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Hindi News ›   India News ›   After these changes in food presentation at airport firm saves 1.2 crore rupees

इन खास तरीकों को अपनाकर हवाई अड्डे पर खाने की बर्बादी हुई कम, बचाए 1.2 करोड़ रुपये

Mon, 05 Nov 2018 12:04 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Updated Mon, 05 Nov 2018 12:04 PM IST
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हवाई अड्डों के लॉन्ज, कैफे और फूड आउटलेट्स पर लोगों द्वारा कचरा फेंके जाने के कारण करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। महज डिजर्ट में कुछ बदलाव करके ही काफी पैसा बचाया जा सकता है। इससे पहले जब विश्लेषण किया गया तो पाया गया कि देर रात जिन यात्रियों की उड़ान होती है वह हवाई अड्डों पर अक्सर कूड़ा फैला देते हैं। कई बार तो खाने की चीजों को भी आधा खाया जताा है और बाकी को फेंक दिया जाता है। इससे न केवल कचरे की मात्रा बढ़ती है बल्कि खाने की भी बर्बादी होती है। इसके बाद नुकसान को कम करने के लिए कुछ बदलाव किए गए। एक साल बाद पता चला कि इन तरीकों से नुकसान में कमी आई है।

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इस पहल की शुरुआत एक डिलेड फ्लाइट में दौरान चीफ ऑपरेटिंग अफसर (सीओओ) ने की। वह फूड एंड बेवरेजिस कंपनी के सीओओ हैं। वह मुंबई एयरपोर्ट पर जीवीके लॉन्ज चलाते हैं। उन्होंने इस बात का पता लगाया कि क्या वहज है कि ये समस्या खत्म नहीं हो रही। जिसके बाद उन्होंने इन तरीकों पर विचार किया। इसी साल अप्रैल में कंपनी ने 19 शहरों के 280 फूड आउटलेट्स में डस्टबिन एनालीसिस किया। जिसमें मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई भी शामिल हैं। उन्होंने सालाना 4-5 करोड़ रुपये बचाने का टार्गेट रखा है।
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ट्रैवल फूड सर्विसेज (टीएफएस) के सीओओ और बिजनेस हेड गौरव दीवान का कहना है कि उनके लॉन्ज में मुश्किल से लोग डिजर्ट पूरा खाते थे। एक डिनर बफेट में 15 डिजर्ट होते थे लेकिन लोग मुश्किल से एक दो खाते थे और बाकी बेकार जाता है। इसके बाद जब इसके पीछे की वजह पता की तो पता चला कि गलती कहां है। दरअसल परेशानी डिजर्ट में नहीं बल्कि उनका अधिक मात्रा में होना है। अब डिजर्ट के साइज को छोटा किया गया है। जिससे डस्टबिन वेस्ट में कमी आई है। मुंबई एयरपोर्ट के 5 लॉन्ज से 1.2 करोड़ रुपये बचाए गए हैं।
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इसके अलावा खाने को परोसने के तरीके में भी बदवाल किए गए। फूड आउटलेट्स पर पहले कागज में जो खाने का सामान परोसा जाता था, उसे प्लेट में परोसा जाने लगा। वहीं सैंडविच को बटर पेपर पर रैप करना शुरू किया गया। यह रैप बायो डिग्रेडेबल होते हैं। साल भर में कई मिलियन सैंडविच बेचे जाते हैं। एक को पैक करने की लागत पहले 7 रुपये पड़ती थी। यानि साल के 70 लाख रुपये लग जाते थे। लेकिन बटर पेपर में एक सैंडविच को पैक करने में महज 25 पैसे का खर्च आता है।

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