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Exclusive: ‘राजकुमार राव नए टैलेंट पर भरोसा करते हैं’, 'टोस्टर' के डायरेक्टर विवेक ने सिनेमा पर साझा की राय

Kiran Vinod Kumar Jain Kiran Vinod Kumar Jain
Updated Sat, 23 May 2026 02:04 PM IST
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सार

Director Vivek Daschaudary Exclusive Interview: राजकुमार राव अभिनीत फिल्म ‘टोस्टर’ ओटीटी पर रिलीज हुई। इस फिल्म के निर्देशक विवेक दासचौधरी ने हाल ही में अमर उजाला से करियर और सिनेमा को लेकर लंबी बातचीत की है। 

Rajkumar Rao Movie Toaster Director Vivek Daschaudary Exclusive Interview Share His Career And Films Journey
डायरेक्टर विवेक दासचौधरी ने राजकुमार राव पर साझा की कई बातें - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

डायरेक्टर विवेक दासचौधरी की फिल्म ‘टोस्टर’ को ऑडियंस से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। ओटीटी पर यह फिल्म अब भी ट्रेंड कर रही है। राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा स्टारर इस फिल्म के डायरेक्टर विवेक दासचौधरी हैं। ‘टोस्टर’ में राजकुमार राव के साथ काम करने का अनुभव और अपने करियर से जुड़ी कई बातें निर्देशक विवेक ने अमर उजाला डिजिटल के साथ साझा की हैं। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश-

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Rajkumar Rao Movie Toaster Director Vivek Daschaudary Exclusive Interview Share His Career And Films Journey
विवेक दासचौधरी निर्देशित फिल्म 'टोस्टर' के एक सीन में राजकुमार राव - फोटो : अमर उजाला

राजकुमार राव के साथ काम करने का अनुभव यादगार रहा
विवेक दासचौधरी ‘टोस्टर’ से पहले राजकुमार के साथ ‘गन्स एंड गुलाब्स’ में काम कर चुके हैं, इस फिल्म के वो असिस्टेंट डायरेक्टर थे। फिल्म ‘टोस्टर’ में राजकुमार राव के साथ दोबारा काम करना उनके लिए खास रहा। विवेक कहते हैं, ‘मैं पहले भी राजकुमार के साथ काम कर चुका हूं, इसलिए उनके काम करने के तरीके से परिचित था। लेकिन ‘टोस्टर’ के दौरान उन्हें और करीब से समझने का मौका मिला। वह सेट पर हर इंसान को बराबर सम्मान देते हैं। चाहे डायरेक्टर हो, असिस्टेंट हो या टेक्नीशियन, वह सभी के साथ बहुत सहज होकर काम करते हैं। उनके अंदर स्टार वाला रवैया बिल्कुल नहीं है। यही चीज उन्हें अलग बनाती है। एक निर्देशक के तौर पर मेरे लिए सबसे बड़ी बात यह रही कि राजकुमार ने हमेशा मेरी सोच पर भरोसा दिखाया। वह सिर्फ अपने किरदार तक सीमित नहीं रहते थे। पूरी फिल्म को बेहतर बनाने के बारे में सोचते हैं। उनके साथ काम करते हुए आपको महसूस होता है कि वह सच में कहानी और सिनेमा को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं।’

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राजकुमार राव और पत्रलेखा - फोटो : इंस्टाग्राम- @patralekhaa

राजकुमार और पत्रलेखा नए टैलेंट पर भरोसा करते हैं
डायरेक्टर विवेक का मानना है कि आज इंडस्ट्री को ऐसे लोगों की जरूरत है जो नए डायरेक्टर्स और क्रिएटिव लोगों को मौका दें। वह कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि राजकुमार और पत्रलेखा दोनों ही नए टैलेंट पर भरोसा करते हैं। आज कई नए डायरेक्टर्स और राइटर्स के पास शानदार आइडियाज हैं। लेकिन उन्हें सही सपोर्ट नहीं मिल पाता। जब इंडस्ट्री के स्थापित लोग नए लोगों को मौका देते हैं, तो उससे पूरी टीम का कॉन्फिडेंस बढ़ जाता है। इस फिल्म के दौरान मुझे महसूस हुआ कि उनके लिए सिर्फ फिल्म बनाना जरूरी नहीं है बल्कि अच्छे और ईमानदार सिनेमा को आगे बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है।’ 

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फराह खान के साथ राजकुमार राव, पत्रलेखा और सान्या मल्होत्रा - फोटो : सोशल मीडिया

फराह खान के बिना फिल्म अधूरी थी 
फिल्म ‘टोस्टर’ में फराह खान की मौजूदगी को लेकर भी विवेक दासचौधरी ने दिलचस्प बात साझा की। उन्होंने बताया कि टीम को शुरुआत से ही लग रहा था कि यह किरदार फराह खान ही सबसे बेहतर तरीके से निभा सकती हैं। वह बताते हैं, ‘जब हम इस किरदार पर काम कर रहे थे, तभी हमारे दिमाग में फराह मैम का नाम आया था। उस किरदार में जिस तरह की एनर्जी, ह्यूमर और स्क्रीन प्रेजेंस चाहिए थी, वह बहुत आसानी से लेकर आ सकती थीं।
वह आगे कहते हैं, ‘राजकुमार और पत्रलेखा की फराह मैम के साथ बहुत अच्छी बॉन्डिंग है। उन्होंने जब उनसे फिल्म के बारे में बात की, तो काम करना बहुत आसान हो गया। अच्छी बात यह रही कि उन्होंने तुरंत हामी भर दी। सेट पर उनकी मौजूदगी पूरे माहौल को हल्का और मजेदार बना देती थी। वह कैमरे के सामने बिल्कुल नेचुरल रहती थीं। यही बात उस किरदार के लिए सबसे ज्यादा जरूरी थी।’ 

छोटे शहरों की कहानियों से सबसे ज्यादा जुड़ती है ऑडियंस
सिनेमा के बदलते दौर पर बात करते हुए विवेक ने कहा, ‘अब ऑडियंस सिर्फ फॉर्मूला फिल्में नहीं देखना चाहती। लोग ऐसी कहानियां पसंद कर रहे हैं, जो नई हों और दिल से कही गई हों। हमारी फिल्म को जो प्यार मिला, उससे यह साफ है कि अच्छी और अलग कहानियों के लिए हमेशा जगह रहती है। एक समय था जब छोटे शहरों और आम लोगों की जिंदगी पर बनी ऐसी फिल्में खूब बनती थीं। दर्शक उन्हें पसंद भी करते थे। लेकिन धीरे-धीरे इस तरह की कहानियां कम हो गईं। मुझे उम्मीद है कि फिर से ऐसे सिनेमा को बढ़ावा मिलेगा। मेरा मानना है कि ऑडियंस सबसे ज्यादा उन्हीं कहानियों से जुड़ती है जो उन्हें अपनी लगती हैं।’ 
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