Exclusive: ‘राजकुमार राव नए टैलेंट पर भरोसा करते हैं’, 'टोस्टर' के डायरेक्टर विवेक ने सिनेमा पर साझा की राय
Director Vivek Daschaudary Exclusive Interview: राजकुमार राव अभिनीत फिल्म ‘टोस्टर’ ओटीटी पर रिलीज हुई। इस फिल्म के निर्देशक विवेक दासचौधरी ने हाल ही में अमर उजाला से करियर और सिनेमा को लेकर लंबी बातचीत की है।
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डायरेक्टर विवेक दासचौधरी की फिल्म ‘टोस्टर’ को ऑडियंस से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। ओटीटी पर यह फिल्म अब भी ट्रेंड कर रही है। राजकुमार राव और सान्या मल्होत्रा स्टारर इस फिल्म के डायरेक्टर विवेक दासचौधरी हैं। ‘टोस्टर’ में राजकुमार राव के साथ काम करने का अनुभव और अपने करियर से जुड़ी कई बातें निर्देशक विवेक ने अमर उजाला डिजिटल के साथ साझा की हैं। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश-
राजकुमार राव के साथ काम करने का अनुभव यादगार रहा
विवेक दासचौधरी ‘टोस्टर’ से पहले राजकुमार के साथ ‘गन्स एंड गुलाब्स’ में काम कर चुके हैं, इस फिल्म के वो असिस्टेंट डायरेक्टर थे। फिल्म ‘टोस्टर’ में राजकुमार राव के साथ दोबारा काम करना उनके लिए खास रहा। विवेक कहते हैं, ‘मैं पहले भी राजकुमार के साथ काम कर चुका हूं, इसलिए उनके काम करने के तरीके से परिचित था। लेकिन ‘टोस्टर’ के दौरान उन्हें और करीब से समझने का मौका मिला। वह सेट पर हर इंसान को बराबर सम्मान देते हैं। चाहे डायरेक्टर हो, असिस्टेंट हो या टेक्नीशियन, वह सभी के साथ बहुत सहज होकर काम करते हैं। उनके अंदर स्टार वाला रवैया बिल्कुल नहीं है। यही चीज उन्हें अलग बनाती है। एक निर्देशक के तौर पर मेरे लिए सबसे बड़ी बात यह रही कि राजकुमार ने हमेशा मेरी सोच पर भरोसा दिखाया। वह सिर्फ अपने किरदार तक सीमित नहीं रहते थे। पूरी फिल्म को बेहतर बनाने के बारे में सोचते हैं। उनके साथ काम करते हुए आपको महसूस होता है कि वह सच में कहानी और सिनेमा को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं।’
राजकुमार और पत्रलेखा नए टैलेंट पर भरोसा करते हैं
डायरेक्टर विवेक का मानना है कि आज इंडस्ट्री को ऐसे लोगों की जरूरत है जो नए डायरेक्टर्स और क्रिएटिव लोगों को मौका दें। वह कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि राजकुमार और पत्रलेखा दोनों ही नए टैलेंट पर भरोसा करते हैं। आज कई नए डायरेक्टर्स और राइटर्स के पास शानदार आइडियाज हैं। लेकिन उन्हें सही सपोर्ट नहीं मिल पाता। जब इंडस्ट्री के स्थापित लोग नए लोगों को मौका देते हैं, तो उससे पूरी टीम का कॉन्फिडेंस बढ़ जाता है। इस फिल्म के दौरान मुझे महसूस हुआ कि उनके लिए सिर्फ फिल्म बनाना जरूरी नहीं है बल्कि अच्छे और ईमानदार सिनेमा को आगे बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है।’
फराह खान के बिना फिल्म अधूरी थी
फिल्म ‘टोस्टर’ में फराह खान की मौजूदगी को लेकर भी विवेक दासचौधरी ने दिलचस्प बात साझा की। उन्होंने बताया कि टीम को शुरुआत से ही लग रहा था कि यह किरदार फराह खान ही सबसे बेहतर तरीके से निभा सकती हैं। वह बताते हैं, ‘जब हम इस किरदार पर काम कर रहे थे, तभी हमारे दिमाग में फराह मैम का नाम आया था। उस किरदार में जिस तरह की एनर्जी, ह्यूमर और स्क्रीन प्रेजेंस चाहिए थी, वह बहुत आसानी से लेकर आ सकती थीं।
वह आगे कहते हैं, ‘राजकुमार और पत्रलेखा की फराह मैम के साथ बहुत अच्छी बॉन्डिंग है। उन्होंने जब उनसे फिल्म के बारे में बात की, तो काम करना बहुत आसान हो गया। अच्छी बात यह रही कि उन्होंने तुरंत हामी भर दी। सेट पर उनकी मौजूदगी पूरे माहौल को हल्का और मजेदार बना देती थी। वह कैमरे के सामने बिल्कुल नेचुरल रहती थीं। यही बात उस किरदार के लिए सबसे ज्यादा जरूरी थी।’
सिनेमा के बदलते दौर पर बात करते हुए विवेक ने कहा, ‘अब ऑडियंस सिर्फ फॉर्मूला फिल्में नहीं देखना चाहती। लोग ऐसी कहानियां पसंद कर रहे हैं, जो नई हों और दिल से कही गई हों। हमारी फिल्म को जो प्यार मिला, उससे यह साफ है कि अच्छी और अलग कहानियों के लिए हमेशा जगह रहती है। एक समय था जब छोटे शहरों और आम लोगों की जिंदगी पर बनी ऐसी फिल्में खूब बनती थीं। दर्शक उन्हें पसंद भी करते थे। लेकिन धीरे-धीरे इस तरह की कहानियां कम हो गईं। मुझे उम्मीद है कि फिर से ऐसे सिनेमा को बढ़ावा मिलेगा। मेरा मानना है कि ऑडियंस सबसे ज्यादा उन्हीं कहानियों से जुड़ती है जो उन्हें अपनी लगती हैं।’