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'अब दरी नहीं बिछाएगा अब्दुल': मध्यावधि चुनाव में अल-सैयद की जीत पर बोले असदुद्दीन ओवैसी, संघ पर क्या कहा?

Wed, 04 Nov 2026 03:41 PM IST
अमन मौर्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अमन मौर्या Updated Wed, 04 Nov 2026 03:41 PM IST
सार

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में मिशिगन से सीनेट जीतने वाले पहले मुस्लिम नेता अब्दुलरहमान मोहम्मद अल-सैयद की जीत पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया देते हुए यूपी के मुसलमानों को राजनीतिक पहचान मजबूत करने की नसीहत दी है।

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असदुद्दीन ओवैसी, अध्यक्ष एआईएमआईएम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मध्यावधि चुनाव में मिशिगन से सीनेट का चुनाव जीतने वाले डेमोक्रेट अब्दुलरहमान मोहम्मद अल-सैयद की जीत की खूब चर्चा हो रही है। वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम नेता हैं। उनकी इस ऐतिहासिक जीत पर भारत से भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अब्दुल अल-सैयद की जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने का संदेश दिया है। अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'एक अब्दुल मिशिगन में जीत गया। अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को अपनी सियासी पहचान मजबूत करनी होगी। संघियों ने अब्दुल को एक तंज में बदलने की बहुत कोशिश की है। वक्त आ गया है कि हम दिखाएं कि अब्दुल अल्लाह के सिवा किसी की गुलामी नहीं करता। अब दरी नहीं बिछाएंगे।
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मध्यावधि चुनाव में मिशिगन में अब्दुल अल-सैयद ने अमेरिकी सीनेट सीट की दौड़ में रिपब्लिकन नेता माइक रोजर्स को शिकस्त दी है। उनके लिए यह बहुत बड़ी जीत है, क्योंकि यह चुनाव जीतकर वे सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं।
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अल सैयद ने जीत के बाद क्या कहा? 
अपनी जीत के बाद अब्दुल अल-सैयद ने कहा, 'मैं उसी खुले दिल, उदार सोच, दृढ़ संकल्प और सच्ची लगन के साथ आपकी सेवा करने के लिए उत्सुक हूं, जो आपने मुझे दिखाई है। मेरे सबसे कठिन समय में आपने मुझे सम्मान और ताकत दी। वह उम्मीद और प्रेरणा दी जिससे मुझे अपना सर्वश्रेष्ठ देने की शक्ति मिली। मुझे उम्मीद है कि आपकी सेवा के लिए मैं यही सब अपने साथ वाशिंगटन ले जा सकूंगा।'
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क्या है भारत से कनेक्शन?
अब्दुल अल-सैयद का भारत से भी गहरा जुड़ाव है। एक इंटरव्यू के दौरान अल-सैयद ने बताया था कि उनकी शादी एक दक्षिण भारतीय परिवार में हुई है और अब 20 साल हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि सच कहूं तो शायद मैं अरब होने से ज्यादा भारतीय हूं।

उनकी पत्नी डॉ. सारा जुकाकू एक मनोचिकित्सक हैं। अल-सैयद की पत्नी का परिवार भटकल से ताल्लुक रखता है, जो मंगलुरु से करीब 140 किलोमीटर दूर है। सारा, जुकाकू शमसुद्दीन की पोती हैं। शमसुद्दीन तत्कालीन मुख्यमंत्री बीडी जत्ती के नेतृत्व वाली मैसूर रियासत में वित्त उप-मंत्री के रूप में काम किया था।


ट्रंप ने कहा था जिहादी?
चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप ने अपने भाषण में कहा था, 'तो अब्दुल, यह भी चाहता है कि हमारे देश में शरिया कानून लागू हो जाए। अगर वो कभी ऐसा करने में कामयाब हो जाता है तो सबसे पहले उसी पर मुकदमा चलना चाहिए। मैं इसका गवाह बनूंगा।' ट्रम्प ने अल सैयद को जिहादी करार दिया था।
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