकता पहले से थी।'
वह आगे कहते हैं, 'आज के समय में यह बहुत बड़ा फायदा है। किसी नई फिल्म को दर्शकों तक पहुंचने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। फ्रेंचाइजी फिल्म के साथ ऐसा नहीं है। दर्शक पहले से फिल्म के नाम को जानता है। उसके किरदारों से परिचित है। वह जानना चाहता है कि इस बार कहानी में क्या नया है।'
राज बंसल के मुताबिक, 'मुझे लगता है कि यही वजह है कि अच्छी फ्रेंचाइजी फिल्मों के लिए थिएटर में शुरुआती दर्शक जुटाना आसान हो जाता है। लेकिन फ्रेंचाइजी के साथ दर्शकों की उम्मीद भी बढ़ जाती है। इसलिए हर नई फिल्म में कुछ नया देना जरूरी है। ‘दृश्यम 3’ की शुरुआत देखकर फिलहाल यही लगता है कि दर्शकों ने इस फ्रेंचाइजी पर अपना भरोसा कायम रखा है।'
हालांकि फिल्म अभी सिनेमाघरों में चल रही है। इसलिए इसे अभी अंतिम तौर पर ब्लॉकबस्टर कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इसकी शुरुआत ने फ्रेंचाइजी फिल्मों की ताकत को जरूर फिर चर्चा में ला दिया है।
मिर्जापुर द मूवी और कॉकटेल 2
- फोटो : सोशल मीडिया
दर्शक थिएटर से दूर नहीं हुआ, लेकिन चुनिंदा फिल्में देख रहा है
- ऑरमैक्स मीडिया (मीडिया रिसर्च और एनालिटिक्स कंपनी) की 2026 की पहली छमाही की रिपोर्ट भी एक अहम तस्वीर दिखाती है।
- जनवरी से जून के बीच भारतीय बॉक्स ऑफिस ने 6,398 करोड़ रुपये का कारोबार किया।
- यह महामारी के बाद किसी साल की पहली छमाही का सबसे बड़ा आंकड़ा था। फुटफॉल भी पांच फीसदी बढ़ा।
- लेकिन इसी रिपोर्ट का दूसरा आंकड़ा ज्यादा दिलचस्प है।
- टॉप 15 फिल्मों की कुल बॉक्स ऑफिस हिस्सेदारी 2025 की पहली छमाही के 49 फीसदी से बढ़कर 2026 में 58 फीसदी हो गई।
- मतलब साफ है। दर्शक थिएटर आ रहा है, लेकिन उसका पैसा चुनिंदा फिल्मों में ज्यादा जा रहा है।
- यही वजह है कि फिल्म निर्माताओं के लिए स्थापित फ्रेंचाइजी और पॉपुलर किरदार ज्यादा सुरक्षित शुरुआत दे सकते हैं।
दृश्यम 3 अजय देवगन, जयदीप अहलावत और तब्बू
- फोटो : अमर उजाला
तो क्या नई कहानियों का दौर खत्म हो गया?
ऐसा कहना गलत होगा। 2026 में फ्रेंचाइजी फिल्मों की सफलता के साथ नई कहानियों और नए विषयों वाली फिल्मों ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा है। इसलिए सवाल यह नहीं है कि दर्शक नई कहानी देखना चाहता है या पुरानी।
असल सवाल यह है कि क्या नई फिल्म दर्शक को इतनी जल्दी भरोसा दे पा रही है, जितना एक स्थापित फ्रेंचाइजी दे देती है?
फ्रेंचाइजी फिल्म के पास पहले से एक नाम होता है। एक किरदार होता है। एक दुनिया होती है। और सबसे जरूरी, दर्शक की एक उम्मीद होती है। नई फिल्म को ये सब शून्य से बनाना पड़ता है।
ऐसा कहना गलत होगा। 2026 में फ्रेंचाइजी फिल्मों की सफलता के साथ नई कहानियों और नए विषयों वाली फिल्मों ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा है। इसलिए सवाल यह नहीं है कि दर्शक नई कहानी देखना चाहता है या पुरानी।
असल सवाल यह है कि क्या नई फिल्म दर्शक को इतनी जल्दी भरोसा दे पा रही है, जितना एक स्थापित फ्रेंचाइजी दे देती है?
फ्रेंचाइजी फिल्म के पास पहले से एक नाम होता है। एक किरदार होता है। एक दुनिया होती है। और सबसे जरूरी, दर्शक की एक उम्मीद होती है। नई फिल्म को ये सब शून्य से बनाना पड़ता है।
फिल्म 'मर्दानी 3' और 'बॉर्डर 2'
- फोटो : एक्स (ट्विटर)
'ओरिजिनल कंटेंट पर बॉलीवुड को ज्यादा मेहनत करनी होगी'
अतुल मोहन कहते हैं, 'ओरिजिनल कंटेंट के लिए भी यही चुनौती है। अब लगभग हर तरह का कंटेंट ऑनलाइन मिल जाता है। पहले साउथ की फिल्मों के रीमेक का दौर इसलिए भी चला, क्योंकि दर्शकों के पास ओरिजिनल भाषा में फिल्म देखने के उतने विकल्प नहीं थे। अब स्थिति बदल गई है। ऐसे में बॉलीवुड को ओरिजिनल कहानियों पर ज्यादा मेहनत करनी होगी।
मलयालम सिनेमा इसका अच्छा उदाहरण है। वहां सिंपल कहानियां भी अच्छी राइटिंग और ट्रीटमेंट की वजह से बड़ा बिजनेस करती हैं। दर्शक को आज सिर्फ बड़ा नाम नहीं चाहिए। उसे अच्छा कंटेंट चाहिए। अगर ओरिजिनल कहानी पर ईमानदारी से मेहनत होगी, तो उसका रिजल्ट जरूर मिलेगा।'
अतुल मोहन कहते हैं, 'ओरिजिनल कंटेंट के लिए भी यही चुनौती है। अब लगभग हर तरह का कंटेंट ऑनलाइन मिल जाता है। पहले साउथ की फिल्मों के रीमेक का दौर इसलिए भी चला, क्योंकि दर्शकों के पास ओरिजिनल भाषा में फिल्म देखने के उतने विकल्प नहीं थे। अब स्थिति बदल गई है। ऐसे में बॉलीवुड को ओरिजिनल कहानियों पर ज्यादा मेहनत करनी होगी।
मलयालम सिनेमा इसका अच्छा उदाहरण है। वहां सिंपल कहानियां भी अच्छी राइटिंग और ट्रीटमेंट की वजह से बड़ा बिजनेस करती हैं। दर्शक को आज सिर्फ बड़ा नाम नहीं चाहिए। उसे अच्छा कंटेंट चाहिए। अगर ओरिजिनल कहानी पर ईमानदारी से मेहनत होगी, तो उसका रिजल्ट जरूर मिलेगा।'
2026 में रिलीज हुई फ्रेंचाइजी फिल्मों का वर्ल्डवाइड कलेक्शन
- फोटो : अमर उजाला
2026 के बॉक्स ऑफिस से मिले 4 सबक
- इस साल के आंकड़ों को देखें तो फ्रेंचाइजी फिल्मों का फायदा साफ दिखाई देता है। 11 प्रमुख सीक्वल और फ्रेंचाइजी फिल्मों में पांच हिट या उससे ऊपर रहीं। दो सेमी-हिट रहीं। तीन औसत और एक फ्लॉप रही।
- इसका मतलब यह नहीं कि अब बॉलीवुड में सिर्फ सीक्वल ही चलेंगे। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि दर्शक के लिए परिचित नाम अब फिल्म की शुरुआती ताकत बन चुका है।
- 'बॉर्डर 2' से लेकर 'धुरंधर 2', 'धमाल 4', 'अवारापन 2', 'मिर्जापुर: द मूवी' और अब 'दृश्यम 3' तक का सफर इसी बदलाव की ओर इशारा करता है।
- बॉलीवुड के लिए शायद 2026 का सबसे बड़ा सबक यही है- नई कहानी जरूरी है, लेकिन अगर उसके साथ दर्शक का पहले से बना रिश्ता भी हो तो थिएटर की पहली सीढ़ी चढ़ना आसान हो जाता है।