Shivsena UBT: सांसदों के पाला बदलने के बीच उद्धव ठाकरे ने पार्टी नेताओं के साथ की बैठक, बनाई खास रणनीति
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए। इस दौरान उद्धव ठाकरे ने मुंबई में पार्टी नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में लोकसभा के तीन और राज्यसभा के एक सांसद मौजूद रहे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
महाराष्ट्र में मची राजनीतिक हलचल के बीच, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सोमवार को मुंबई में पार्टी नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम, संगठन से जुड़े मामलों और विधानसभा में पार्टी की रणनीति पर चर्चा हुई। यह बैठक उस वक्त हुई है जब उद्धव गुट के छह सांसद उनका साथ छोड़ एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना में शामिल हो रहे थे।
पक्षप्रमुख मा. श्री. उद्धवसाहेब ठाकरे ह्यांनी आज शिवालय येथे शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) पक्षाच्या आमदारांसोबत संवाद साधला. ह्यावेळी युवासेनाप्रमुख शिवसेना नेते आमदार आदित्य ठाकरे, शिवसेना नेते खासदार संजय राऊत, शिवसेना नेते आमदार ॲड. अनिल परब, शिवसेना नेते विधानसभा गटनेते… pic.twitter.com/znvHuPe0r4
विज्ञापन— ShivSena - शिवसेना Uddhav Balasaheb Thackeray (@ShivSenaUBT_) June 22, 2026विज्ञापन
इन सांसदों ने छोड़ा साथ
बता दें कि जिन छह सांसदों ने पार्टी का साथ छोड़ा है, उनमें नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं। वहीं अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय राउत पार्टी अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे कई विधायकों के साथ उद्धव ठाकरे से अलग हो गए थे, जिसके बाद शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी।
महायुति की बड़ी जीत से बढ़ी उद्धव गुट की चिंता
हाल ही में हुए महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 17 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज की है। इन सीटों के लिए 18 जून को मतदान हुआ था। हालांकि मतदान से पहले ही गठबंधन के छह उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए थे, जिससे उसे शुरुआती बढ़त मिल गई थी। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा हुआ और उसने 11 सीटें जीतीं। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) को तीन और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) को दो सीटें मिलीं।
नासिक में बागी उम्मीदवार ने बिगाड़ा खेल
सिर्फ नासिक सीट ऐसी रही जहां महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। यहां निर्दलीय उम्मीदवार और भाजपा के बागी गोकुल गीते ने शिवसेना के नरेंद्र दराडे को हरा दिया। गीते की जीत को उस इलाके में शिवसेना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में शिवसेना के रवींद्र फाटक (ठाणे) और दुष्यंत चतुर्वेदी (यवतमाल), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अनिकेत तटकरे (रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग) और विक्रम काकड़े (पुणे), तथा भाजपा के अरुण लखानी (वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली) और प्राजक्त तनपुरे (अहिल्यानगर) शामिल रहे। भाजपा के विजेता उम्मीदवारों में सुहास शिरसाट (छत्रपति संभाजीनगर-जालना), अविनाश ब्रह्मनकर (भंडारा-गोंदिया), धैर्यशील कदम (सांगली-सतारा), राजेंद्र राऊत (सोलापुर), बसवराज पाटिल (धाराशिव-लातूर-बीड), राजीव पोतदार (नागपुर), नंदकिशोर महाजन (जलगांव), प्रवीण पोटे (अमरावती) और अमर राजुरकर (नांदेड़) शामिल हैं। शिवसेना के सैयद खान परभणी-हिंगोली क्षेत्र से विजयी रहे।
ये भी पढ़ें: उद्धव के छह सांसद शिवसेना में शामिल: एकनाथ शिंदे ने दिलाई पार्टी की सदस्यता, कहा- ऑपरेशन टाइगर अब पूरा और सफल
स्थानीय निकायों में और मजबूत हुई महायुति
इन नतीजों के बाद स्थानीय निकायों में महायुति की पकड़ और मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक जानकार इसे राज्य में होने वाले आगामी चुनावों से पहले सत्ताधारी गठबंधन के लिए बड़ी बढ़त के रूप में देख रहे हैं।