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Kerala Elections: मतदाताओं को लुभाने के लिए पार्टियां ले रहीं AI का सहारा, डिजिटल प्रचार में भी झोंक रहीं ताकत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 27 Mar 2026 01:24 PM IST
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सार

केरल के चुनावों में राजनीतिक दल एआई का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस और वामपंथी दल एआई वीडियो और डिजिटल टूल्स के जरिए मतदाताओं को आकर्षित करने का प्रयास कर  रहे हैं। इससे चुनाव प्रचार का तरीका बदल गया है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता को लेकर बहस भी जारी है।

AI in Kerala Elections Political parties are using digital campaign tools to attract voters
एआई वाला सियासी दांव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

केरल के चुनावी मैदान में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बोलबाला है। भाजपा, कांग्रेस और वामपंथी दल मतदाताओं को लुभाने के लिए इस नई तकनीक का जमकर सहारा ले रहे हैं। अब रैलियों और भाषणों के साथ-साथ डिजिटल दुनिया में भी जंग छिड़ गई है।
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प्रचार में ऐसे हो रहा एआई का इस्तेमाल
एर्नाकुलम सीट से भाजपा उम्मीदवार पी आर शिवशंकर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल है। इस वीडियो में वे एक जीप पर सवार होकर भारी भीड़ के बीच रैली करते दिख रहे हैं। लोग झंडे लहरा रहे हैं और उनका स्वागत कर रहे हैं। देखने में यह बिल्कुल असली लगता है, लेकिन असल में यह एआई से बना एक वीडियो है। शिवशंकर के सोशल मीडिया मैनेजर कन्नन ने बताया कि वे पीएम मोदी की छवि और भविष्य के विकास कार्यों को दिखाने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे मतदाताओं से जुड़ने के लिए जल्द ही एक चैटबॉट भी शुरू करेंगे।
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कांग्रेस पार्टी भी इस तकनीक का पूरा फायदा उठा रही है। अंगमाली से विधायक रोजी एम जॉन ने बताया कि पार्टी पार्टी अपनी विचारधारा और विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए भी एआई-जनरेटेड वीडियो का इस्तेमाल कर रही है। सबरीमाला मंदिर से सोना गायब होने के मामले को लेकर सत्ताधारी वामपंथी दल पर निशाना साधने के लिए, कांग्रेस ने एआई-जनरेटेड वीडियो तैयार किए हैं। इन वीडियो में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और वामपंथी दल के अन्य नेताओं को दिखाया गया है, और उन पर इस मामले में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। कांग्रेस अपने दिवंगत नेता ओमन चांडी की तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करके भी प्रचार कर रही है ताकि लोगों की भावनाओं से जुड़ा जा सके। जॉन ने बताया कि, अलग-अलग उम्मीदवार भी अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव प्रचार को बढ़ावा देने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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भाजपा की सहयोगी ट्वेंटी-20 पार्टी में एआई के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग राय है। कैंपेन मैनेजर लीना आई के पक्ष में हैं। वहीं, पार्टी के लिए काम करने वाली एक पीआर एजेंसी के प्रमुख जयन का मानना है कि इससे प्रचार की विश्वसनीयता कम हो सकती है। इसलिए वे केवल गूगल और मेटा जैसे पारंपरिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।

सत्ताधारी माकपा (सीपीआई-एम) इस मामले में थोड़ी पीछे है। वित्त मंत्री के एन बालगाोपाल के सोशल मीडिया मैनेजर नृपन दास ने बताया कि उन्होंने केवल कुछ पोस्टरों और सरकारी योजनाओं के प्रचार के लिए एआई की मदद ली है। उन्होंने इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया है।

क्या कह रही जनता?
आम जनता के लिए ये वीडियो मनोरंजन का साधन बन गए हैं। तिरुवनंतपुरम के शाजी और अडूर के राजू जैसे लोगों का कहना है कि वे इन वीडियो को गंभीरता से नहीं लेते और इन्हें देखकर उन्हें हंसी आती है। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि हंसी-मजाक के जरिए गंभीर मुद्दे लोगों के दिमाग में लंबे समय तक टिके रहते हैं।

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