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Tamil Nadu: फ्लोर टेस्ट में विजय के समर्थन में क्यों आए AIADMK के बागी विधायक?, सीवे षणमुगम ने खोला राज

पीटीआई, चेन्नई Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 13 May 2026 05:19 PM IST
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सार

एआईएडीएमके के बागी विधायकों का नेतृत्व कर रहे सीवे षणमुगम ने पार्टी में किसी भी तरह की टूट से इनकार किया। उन्होंने कहा, "पार्टी में कोई विभाजन नहीं है। अन्नाद्रमुक की भविष्य की सफलता तय करने के लिए हमें तुरंत पार्टी की आम परिषद की बैठक बुलानी चाहिए।"

AIADMK rebel leader C Ve Shanmugam says Similar anti-DMK ideology prompted support to TVK floor test
एआईएडीएमके के बागी नेता सीवे षणमुगम - फोटो : ANI
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विस्तार

तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार ने बुधवार को 144 विधायकों के समर्थन के साथ बहुमत साबित कर दिया। विजय के समर्थन में अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के लगभग 25 विधायकों भी पार्टी से विद्रोह कर वोटिंग में शामिल हुए थे। इन बागी नेताओं के नेतृत्व कर रहे सीवे षणमुगम ने बुधवार को बताया कि इन विधायकों ने टीवीके सरकार का समर्थन क्यों किया?
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उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी और सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके का वैचारिक एजेंडा एक जैसा है, जिसमें वे द्रमुक (डीएमके) को बुराई की ताकत के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा कि इसी समानता के चलते विपक्षी पार्टी के विधायकों के एक वर्ग ने विश्वास मत के दौरान सरकार का समर्थन किया।
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टीवीके सरकार को फ्लोर टेस्ट में मिला 144 विधायकों का समर्थन
तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए षणमुगम ने अन्नाद्रमुक के महासचिव एडप्पादी पलानीस्वामी के इस दावे को खारिज कर दिया कि टीवीके सरकार का समर्थन करने पर उन्हें मंत्रिपद मिलेंगे। षणमुगम और एक अन्य वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाले 25 अन्नाद्रमुक विधायकों की क्रॉस-वोटिंग के कारण 234 सदस्यीय सदन में टीवीके सरकार की संख्या 144 तक पहुंच गई। 

इस दौरान द्रमुक ने सदन से वॉकआउट किया और पीएमके ने मतदान से परहेज किया। एकमात्र भाजपा विधायक तटस्थ रहे। वहीं, पलानीस्वामी सहित 21 अन्य अन्नाद्रमुक विधायकों ने सरकार के खिलाफ मतदान किया।

षणमुगम ने दिया वैचारिक समानता पर जोर
षणमुगम ने कहा, "उनका (पलानीस्वामी) दावा पूरी तरह से झूठा है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। हमने सरकार का समर्थन इसलिए किया, क्योंकि अन्नाद्रमुक और टीवीके दोनों का एक ही वैचारिक एजेंडा है; द्रमुक का विरोध करना।" उन्होंने कहा, "अन्नाद्रमुक पार्टी की स्थापना दिवंगत एमजी रामचंद्रन ने केवल द्रमुक को उखाड़ फेंकने के लिए की थी।"

पार्टी नेतृत्व पर खड़े किए सवाल
पलानीस्वामी द्वारा यह कहे जाने पर कि अन्नाद्रमुक ने पहले ही विधायक दल के नेता, उप नेता और व्हिप का चुनाव कर लिया है। षणमुगम ने कहा, "उनका चुनाव करने से पहले, पार्टी को एक बैठक बुलानी चाहिए थी और सभी 47 विधायकों की मंजूरी लेनी चाहिए थी।" उन्होंने सवाल उठाया, "क्या वह (पलानीस्वामी) बैठक के प्रस्ताव की एक प्रति दिखा सकते हैं? क्या वह इस बारे में जानकारी दे सकते हैं कि विधायक दल की बैठक कब और किस समय आयोजित की गई थी?"

पुदुचेरी रिसॉर्ट में पहुंचाए गए थे AIADMK विधायक
षणमुगम ने दावा किया कि पिछले हफ्ते जब टीवीके सरकार बनाने की कोशिश कर रही थी, तब पलानीस्वामी पुदुचेरी के उस रिसॉर्ट में आए थे जहां अन्नाद्रमुक के विधायक रुके हुए थे। उन्होंने सभी विधायकों के अलग-अलग हस्ताक्षर लिए थे। उन्होंने आगे कहा, "पलानीस्वामी ने कहा था कि उन्होंने पहले ही उच्च स्तर पर बात कर ली है और द्रमुक हमारी पार्टी को बाहर से समर्थन देगा। वह मुख्यमंत्री बनेंगे। हमारी पार्टी को कई मंत्री पद मिलेंगे।"

मंत्री पदों के आश्वासन का आरोप
उन्होंने आगे आरोप लगाया, "दो वरिष्ठ द्रमुक मंत्रियों ने फोन पर उनसे (पलानीस्वामी) संपर्क किया। समर्थन देने के लिए बधाई दी और उन्हें मंत्री पद का आश्वासन दिया। मैं पूरी तरह से आश्चर्यचकित था और इस प्रस्ताव को स्वीकार करने की कल्पना भी नहीं कर सकता था। मेरा परिवार भी इसे स्वीकार नहीं करेगा।"

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पलानीस्वामी ने नहीं ली चुनावी हार की जिम्मेदारी
यह बताते हुए कि अन्नाद्रमुक लगातार चार चुनाव हार चुकी है, षणमुगम ने दावा किया कि पलानीस्वामी ने पार्टी प्रमुख के तौर पर कभी भी किसी भी चुनावी हार की जिम्मेदारी नहीं ली। इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए विधायक एसपी वेलुमणि ने कहा, "हमारा उद्देश्य द्रमुक को हराना है। हमारी पार्टी और टीवीके के सिद्धांत समान हैं। इसलिए, हमने इसका समर्थन किया है।" उन्होंने यह भी दावा किया कि अन्नाद्रमुक के विधायक अभी भी एकजुट हैं।

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