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एक्सप्लेनर: दो कत्ल का नौ साल पुराना कानूनी मामला, जिससे राहत पाने इटली ने चुकाया भारत को मुआवजा

Anil Pandey अनिल पांडेय
Updated Thu, 17 Jun 2021 03:59 PM IST
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सार

हाल ही में भारतीय सुप्रीम कोर्ट में नौ साल से चल रहा एक कानूनी मामला मुआवजा लेकर समाप्त किया गया है। इसमें इटली के दो नौसैनिक आरोपी थे और उन पर दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप था। क्योंकि मामला करीब एक दशक पुराना है, इसलिए हम आपको फ्लैशबैक में ले जाकर पहले पूरा किस्सा कम शब्दों में समझाते हैं।

Amar Ujala Explainer: Fishermen shooting case by Italian marines in India and Supreme Court Verdict, detail story
इटली के नौसैनिक मैसिमिलिआनो लातोरे और साल्वातोर जिरोने - फोटो : PTI File
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विस्तार
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15 फरवरी 2012 की शाम साढ़े चार बजे लक्षद्वीप समूह के पास मछलियां पकड़कर लौट रहे भारतीय मछुआरों की एक नाव पर दो मिनट तक गोलियां चलाई गईं थी। यह गोलीबारी एक मर्चेंट शिप से की गई थी। ‘एनरिका लेक्सी’ नाम का यह ऑयल टैंकर मर्चेंट शिप सिंगापुर से मिस्र जा रहा था और इस पर इटली का झंडा लगा हुआ था।

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इस जहाज में 34 लोग इस पर सवार थे, जिसमें इटली की नौसेना के 6 जवान भी शामिल थे। इन नौसैनिकों को जहाज की सुरक्षा के लिए तैनात किया था। भारतीय मछुआरों की नाव का नाम ‘सेंट एंटनी’ था और उसके मालिक फ्रेडी लुईस ने बताया था कि बिना किसी चेतावनी के उनपर गोली चलाई गई थी। फ्रेडी की नाव पर सवार केरल के दो मछुआरों की इस गोलीबारी में मौत हो गई थी। यह घटना केरल के तट से 20 समुद्री मील दूर हुई थी। घटना के बाद भारतीय तटरक्षक बल ने इस जहाज को पकड़ कर इटली के दोनों नौसैनिकों को हिरासत में ले लिया था।
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तब से ही दोनों नौसैनिकों पर भारतीय अदालत में केस चल रहा था। दरअसल इटली की सरकार ने इस मामले को समाप्त करने के लिए न्यायालय को 10 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा दिया है। इटली सरकार ने यह भरोसा भी दिया है कि वो इन दोनों पर अपने देश में आपराधिक मामला भी चलाएंगे। इटली से मिला मुआवजा पीड़ितों को दिया जाएगा।

ऐसा नहीं है कि इटली बहुत आसानी से मान गया और मुआवजा देकर अपने नौसैनिकों को भारत से ले जाने में सफल हुआ है। दोनों नौसैनिक मैसिमिलिआनो लातोरे और साल्वातोर जिरोने ने गिरफ्तारी के बाद कहा था कि उन्होंने जानबूझकर गोलियां नहीं चलाईं थीं। उन्होंने कहा था कि उन्हें ऐसा लगा कि नाव में समुद्री डकैत हैं और उनसे बचाव के लिए गोलीबारी की गई थी।

लुका छिपी चलती रही
नौसैनिकों की गिरफ्तारी का मामला मीडिया में खूब चला और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद इटली के तत्कालीन विदेश मंत्री गुइलो तेरजी सामने आए और उन्होंने भारत पर आरोप मढ़ने की कोशिश की। उन्होंने इटली की मीडिया से कहा कि मर्चेंट शिप एनरिका लेक्सी को धोखे से भारतीय जलसीमा में ले जाया गया और नौसैनिकों को हिरासत में लिया गया। बकौल गुइलो, जहाज को अपराध की छानबीन के नाम पर भारतीय जलसीमा में रखा गया। हालांकि भारत सरकार ने इसका खंडन करते हुए इसे सफेद झूठ कहा।

मतदान के नाम पर
कुछ समय बाद इटली के वकीलों ने दोनों नौसैनिकों को जमानत पर छोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि इटली में चुनाव हो रहे हैं और उसमें मतदान के लिए दोनों को जमानत दी मिलनी चाहिए। इस शर्त पर दोनों को जमानत दी गई कि चुनाव के बाद वो वापस भारत आएंगे। लेकिन जनवरी 2013 से इटली दोनों को भारत वापस भेजने से बचने के लिए नौटंकी करने लगा।

फिर अचानक इटली ने शर्त रखी कि वो दोनों नौसैनिकों को तभी भारत भेजेगा, जब भारत सरकार दोनों को मौत की सजा न देने की गारंटी दे। इसके बाद शुरू हुआ कूटनीति का खेल। भारत ने इटली के राजदूत पर देश छोड़कर जाने की रोक लगा दी। काफी उठापटक के बाद 22 मार्च 2013 को आखिरकार दोनों नौसैनिक भारत लाए गए।

दिल्ली हाईकोर्ट से होते हुए यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। दोनों नौसैनिकों के विरुद्ध एफआईआर प्रस्तुत की गई जिसमें हत्या, हत्या का प्रयास और साजिशन हत्या के आरोप लगाए गए।

जब अंतरराष्ट्रीय बन गया मामला
इटली ने मामले को संयुक्त राष्ट्र के जरिये सुलझाने की कोशिश भी की। लेकिन 11 फरवरी 2014 को संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव बान की मून ने कहा कि दोनों देशों को आपसी बातचीत से ये मामला सुलझाना चाहिए। 21 जुलाई 2015 को इटली इस मामले को समुद्री कानून के अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण (इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी) में ले गया। यहां से मामले को सुनवाई पूरी होने तक जस कर तस रखने के लिए कहा गया।

24 अगस्त 2015 को इस न्यायाधिकरण ने 15:6 से बहुमत से यह फैसला सुनाया कि ‘भारत और इटली इस मामले पर अपने-अपने देश की अदालतों में हो रही सुनवाई को निरस्त कर दें।' इसके साथ ही दोनों देशों से इस घटना की अपनी-अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया था।

फिर आया फैसला
भारतीय विदेश मंत्रालय ने जुलाई 2020 में कहा कि 'इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी' ने यह माना है कि इटली ने हमारी सीमा क्षेत्र का उल्लंघन किया है। वहीं इटली के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ‘ट्रिब्यूनल ने यह माना है कि नौसैनिक उस समय ड्यूटी पर थे इसलिए भारतीय अदालत में उन पर मुकदमा चलाना सही नहीं है। अधिकार क्षेत्र के उल्लंघन पर इटली ने कहा कि वो इसके लिए जुर्माना भरने को तैयार हैं। इसके बाद यह तय हो गया था कि मामला मुआवजे से खत्म हो सकता है। मुआवजे की रकम तय करने के लिए मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा।

अदालती दखल के बाद मुआवजे की रकम 10 करोड़ रुपये तय हुई। इसमें से 4-4 करोड़ रुपये इटली के नौसैनिकों की गोली से मारे गए भारतीय मछुआरों के परिवार को दिए जाएंगे और बाकि दो करोड़ रुपये भारतीय नाव के मालिक को बतौर हर्जाना दिया जाएगा।

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