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जंग में एआई का इस्तेमाल घातक: नियमों के अभाव में बढ़ सकते हैं कई खतरे, जानें AI ने कैसे बदला युद्ध का स्वरूप

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Tue, 10 Mar 2026 05:58 AM IST
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सार

अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने आधुनिक युद्ध में एआई तकनीक की भूमिका को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एआई का उपयोग लक्ष्य पहचान, खुफिया विश्लेषण और सैन्य निर्णय में तेजी से बढ़ रहा है।

AI warfare more fatal lack of rules increase many dangers know how AI changed nature of war in hindi
AI FOR WAR - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दुनिया भर में बदलते युद्ध के स्वरूप के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई अब सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बनती जा रही है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने इस तकनीक की भूमिका को वैश्विक बहस के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि एआई ने युद्ध की गति और क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। लेकिन इसके इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय नियम नहीं होने के कारण भविष्य में इसके अनियंत्रित प्रसार का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।

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युद्ध के मैदान में एआई का उपयोग लक्ष्य पहचान, खुफिया जानकारी के विश्लेषण और सैन्य निर्णय लेने में मदद के लिए किया जा रहा है। इससे सैन्य अभियानों की गति तेज हो जाती है और हमले ज्यादा सटीक हो सकते हैं। हालांकि तकनीक के तेजी से विकास के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय कानून और नैतिक नियम काफी पीछे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वैश्विक स्तर पर नियम तय नहीं किए गए तो एआई आधारित हथियार प्रणालियां युद्ध को और खतरनाक बना सकती हैं।
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युद्ध में एआई तकनीक का इस्तेमाल कैसे हो रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक युद्ध में एआई आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका की सेना पहले से ही एआई का उपयोग खुफिया विश्लेषण और लक्ष्य पहचान के लिए कर रही है। इसमें ‘मेवन स्मार्ट सिस्टम’ जैसी तकनीक शामिल है, जो इमेज प्रोसेसिंग और लक्ष्य की पहचान में मदद करती है। इस तरह की प्रणालियां सैन्य अभियानों को तेज और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करती हैं।

तकनीकी विकास से पीछे क्यों हैं अंतरराष्ट्रीय नियम?
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई तकनीक बहुत तेजी से विकसित हो रही है, जबकि उसके उपयोग को नियंत्रित करने वाले नियम और अंतरराष्ट्रीय समझौते काफी धीमी गति से बनते हैं। राजनीतिक वैज्ञानिक माइकल होरोविट्ज के अनुसार तकनीक का विकास नियमन की प्रक्रिया से कहीं आगे निकल चुका है। इससे यह खतरा बढ़ गया है कि कई देश बिना स्पष्ट नियमों के एआई आधारित सैन्य तकनीक का इस्तेमाल करने लगेंगे।

 क्या एआई से नागरिक हताहत कम हो पाए हैं?
एआई समर्थक अक्सर दावा करते हैं कि सटीक लक्ष्य पहचान के कारण युद्ध में नागरिकों की मौत कम हो सकती है। लेकिन हाल के संघर्षों के अनुभव इस दावे को पूरी तरह साबित नहीं करते। यूक्रेन और गाजा जैसे युद्ध क्षेत्रों में एआई तकनीक का उपयोग होने के बावजूद बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या तकनीक वास्तव में मानवीय नुकसान कम करने में सक्षम है।

स्वायत्त घातक हथियारों को लेकर विवाद क्यों?
एआई का सबसे विवादास्पद पहलू स्वायत्त घातक हथियार प्रणालियां हैं। इसमें एआई संचालित ड्रोन या हथियार बिना मानव नियंत्रण के हमला कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार किसी भी हथियार प्रणाली को सैन्य और नागरिक लक्ष्यों में स्पष्ट अंतर करना जरूरी होता है। लेकिन विशेषज्ञों को डर है कि एआई आधारित हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल से यह संतुलन बिगड़ सकता है और भविष्य के युद्ध और अधिक खतरनाक हो सकते हैं।


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