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योगी सरकार के 9 साल: इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से सुनिश्चित हुई यूपी की आर्थिक प्रगति
ब्रजेश मिश्रा
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Sat, 21 Mar 2026 01:03 PM IST
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यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : ANI Photos
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उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा को समझने के लिए उसके बुनियादी ढांचे में आए बदलाव को देखना आवश्यक है। लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि प्रदेश की प्रगति उसकी कमजोर कनेक्टिविटी और अविकसित लॉजिस्टिक व्यवस्था के कारण बाधित होती रही है। विशाल जनसंख्या, भौगोलिक विस्तार और संसाधनों की विविधता के बावजूद उत्तर प्रदेश अपनी संभावनाओं का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा था, लेकिन बीते कुछ वर्षों में जिस तरह से सड़क, रेल और जलमार्ग को एक समेकित दृष्टिकोण के साथ विकसित किया गया है, उसने इस धारणा को बदलना शुरू कर दिया है।
इस परिवर्तन के पीछे एक स्पष्ट सोच रही है कि विकास की नींव बुनियादी ढांचे पर ही टिकती है। जब तक सड़कें नहीं जुड़ेंगी, बाजार नहीं जुड़ेंगे। जब तक परिवहन सुगम नहीं होगा, निवेश नहीं आएगा। और जब तक निवेश नहीं आएगा, रोजगार और आय के अवसर सीमित रहेंगे। उत्तर प्रदेश ने इसी मूल सिद्धांत को केंद्र में रखकर अपने विकास की दिशा तय की है।
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इस परिवर्तन के पीछे एक स्पष्ट सोच रही है कि विकास की नींव बुनियादी ढांचे पर ही टिकती है। जब तक सड़कें नहीं जुड़ेंगी, बाजार नहीं जुड़ेंगे। जब तक परिवहन सुगम नहीं होगा, निवेश नहीं आएगा। और जब तक निवेश नहीं आएगा, रोजगार और आय के अवसर सीमित रहेंगे। उत्तर प्रदेश ने इसी मूल सिद्धांत को केंद्र में रखकर अपने विकास की दिशा तय की है।
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वर्ष 2017 तक प्रदेश का एक्सप्रेसवे नेटवर्क सीमित था और केवल 2 प्रमुख एक्सप्रेसवे ही इसकी रीढ़ थे। आज स्थिति बदल चुकी है। उत्तर प्रदेश 22 एक्सप्रेसवे के नेटवर्क के साथ आगे बढ़ रहा है, जिनमें 7 संचालित हैं, 5 निर्माणाधीन हैं और 10 प्रस्तावित हैं। यह विस्तार केवल संख्या का नहीं, बल्कि दृष्टिकोण का संकेत है।
सड़क नेटवर्क के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार भी उल्लेखनीय रहा है। वर्तमान में प्रदेश से 90 राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं और इस विस्तार के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। इसका प्रभाव यह हुआ है कि प्रदेश के भीतर और बाहर आवागमन अधिक सुगम हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान हुई है और छोटे उद्योगों को बाजार तक पहुंच मिली है।
सड़क नेटवर्क के साथ-साथ राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार भी उल्लेखनीय रहा है। वर्तमान में प्रदेश से 90 राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं और इस विस्तार के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। इसका प्रभाव यह हुआ है कि प्रदेश के भीतर और बाहर आवागमन अधिक सुगम हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान हुई है और छोटे उद्योगों को बाजार तक पहुंच मिली है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को केवल सड़कों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि लॉजिस्टिक ढांचे को भी मजबूत करने का प्रयास किया गया है। दादरी में ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का जंक्शन स्थापित होना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ईस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर का 1,050 किलोमीटर से अधिक हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है, जिससे माल परिवहन की गति बढ़ी है और लागत में कमी आई है। इससे औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिली है।
जलमार्गों के क्षेत्र में भी प्रदेश ने संभावनाओं को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। देश के 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 11 उत्तर प्रदेश में हैं, जो इसे उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स केंद्र बना रहे हैं। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 का 425 किलोमीटर हिस्सा प्रदेश में स्थित है और इसे अयोध्या तक विस्तारित करने की योजना इस नेटवर्क को और सुदृढ़ करेगी। वाराणसी में स्थापित मल्टी मॉडल टर्मिनल और वहां विकसित हो रहा 100 एकड़ का फ्रेट विलेज इस समेकित दृष्टिकोण का उदाहरण है।
जलमार्गों के क्षेत्र में भी प्रदेश ने संभावनाओं को साकार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। देश के 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से 11 उत्तर प्रदेश में हैं, जो इसे उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स केंद्र बना रहे हैं। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 का 425 किलोमीटर हिस्सा प्रदेश में स्थित है और इसे अयोध्या तक विस्तारित करने की योजना इस नेटवर्क को और सुदृढ़ करेगी। वाराणसी में स्थापित मल्टी मॉडल टर्मिनल और वहां विकसित हो रहा 100 एकड़ का फ्रेट विलेज इस समेकित दृष्टिकोण का उदाहरण है।
इन प्रयासों का प्रभाव अब आर्थिक संकेतकों में भी दिखाई देने लगा है। जनवरी 2026 में जारी एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024 में उत्तर प्रदेश ने चौथा स्थान प्राप्त किया है, जबकि 2022 में यह सातवें स्थान पर था। लैंडलॉक्ड राज्यों में प्रथम स्थान प्राप्त करना यह दर्शाता है कि प्रदेश ने अपनी भौगोलिक सीमाओं को अवसर में बदलने का प्रयास किया है।
लॉजिस्टिक लागत में कमी और परिवहन समय में सुधार ने उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाया है। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है और प्रदेश अब केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि उत्पादन और वितरण का एक उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है।
हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि इस विकास को संतुलित और समावेशी बनाया जाए। प्रदेश के कुछ हिस्सों में अभी भी बुनियादी ढांचे की कमी महसूस होती है। ऐसे क्षेत्रों तक विकास की पहुंच सुनिश्चित करना अगली बड़ी चुनौती है। इंफ्रास्ट्रक्चर का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और यह क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में सहायक बने।
लॉजिस्टिक लागत में कमी और परिवहन समय में सुधार ने उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाया है। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है और प्रदेश अब केवल एक उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि उत्पादन और वितरण का एक उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है।
हालांकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि इस विकास को संतुलित और समावेशी बनाया जाए। प्रदेश के कुछ हिस्सों में अभी भी बुनियादी ढांचे की कमी महसूस होती है। ऐसे क्षेत्रों तक विकास की पहुंच सुनिश्चित करना अगली बड़ी चुनौती है। इंफ्रास्ट्रक्चर का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और यह क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में सहायक बने।
उत्तर प्रदेश की यह यात्रा यह स्पष्ट करती है कि बुनियादी ढांचा केवल निर्माण का विषय नहीं है, बल्कि यह विकास की दिशा तय करने वाला कारक है। जब योजनाएं स्पष्ट हों, प्राथमिकताएं तय हों और क्रियान्वयन प्रभावी हो, तो परिवर्तन संभव है।
अंततः, उत्तर प्रदेश की यह यात्रा केवल निर्माण कार्यों की सूची नहीं है, बल्कि एक व्यापक परिवर्तन का संकेत है। सड़क, रेल और जलमार्ग के माध्यम से जो ढांचा खड़ा हुआ है, उसने प्रदेश को नई दिशा दी है, लेकिन इसकी वास्तविक कसौटी अभी बाकी है। इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता उद्घाटन और आंकड़ों से नहीं, उसके प्रभाव से तय होती है। यह तब सिद्ध होगा जब हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर नागरिक तक इसके लाभ समान रूप से पहुंचें। जब एक किसान अपनी उपज बिना बाधा बाजार तक पहुंचा सके, जब एक छोटा उद्योग दूर के बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सके और जब युवाओं को अपने ही प्रदेश में अवसर मिलें, तभी इस बदलाव को पूर्ण माना जाएगा।
उत्तर प्रदेश ने यह साबित किया है कि स्पष्ट दृष्टि और दृढ़ इच्छाशक्ति से बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सकता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि इस गति को बनाए रखते हुए इसे गुणवत्ता, संतुलन और स्थायित्व में बदला जाए। आने वाले वर्ष यही तय करेंगे कि यह परिवर्तन केवल विकास का चरण था या वास्तव में उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक संरचना को स्थायी रूप से बदलने वाली प्रक्रिया।
(लेखक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।)
अंततः, उत्तर प्रदेश की यह यात्रा केवल निर्माण कार्यों की सूची नहीं है, बल्कि एक व्यापक परिवर्तन का संकेत है। सड़क, रेल और जलमार्ग के माध्यम से जो ढांचा खड़ा हुआ है, उसने प्रदेश को नई दिशा दी है, लेकिन इसकी वास्तविक कसौटी अभी बाकी है। इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता उद्घाटन और आंकड़ों से नहीं, उसके प्रभाव से तय होती है। यह तब सिद्ध होगा जब हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर नागरिक तक इसके लाभ समान रूप से पहुंचें। जब एक किसान अपनी उपज बिना बाधा बाजार तक पहुंचा सके, जब एक छोटा उद्योग दूर के बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर सके और जब युवाओं को अपने ही प्रदेश में अवसर मिलें, तभी इस बदलाव को पूर्ण माना जाएगा।
उत्तर प्रदेश ने यह साबित किया है कि स्पष्ट दृष्टि और दृढ़ इच्छाशक्ति से बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सकता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि इस गति को बनाए रखते हुए इसे गुणवत्ता, संतुलन और स्थायित्व में बदला जाए। आने वाले वर्ष यही तय करेंगे कि यह परिवर्तन केवल विकास का चरण था या वास्तव में उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक संरचना को स्थायी रूप से बदलने वाली प्रक्रिया।
(लेखक जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।)