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रामायण: धार्मिक कथाओं पर फिल्में बनाने वाले बॉलीवुड से कहां हो रही चूक? 20 साल से शोध कर रहे लेखक ने बताई कमी

Fri, 06 Nov 2026 08:30 AM IST
Kiran Vinod Kumar Jain किरण जैन
Updated Fri, 06 Nov 2026 08:30 AM IST
सार

  • महाभारत के कर्ण को हम दानवीर और महान योद्धा के रूप में जानते हैं, लेकिन क्या उसका एक दूसरा पहलू भी है? 
  • ‘द महाभारत सीक्रेट’, ‘द महाभारत क्वेस्ट’ और ‘द पाताल प्रॉपेसी’ जैसी किताबों के लेखक क्रिस्टोफर डॉयल पिछले 20 साल से महाभारत पर शोध कर रहे हैं। 
  • अपनी नई किताब ‘द कर्स ऑफ द कुरुज’ के जरिए वह महाभारत के अनदेखे पहलुओं को सामने ला रहे हैं।

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Christopher Doyle interview: The Mahabharata Secret Book fame author talks about indian mythological movies
लेखक क्रिस्टोफर डॉयल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला से खास बातचीत में क्रिस्टोफर डॉयल ने बताया कि बॉलीवुड को रामायण-महाभारत पर फिल्में बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्यों इन महाकाव्यों को पर्दे पर उतारने के लिए सिर्फ भव्य विजुअल्स नहीं, बल्कि मूल ग्रंथों की गहरी समझ जरूरी है। पढ़िए बातचीत के कुछ प्रमुख अंश:

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आप 20 साल से महाभारत पर शोध कर रहे हैं। इस दौरान ऐसा क्या पता चला, जिसने कहानी को देखने का आपका नजरिया बदल दिया?
जब मैंने 2006 में महाभारत पर काम शुरू किया था, तब मुझे भी लगता था कि यह वीर पांडवों और खलनायक कौरवों की कहानी है, जिनका नेतृत्व दुर्योधन करता है। लेकिन शोध के दौरान समझ आया कि महाभारत की कहानी इससे कहीं बड़ी है। इसकी शुरुआत ब्रह्मांड और उसमें रहने वाले जीवों की उत्पत्ति से होती है। इसके बाद कुरु वंश का इतिहास और उसकी कई पीढ़ियों की कहानी आती है। पांडवों और कौरवों की कहानी तो इसके बाद शुरू होती है।
महाभारत का हर किरदार कई रंगों वाला है। किसी में सिर्फ अच्छाई नहीं है और कोई पूरी तरह बुरा नहीं है। हर किरदार में अच्छे और बुरे काम करने की क्षमता है। आखिर हम इंसान भी तो ऐसे ही हैं। मेरे लिए महाभारत सिर्फ दो परिवारों के बीच राजगद्दी की लड़ाई नहीं है। यह धर्म और अधर्म, इंसानी भावनाओं, हमारे फैसलों और उनके नतीजों की कहानी है।

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फिर कर्ण जैसे किरदार को सिर्फ पीड़ित और दानवीर के रूप में देखना कितना सही है?
कर्ण को अक्सर अन्याय का शिकार, दानवीर और वफादार योद्धा माना जाता है। जन्म के बाद उसे छोड़ दिया गया, उसे दो श्राप मिले और राजकुमारों की रंगभूमि में उसका अपमान हुआ। कर्ण का किरदार इससे कहीं ज्यादा जटिल है। कर्ण को मिले कुछ दूसरे श्रापों की कहानियां मूल संस्कृत ग्रंथ में नहीं हैं।
कर्ण ने शुरुआत में इंद्र को अपना कवच-कुंडल देने से मना कर दिया था, क्योंकि सूर्य ने उसे चेतावनी दी थी। बाद में उसने बदले में इंद्र का शक्ति अस्त्र लेने की शर्त पर कवच-कुंडल दिए। कृष्ण ने उसे हस्तिनापुर का राजा बनने का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन उसने दुर्योधन के प्रति वफादारी के कारण इसे ठुकरा दिया।
दूसरी तरफ, कर्ण ने द्यूत सभा में द्रौपदी का अपमान किया और उसे निर्वस्त्र करने के लिए कहा। वह उन छह योद्धाओं में भी शामिल था, जिन्होंने चक्रव्यूह में अभिमन्यु पर हमला किया। उसने अभिमन्यु का धनुष और तरकश काटा था। क्या कर्ण की अच्छाइयां उसके इन कामों को सही ठहरा सकती हैं?

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बॉलीवुड में महाभारत और दूसरी पौराणिक कहानियों पर फिल्में बनती रही हैं। क्या आपको लगता है कि फिल्म निर्माता इन कहानियों के साथ न्याय कर पा रहे हैं?
यह कहते हुए मुझे अच्छा नहीं लग रहा, लेकिन मैंने महाकाव्यों और पुराणों पर आधारित बॉलीवुड की जितनी भी फिल्में देखी हैं, उनमें मुझे लगा कि कहानी के साथ और बेहतर काम किया जा सकता था। सिर्फ कहानी का अनुवाद करके उसे पर्दे पर दिखा देना काफी नहीं है। फिल्म बनाने वालों को पहले उस कहानी और उसके मूल ग्रंथ को समझना चाहिए, जिस पर वे फिल्म बना रहे हैं।
कई सफल फिल्मों में भी महाभारत से जुड़ी बातें गलत दिखाई गई हैं। फिल्म निर्माता अपनी तरफ से नई कहानी बना सकते हैं, लेकिन उन्हें यह पता होना चाहिए कि मूल ग्रंथ में क्या लिखा है। अगर वे ऐसा करेंगे, तो कहानी ज्यादा अच्छी और असरदार बन सकती है।

Christopher Doyle interview: The Mahabharata Secret Book fame author talks about indian mythological movies
रामायण फिल्म - फोटो : इंस्टाग्राम

‘रामायण’ बड़े पर्दे पर आने वाली है। जब दर्शक इन कहानियों को पहले से जानते हैं, तो उन्हें फिर से देखने में दिलचस्पी क्यों होगी?
मुझे लगता है कि यह मानना गलत है कि हर कोई ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ को अच्छी तरह जानता है। बहुत कम लोगों ने इनके मूल ग्रंथ पढ़े हैं। दर्शक इन कहानियों के बारे में और जानना चाहते हैं। 
साथ ही, वे यह भी देखना चाहते हैं कि कोई लेखक या फिल्मकार इन्हें अपने नजरिये से कैसे पेश करता है। हर लेखक और फिल्म निर्माता इन कहानियों को अपने नजरिये से दिखाना चाहता है। वह अपनी सोच के आधार पर कहानी को पेश करता है। इसलिए इन कहानियों को दोबारा पर्दे पर दिखाने की गुंजाइश हमेशा रहती है। लेकिन जरूरी है कि फिल्म निर्माता कहानी को समझें और उसे सही तरीके से पर्दे पर उतारें।

बॉलीवुड पौराणिक कहानियों को भव्य तो बना रहा है, लेकिन क्या उनकी असली ताकत पर्दे पर दिखा पा रहा है?
मुझे ‘ब्रह्मास्त्र’ भारतीय ग्रंथों से ज्यादा पश्चिमी फैंटेसी फिल्मों से प्रेरित लगी। फैंटेसी फिल्म बनाने का मतलब सिर्फ शानदार विजुअल इफेक्ट्स दिखाना नहीं है। उसमें गहराई और ऐसी कहानी भी होनी चाहिए, जो दर्शकों को अपने साथ जोड़े। इसके लिए महाभारत और हमारे पुराणों में बहुत कुछ मौजूद है। हमें हर बार बिल्कुल नया विचार गढ़ने की जरूरत नहीं है।
हमारे महाकाव्यों के किरदार खुद में बहुत जटिल हैं। उनमें कई पहलू हैं, जो दर्शकों को उनसे जोड़ सकते हैं। जरूरत है कि फिल्म निर्माता इन किरदारों और उनकी कहानियों को ठीक से समझें। 

पौराणिक फिल्मों में अपनी तरफ से बदलाव करने पर अक्सर विवाद हो जाता है। फिल्म निर्माता इससे कैसे बच सकते हैं?
फिल्म बनाने वालों को दर्शकों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए। अगर वे ऐसे बदलाव करते हैं, जो दर्शकों की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं, तो लोग नाराज होंगे ही। इसके लिए सबसे पहले मूल कहानी को समझना जरूरी है। जब फिल्म निर्माता को पता होगा कि मूल ग्रंथ में क्या लिखा है, तो वह अपनी सोच के हिसाब से भी कहानी दिखा सकता है।
किरदारों का रूप, उनके कपड़े, सेट, दृश्य, संवाद, एक्शन और उनके आपसी रिश्ते भी कहानी के हिसाब से होने चाहिए। दर्शकों को मूल ग्रंथों से जुड़ी ऐसी बातें और नए नजरिये दिखाए जा सकते हैं, जिनके बारे में उन्हें पहले पता न हो। लेकिन इसके लिए फिल्म निर्माता को खुद उस कहानी की अच्छी समझ होनी चाहिए।

Christopher Doyle interview: The Mahabharata Secret Book fame author talks about indian mythological movies
'आदिपुरुष' - फोटो : इंस्टाग्राम @आदिपुरुष

अगर आप बॉलीवुड में पौराणिक फिल्मों को बनाने का तरीका बदल सकते, तो सबसे पहले क्या बदलते?
मैं महाभारत और पुराणों पर आधारित फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखने का तरीका बदलना चाहूंगा। इसके लिए सोच और नजरिया बदलना जरूरी है। आज भी फिल्मों के एक्शन, विजुअल इफेक्ट्स और किरदारों के लुक में पश्चिमी फिल्मों का असर दिखाई देता है। और अगर ऐसा नहीं है, तो कई बार फिल्में मूल कहानियों को सही तरीके से नहीं दिखातीं।
हमारे ग्रंथों में कहानी की दुनिया बनाने के लिए बहुत सारी जानकारियां मौजूद हैं। फिल्म निर्माता उनका इस्तेमाल करके ऐसी दुनिया बना सकते हैं, जिससे भारतीय दर्शक जुड़ सकें। जब किरदार और फिल्म की दुनिया असली लगने लगें, तो कहानी में नए मोड़ भी जोड़े जा सकते हैं। बस इतना ध्यान रखना होगा कि बदलाव दर्शकों की भावनाओं के खिलाफ न हों।

महाभारत जैसी कहानी पर आगे किस तरह की फिल्में बननी चाहिए?
महाभारत पर फिल्मों की एक पूरी सीरीज बनाई जा सकती है। अगर इसे सही तरीके से बनाया जाए, तो इससे कई हिट फिल्में बन सकती हैं।

भारतीय पौराणिक कथाओं में ऐसी कौन-सी कहानी है, जिस पर आप फिल्म बनते देखना चाहेंगे?
मैं प्राचीन भारतीय कहानियों पर थ्रिलर लिखता हूं। अगर मैंने अपने आइडिया बता दिए, तो मेरी कहानियों का खुलासा पहले ही हो जाएगा। हालांकि, भगवान परशुराम और उनके द्वारा क्षत्रियों के संहार की कहानी पर फिल्म बनाई जा सकती है। यह बेहद दिलचस्प कहानी है और इसे पर्दे पर उतारना भी मुश्किल नहीं होना चाहिए।

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